मानसून सत्र 2025 से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की BAC बैठक, 40 दलों के 58 नेता शामिल
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 19 जुलाई को संसद के मानसून सत्र की पूर्व संध्या पर बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक की अध्यक्षता की और सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से जनहित एवं राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सुझाव आमंत्रित किए। यह सत्र सोमवार, 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने की संभावना है, जिसमें 25 दिनों में 19 बैठकें प्रस्तावित हैं।
BAC बैठक में क्या हुआ
BAC की बैठक में सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों ने मानसून सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले विधायी एवं अन्य कार्यों पर अपने विचार साझा किए। सदस्यों ने सत्र के कामकाज की सूची में शामिल कराने योग्य कई मुद्दे सुझाए।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रचनात्मक चर्चा, सार्थक भागीदारी और संसद की उच्च परंपराओं के पालन पर बल दिया। उन्होंने सभी दलों से सदन की कार्यवाही सुचारू और व्यवस्थित रूप से चलाने में पूर्ण सहयोग की अपील की। समिति ने स्पष्ट किया कि चर्चा का समय और कामकाज की सूची निर्धारित संसदीय प्रक्रियाओं तथा नेताओं से परामर्श के बाद तय की जाएगी।
राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक
BAC बैठक से अलग, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में संसद भवन परिसर में एक सर्वदलीय बैठक भी आयोजित हुई। इसे संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने बुलाया था और इसमें 40 राजनीतिक दलों के 58 नेताओं ने भाग लिया, जिनमें कई केंद्रीय मंत्री भी शामिल थे।
बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा — जो राज्यसभा में सदन के नेता भी हैं — संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल तथा संसदीय कार्य एवं सूचना-प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन उपस्थित रहे।
सत्र की रूपरेखा और विधायी एजेंडा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नेताओं को बताया कि मानसून सत्र 25 दिनों तक चलेगा और इसमें 19 बैठकें होंगी। सत्र के संभावित समापन की तिथि 13 अगस्त बताई गई, हालाँकि यह सरकारी कामकाज की आवश्यकताओं पर निर्भर करेगी।
किरण रिजिजू ने जानकारी दी कि मानसून सत्र के विधायी कामकाज का विवरण संसद के दोनों सदनों के सचिवालयों द्वारा 16 जुलाई को बुलेटिन पार्ट-2 में पहले ही जारी किया जा चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार दोनों सदनों के नियमों के अनुसार किसी भी महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है।
विपक्ष और सत्तापक्ष का रुख
विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने मानसून सत्र में उठाए जाने वाले संभावित मुद्दों पर अपने विचार रखे और सरकार को सहयोग देने का भरोसा जताया। यह ऐसे समय में आया है जब पिछले कई सत्रों में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच व्यवधान की घटनाएँ सदन की उत्पादकता पर सवाल उठाती रही हैं।
गौरतलब है कि मानसून सत्र परंपरागत रूप से विधायी दृष्टि से सबसे सक्रिय सत्रों में गिना जाता है। इस बार भी सभी पक्षों की सहमति से सत्र को सकारात्मक और गरिमापूर्ण बनाने की उम्मीद जताई गई है।
आगे क्या होगा
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से आधिकारिक रूप से शुरू होगा। कामकाज की अंतिम सूची और चर्चा का समय-निर्धारण संसदीय प्रक्रियाओं के तहत तय किया जाएगा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विश्वास जताया कि सभी सदस्य मिलकर इस सत्र को जनहित में सफल और गरिमापूर्ण बनाएँगे।