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मध्य प्रदेश विधानसभा मानसून सत्र 20 जुलाई से: 5 दिन, भोपाल में 11वाँ सत्र

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मध्य प्रदेश विधानसभा मानसून सत्र 20 जुलाई से: 5 दिन, भोपाल में 11वाँ सत्र

सारांश

मध्य प्रदेश विधानसभा का पाँच दिवसीय मानसून सत्र 20 से 24 जुलाई 2026 के बीच भोपाल में आयोजित होगा। राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने संविधान के अनुच्छेद 174(1) के तहत इसे आहूत किया है। सरकार अनुपूरक बजट और कल्याण योजनाएँ पेश करेगी, जबकि विपक्ष तीखे सवाल उठाने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने मध्य प्रदेश विधानसभा के 16वें सत्र का 11वाँ सत्र 20 जुलाई 2026 को सुबह 11:00 बजे से आहूत किया।
पाँच दिवसीय मानसून सत्र 20 से 24 जुलाई 2026 तक भोपाल में चलेगा।
नोटिस 14 जुलाई से, निजी विधेयक 24 जून तक और प्रस्ताव 9 जुलाई तक प्रस्तुत करने की समय-सीमा।
सत्र प्रतिदिन दो पालियों में — सुबह 11 से 1:30 बजे और दोपहर 3 से शाम 5:30 बजे — आयोजित होगा।
सरकार अनुपूरक बजट, अवसंरचना परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं पर जानकारी देगी; विपक्ष राज्य की चुनौतियों पर प्रश्न उठाएगा।

मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से भोपाल में शुरू होगा। राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने विधानसभा के 16वें सत्र के 11वें सत्र को 20 जुलाई 2026 को सुबह 11:00 बजे IST से आहूत किया है। यह पाँच दिवसीय सत्र 24 जुलाई 2026 तक चलेगा।

संवैधानिक आधार और अधिसूचना

यह आह्वान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(1) के तहत किया गया है। विधानसभा सचिवालय ने मंगलवार, 16 जून 2026 को इसे आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया। प्रधान सचिव अरविंद शर्मा द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, सभी कार्यदिवसों में प्रश्नकाल के बाद सरकारी कामकाज संचालित होगा।

सत्र का दैनिक कार्यक्रम

विधानसभा की बैठक प्रतिदिन दो पालियों में होगी — सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक और दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक। यह समय-सारणी तब तक लागू रहेगी जब तक अध्यक्ष द्वारा अन्यथा निर्देश न दिया जाए।

नोटिस और प्रस्तुति की समय-सीमाएँ

स्थगन प्रस्तावों, ध्यानाकर्षण प्रस्तावों और नियम 267-के के अंतर्गत मामलों के लिए नोटिस 14 जुलाई 2026 से स्वीकार किए जाएंगे। निजी सदस्यों के विधेयक प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 24 जून 2026 है, जबकि प्रस्ताव 9 जुलाई 2026 तक दाखिल किए जाने चाहिए।

प्रक्रियात्मक दिशानिर्देश

सचिवालय ने सदस्यों को प्रक्रियात्मक नियमों की विस्तृत याद दिलाई है। इनमें अध्यक्ष की स्वीकृति से पहले नोटिस प्रकाशित करने पर प्रतिबंध, सुरक्षा प्रोटोकॉल, लिटरेचर डिस्ट्रीब्यूशन और भाषण अपडेट के नियम शामिल हैं। नियम 251 पर विशेष जोर दिया गया है, जिसके अंतर्गत बहसों के दौरान शिष्टाचार बनाए रखना, व्यक्तिगत आरोपों, आपत्तिजनक भाषा और न्यायिक विचाराधीन मामलों के संदर्भों पर रोक लगाना शामिल है।

सत्र में क्या होगा आगे

इस मानसून सत्र में शासन, विकास और जन कल्याण के प्रमुख मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी की उम्मीद है। सरकार की ओर से अनुपूरक बजट, अवसंरचना परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं पर जानकारी प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। वहीं विपक्ष राज्य की वर्तमान चुनौतियों पर सवाल उठाने की तैयारी में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एजेंडा भारी हो सकता है — अनुपूरक बजट, लंबित कल्याण योजनाएँ और विपक्ष के संभावित स्थगन प्रस्ताव मिलकर सदन को व्यस्त रखेंगे। उल्लेखनीय है कि नियम 251 और प्रक्रियात्मक अनुशासन पर सचिवालय का विशेष जोर यह संकेत देता है कि पिछले सत्रों में शिष्टाचार को लेकर चिंताएँ रही हैं। असली परीक्षा यह होगी कि क्या सरकार सीमित समय में ठोस विधायी उपलब्धि दर्ज कर पाती है, या यह सत्र भी घोषणाओं तक सिमटकर रह जाता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 2026 कब से शुरू होगा?
मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 को सुबह 11:00 बजे से भोपाल में शुरू होगा और 24 जुलाई 2026 तक चलेगा। यह पाँच दिवसीय सत्र राज्यपाल मंगूभाई पटेल द्वारा संविधान के अनुच्छेद 174(1) के तहत आहूत किया गया है।
इस सत्र में नोटिस और प्रस्ताव कब तक जमा करने होंगे?
स्थगन प्रस्तावों और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के नोटिस 14 जुलाई 2026 से स्वीकार किए जाएंगे। निजी सदस्यों के विधेयक 24 जून 2026 तक और अन्य प्रस्ताव 9 जुलाई 2026 तक प्रस्तुत करने की समय-सीमा निर्धारित की गई है।
विधानसभा सत्र का दैनिक कार्यक्रम क्या होगा?
सत्र प्रतिदिन दो पालियों में होगा — सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक और दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक। सभी कार्यदिवसों में प्रश्नकाल के बाद सरकारी कामकाज संचालित होगा।
इस मानसून सत्र में किन विषयों पर चर्चा होने की संभावना है?
सरकार की ओर से अनुपूरक बजट, अवसंरचना परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं पर जानकारी प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। विपक्ष राज्य की वर्तमान शासन चुनौतियों पर सवाल उठाने की तैयारी में है।
नियम 251 का सत्र में क्या महत्व है?
नियम 251 बहसों के दौरान शिष्टाचार को नियंत्रित करता है। इसके तहत व्यक्तिगत आरोप, आपत्तिजनक भाषा और न्यायिक विचाराधीन मामलों के संदर्भ प्रतिबंधित हैं। सचिवालय ने इस सत्र के लिए इस नियम का विशेष रूप से उल्लेख किया है।
राष्ट्र प्रेस
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