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तसलीमा नसरीन का कोलकाता दौरा: 'मुझे बुलाया 'सेक्युलर मिशन' ने, भाजपा ने नहीं' — एक्स पर दी सफाई

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तसलीमा नसरीन का कोलकाता दौरा: 'मुझे बुलाया 'सेक्युलर मिशन' ने, भाजपा ने नहीं' — एक्स पर दी सफाई

सारांश

करीब 18 साल से अधिक समय बाद कोलकाता लौट रही तसलीमा नसरीन ने एक्स पर स्पष्ट किया — उन्हें बुलाया 'सेक्युलर मिशन' ने, BJP ने नहीं। लेकिन वामपंथी आलोचना और राजनीतिक रंग ने इस दो-दिवसीय दौरे को एक बड़े विवाद में बदल दिया है।

मुख्य बातें

तसलीमा नसरीन ने 19 जुलाई 2026 को एक्स पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि उन्हें कोलकाता 'सेक्युलर मिशन' ने बुलाया है, BJP ने नहीं।
सेक्युलर मिशन का नेतृत्व प्रगतिशील मुस्लिम उस्मान गनी मल्लिक करते हैं।
तसलीमा करीब 18 साल, 8 महीने और 10 दिन बाद कोलकाता लौट रही हैं; दौरा केवल दो दिनों का है।
पश्चिम बंगाल सरकार केवल सुरक्षा व्यवस्था कर रही है — आमंत्रण देने वाली नहीं है।
तसलीमा ने आरोप लगाया कि वाम मोर्चा और TMC सरकारों ने उन्हें पहले पश्चिम बंगाल में आने से रोका था।
उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए किसी भी विचार या धर्म की आलोचना के अधिकार को रेखांकित किया।

बांग्लादेशी लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता तसलीमा नसरीन ने 19 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट के ज़रिए अपने कोलकाता दौरे को लेकर उठ रहे विवाद पर सफाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें कोलकाता आमंत्रित करने वाला संगठन 'सेक्युलर मिशन' है, जिसका नेतृत्व प्रगतिशील मुस्लिम उस्मान गनी मल्लिक करते हैं — न कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और न ही पश्चिम बंगाल सरकार

दौरे का संदर्भ और विवाद की पृष्ठभूमि

तसलीमा नसरीन के अनुसार, यह दौरा केवल दो दिनों का है और वह करीब 18 साल, 8 महीने और 10 दिन बाद कोलकाता लौट रही हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार केवल उनकी सुरक्षा व्यवस्था कर रही है, जो किसी भी राज्य सरकार की सामान्य प्रशासनिक ज़िम्मेदारी होती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब भी वह किसी राज्य में जाती हैं, वहाँ की सरकार उनकी सुरक्षा का प्रबंध करती है।

गौरतलब है कि तसलीमा नसरीन को पहले वाम मोर्चा सरकार और बाद में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के दौर में पश्चिम बंगाल में प्रवेश से रोका गया था। उनके लेखन और पुस्तकों से जुड़े कार्यक्रमों पर भी कथित तौर पर प्रतिबंध लगाए गए थे।

वामपंथी आलोचना पर तसलीमा का पलटवार

तसलीमा ने आरोप लगाया कि कुछ वामपंथी नेता उनके कोलकाता जाने को राजनीतिक रंग दे रहे हैं और उन पर BJP या हिंदुत्व समर्थक होने के आरोप मढ़ रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि वह पहले भी केरल में वामपंथी सरकार के निमंत्रण पर कई बार जा चुकी हैं, जहाँ उनका स्वागत हुआ और सुरक्षा भी मिली। उन्होंने सवाल उठाया कि उस समय इस तरह के सवाल क्यों नहीं उठाए गए।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने पहले उन्हें पश्चिम बंगाल से बाहर जाने के लिए मजबूर किया था, वही अब उनके राज्य में लौटने पर आपत्ति जता रहे हैं — जिसे उन्होंने विरोधाभासी बताया।

तसलीमा के विचार और उद्देश्य

तसलीमा नसरीन ने कहा कि उनका उद्देश्य मुस्लिम समाज में शिक्षा, वैज्ञानिक सोच, महिलाओं के अधिकार और समानता को बढ़ावा देना है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग उनके इन विचारों से असहमत हैं और इसी कारण उनका विरोध करते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी लेखक की रचनाओं की गुणवत्ता पर बहस हो सकती है, लेकिन किसी लेखक को धमकी देना या देश छोड़ने पर मजबूर करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी विचार या धर्म की आलोचना करना भी बोलने की आज़ादी का अभिन्न हिस्सा है।

आगे क्या

यह दौरा दो दिनों का बताया जा रहा है और इसे लेकर राजनीतिक हलकों में बहस जारी है। सेक्युलर मिशन के आयोजन का स्वरूप और कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। तसलीमा नसरीन का यह कोलकाता दौरा भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक-सांस्कृतिक संवेदनशीलता की बहस को एक बार फिर केंद्र में ला सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उन्हीं की सरकारों ने तसलीमा को पश्चिम बंगाल से बाहर रखा। असली सवाल यह नहीं कि उन्हें कौन बुला रहा है — असली सवाल यह है कि एक लेखिका को डेढ़ दशक से अधिक समय तक अपने पाठकों से दूर क्यों रहना पड़ा।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तसलीमा नसरीन को कोलकाता किसने बुलाया है?
तसलीमा नसरीन को कोलकाता 'सेक्युलर मिशन' संगठन ने आमंत्रित किया है, जिसका नेतृत्व प्रगतिशील मुस्लिम उस्मान गनी मल्लिक करते हैं। तसलीमा ने एक्स पर स्पष्ट किया कि इस दौरे से न BJP का और न ही पश्चिम बंगाल सरकार का कोई संबंध है।
तसलीमा नसरीन कितने समय बाद कोलकाता लौट रही हैं?
तसलीमा नसरीन करीब 18 साल, 8 महीने और 10 दिन बाद कोलकाता लौट रही हैं। यह दौरा केवल दो दिनों का है।
तसलीमा नसरीन के कोलकाता दौरे पर विवाद क्यों है?
कुछ वामपंथी नेताओं ने इस दौरे को राजनीतिक रंग देते हुए तसलीमा पर BJP या हिंदुत्व समर्थक होने के आरोप लगाए हैं। तसलीमा ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्हें पहले वाम मोर्चा और TMC सरकारों ने ही पश्चिम बंगाल में आने से रोका था।
पश्चिम बंगाल सरकार की इस दौरे में क्या भूमिका है?
पश्चिम बंगाल सरकार केवल तसलीमा नसरीन की सुरक्षा व्यवस्था कर रही है, जो किसी भी राज्य सरकार की सामान्य प्रशासनिक ज़िम्मेदारी है। तसलीमा ने स्पष्ट किया कि सरकार ने उन्हें आमंत्रित नहीं किया है।
तसलीमा नसरीन को पहले पश्चिम बंगाल से क्यों जाना पड़ा था?
तसलीमा नसरीन के अनुसार, पश्चिम बंगाल की वाम मोर्चा सरकार और बाद में तृणमूल कांग्रेस सरकार ने उन्हें राज्य में आने से रोका था। उनके लेखन और पुस्तकों से जुड़े कार्यक्रमों पर भी कथित तौर पर प्रतिबंध लगाए गए थे।
राष्ट्र प्रेस
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