3 अगस्त 2026
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तसलीमा नसरीन के बयान पर सियासी घमासान: BJP बोली- हर मुद्दे पर टिप्पणी ज़रूरी नहीं

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तसलीमा नसरीन के बयान पर सियासी घमासान: BJP बोली- हर मुद्दे पर टिप्पणी ज़रूरी नहीं

सारांश

तसलीमा नसरीन के पश्चिम बंगाल दौरे ने एक बार फिर राजनीतिक घमासान छेड़ दिया है — BJP ने दूरी बनाई, कांग्रेस ने इसे निजी राय बताया और ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन ने उनके भारत में रहने पर ही सवाल उठा दिए। यह बहस अभिव्यक्ति, धर्म और कूटनीति के उस नाज़ुक त्रिकोण को फिर उजागर करती है जो हर बार तसलीमा के नाम के साथ सामने आता है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी तसलीमा नसरीन के हर बयान पर टिप्पणी करने के पक्ष में नहीं है।
भट्टाचार्य ने सीपीआईएम पर आरोप लगाया कि उनकी नीतियों के कारण पश्चिम बंगाल में लश्कर-ए-तैयबा और आईएसआई के सक्रिय होने के हालात बने।
TMC के पूर्व प्रवक्ता रिजु दत्ता ने कहा कि नसरीन का दौरा भाजपा पर लगने वाले इस्लाम-विरोधी आरोपों को खारिज करता है।
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने इसे तसलीमा की 'निजी राय' बताया; मोहम्मद जावेद ने देश के आंतरिक मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही।
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने सरकार से तसलीमा को भारत में रहने की अनुमति न देने का आग्रह किया।

बांग्लादेश से निर्वासित विवादास्पद लेखिका तसलीमा नसरीन के हालिया बयानों और पश्चिम बंगाल दौरे ने देश की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने इस पर परस्पर विरोधी रुख अपनाया है, जो 2 अगस्त 2026 को सामने आया।

भाजपा का रुख: दूरी बनाए रखने की कोशिश

पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि पार्टी तसलीमा नसरीन के हर बयान पर प्रतिक्रिया देने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा, 'तसलीमा नसरीन ने जो कहा है, उस पर भाजपा को हर बात और हर बार टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। बांग्लादेश एक अलग देश है, और तसलीमा नसरीन कभी बांग्लादेश की नागरिक थीं। मुझे उनकी मौजूदा नागरिकता की स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं है।'

साथ ही भट्टाचार्य ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआईएम पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सीपीआईएम ने बुद्धदेव भट्टाचार्य की नीतियों पर समय रहते अमल किया होता, तो पश्चिम बंगाल में लश्कर-ए-तैयबा और आईएसआई के सक्रिय होने के जो आरोप आज लग रहे हैं, वे हालात उत्पन्न नहीं होते।

तृणमूल और कांग्रेस की प्रतिक्रिया

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व प्रवक्ता रिजु दत्ता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में तसलीमा नसरीन का दौरा उन आरोपों को खारिज करता है जो विपक्षी दल अक्सर भाजपा पर लगाते हैं — कि वह इस्लाम-विरोधी है और अन्य धर्मों का सम्मान नहीं करती।

कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने तसलीमा नसरीन के बयान को उनकी 'निजी राय' करार दिया। उन्होंने कहा कि मदरसा हो, स्कूल हो, संस्कृत विद्यालय हो या कोई अन्य संस्थान — इन सभी का उद्देश्य बच्चों को शिक्षा देना है। वहीं कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि देश में पहले से अनेक ज़रूरी मुद्दे हैं और उन पर ध्यान देना अधिक उचित होगा।

मुस्लिम संगठन की आपत्ति

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने इस्लाम पर तसलीमा नसरीन की टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की और सरकार से आग्रह किया कि उन्हें भारत में रहने की अनुमति न दी जाए। रशीदी ने कहा, 'तसलीमा नसरीन एक ऐसी लेखिका हैं, जो हमेशा विवादों में रही हैं। पैगंबर मोहम्मद और धर्म से जुड़ी बातों पर अपनी टिप्पणियों के कारण उन्हें देश से बाहर रहना पड़ा है। अगर वह कहती हैं कि यूनुस सरकार नाकाम रही, तो वह बांग्लादेश क्यों नहीं जातीं?'

व्यापक संदर्भ: क्यों मायने रखती है यह बहस

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल जारी है और भारत-बांग्लादेश संबंध संवेदनशील दौर से गुज़र रहे हैं। गौरतलब है कि तसलीमा नसरीन 1994 से निर्वासन में हैं और उनकी भारत में उपस्थिति हमेशा राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को जन्म देती रही है। विभिन्न दलों की परस्पर विरोधी प्रतिक्रियाएँ दर्शाती हैं कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक भावनाएँ और कूटनीतिक संवेदनशीलता — तीनों के बीच संतुलन बनाना भारतीय राजनीति में कितना जटिल है।

आगे क्या

तसलीमा नसरीन के पश्चिम बंगाल दौरे के बाद यह राजनीतिक बहस और गहरी होने की संभावना है। विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाएँ संकेत देती हैं कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और सार्वजनिक विमर्श दोनों में प्रमुखता पा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

हर दल एक सुविधाजनक रुख अपनाता है — BJP उन्हें बांग्लादेश-विरोधी आख्यान के औज़ार की तरह इस्तेमाल करती है, लेकिन जब सीधे बोलने की बारी आती है तो 'हर बात पर टिप्पणी नहीं' का सहारा लेती है। कांग्रेस का 'निजी राय' वाला बचाव और मुस्लिम संगठनों की माँग — ये सब मिलकर दर्शाते हैं कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भारत की राजनीतिक सहमति कितनी खंडित है। असली सवाल यह है कि क्या कोई भी दल इस मुद्दे पर सिद्धांत-आधारित, सुसंगत रुख रखता है — या सब वोट-बैंक की गणना से तय होता है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तसलीमा नसरीन के किस बयान पर विवाद हुआ है?
तसलीमा नसरीन के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान दिए गए बयानों — जिनमें इस्लाम और बांग्लादेश की यूनुस सरकार पर टिप्पणियाँ शामिल बताई जाती हैं — ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया। ये बयान 2 अगस्त 2026 को सुर्खियों में आए।
BJP ने तसलीमा नसरीन के बयान पर क्या कहा?
पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी तसलीमा नसरीन के हर बयान पर टिप्पणी नहीं करेगी और उनकी मौजूदा नागरिकता स्थिति की जानकारी नहीं है। उन्होंने बांग्लादेश को एक अलग देश बताते हुए मामले से दूरी बनाई।
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन ने क्या माँग की?
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने सरकार से आग्रह किया कि तसलीमा नसरीन को भारत में रहने की अनुमति न दी जाए। उन्होंने इस्लाम और पैगंबर मोहम्मद पर उनकी टिप्पणियों को आपत्तिजनक बताया।
कांग्रेस का तसलीमा नसरीन के बयान पर क्या रुख है?
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने इसे तसलीमा की निजी राय बताया और किसी भी शैक्षणिक संस्थान — चाहे मदरसा हो या संस्कृत विद्यालय — के महत्व पर ज़ोर दिया। सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि देश के आंतरिक मुद्दों पर पहले ध्यान देना चाहिए।
तसलीमा नसरीन भारत में क्यों हैं और उनकी नागरिकता क्या है?
तसलीमा नसरीन बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका हैं जो 1994 से देश से बाहर हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने स्वयं कहा कि उन्हें उनकी मौजूदा नागरिकता स्थिति की जानकारी नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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