तस्लीमा नसरीन की अपील: शेख हसीना को बांग्लादेश लौटने दें, अवामी लीग से बैन हटाए BNP सरकार
सारांश
मुख्य बातें
निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने 2 अगस्त 2026 को कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बांग्लादेश की मौजूदा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार से दो स्पष्ट माँगें रखीं — पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को स्वदेश लौटने की अनुमति दी जाए और अवामी लीग पर लगाया गया प्रतिबंध तत्काल हटाया जाए। नसरीन ने इसे लोकतंत्र और राजनीतिक भागीदारी का सवाल बताया।
नसरीन ने क्या कहा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में नसरीन ने कहा, 'जिस तरह अवामी लीग नेता शेख हसीना को सत्ता से हटाया गया है वह गलत है। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं है।' उन्होंने आगे कहा, 'अवामी लीग पर बैन लगाना भी पूरी तरह अलोकतांत्रिक है। पार्टी को चुनाव में हिस्सा लेने का मौका मिलना चाहिए। मैं चाहती हूं कि शेख हसीना बांग्लादेश वापस आएं।'
उल्लेखनीय है कि नसरीन ने स्वयं अतीत में हसीना की आलोचना की है, फिर भी उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत मतभेद और अवामी लीग पर प्रतिबंध के प्रश्न को अलग रखा जाना चाहिए। गौरतलब है कि नसरीन को शेख हसीना के ही कार्यकाल के दौरान बांग्लादेश से निर्वासित होना पड़ा था — यह विडंबना उनके बयान को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है।
कट्टरपंथ और अल्पसंख्यकों पर चिंता
बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति पर नसरीन ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश में कट्टरपंथी समूहों का प्रभाव घटने के बजाय बढ़ रहा है। उनके अनुसार, जमात-ए-इस्लामी की अब संसद में उपस्थिति होगी, और उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर होता अगर अवामी लीग मुख्य विपक्षी दल के रूप में बनी रहती।
नसरीन ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में हिंदुओं, बौद्धों और ईसाइयों को उत्पीड़न झेलना पड़ रहा है और सरकार दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं करती। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई मदरसों में गैर-मुस्लिमों के प्रति नफरत सिखाई जाती है।
यूनुस और तारिक सरकार पर टिप्पणी
नसरीन ने मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार और तारिक रहमान की BNP सरकार के बीच कोई अंतर नहीं देखा। उन्होंने कहा, 'वास्तव में यूनुस के कार्यकाल में हिंदुओं पर अत्याचार और बढ़ा है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यक सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं जताई जा रही हैं।
भारत-बांग्लादेश संबंध और निर्वासन की पीड़ा
नसरीन ने उम्मीद जताई कि भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंध बेहतर होंगे। उन्होंने भारत के बांग्लादेश की स्वतंत्रता में योगदान को रेखांकित किया। साथ ही, अपनी व्यक्तिगत स्थिति पर उन्होंने कहा, 'लेकिन किसी ने मुझसे वापस जाने को नहीं कहा है। मैं अपने देश कैसे वापस जाऊं।' यह टिप्पणी उनके दशकों के निर्वासन की पीड़ा को उजागर करती है।
आगे क्या
नसरीन की अपील बांग्लादेश में राजनीतिक पुनर्संरेखण की व्यापक बहस के बीच आई है। शेख हसीना की वापसी और अवामी लीग के प्रतिबंध पर BNP सरकार का रुख अभी स्पष्ट नहीं है। बांग्लादेश में आगामी चुनावी प्रक्रिया और अल्पसंख्यक अधिकारों का प्रश्न आने वाले महीनों में केंद्रीय मुद्दे बने रहेंगे।