तसलीमा नसरीन की बांग्लादेश PM तारिक रहमान से अपील — हिंदुओं पर हमले रोकें, अल्पसंख्यकों को सुरक्षा दें
सारांश
मुख्य बातें
निर्वासित लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तसलीमा नसरीन ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर जारी हिंसा को लेकर गहरी चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री तारिक रहमान को एक खुला पत्र लिखा है। उन्होंने सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बहाल करने और 'धार्मिक उग्रवाद तथा मॉब टेरर' के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाने की माँग की है। यह पत्र ऐसे समय में आया है जब 19 मई को सतखीरा और मयमनसिंह जिलों में हिंदू शिक्षकों की गिरफ्तारी की घटनाओं ने व्यापक ध्यान खींचा है।
एक्स पर क्या कहा नसरीन ने
नसरीन ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री तारिक रहमान को सीधे संबोधित किया। उन्होंने लिखा, 'आपने कहा था कि बांग्लादेश में धर्म या जाति की परवाह किए बिना सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए जाएंगे। लेकिन वास्तविकता में हम फिर से हिंदुओं पर हमले, उनकी जमीन पर कब्जा, अफवाहों और आरोपों के आधार पर उनके जीवन का नाश होते देख रहे हैं।' उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या अधिकारियों ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत फैलाने वालों और मॉब अटैक को बढ़ावा देने वालों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई की है।
हालिया घटनाक्रम — सतखीरा और मयमनसिंह
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 19 मई को सतखीरा जिले में हिंदू स्कूल शिक्षक गौरांग सरकार को कक्षा में दिए गए एक कथित बयान को लेकर हिरासत में लिया गया। उन पर मुस्लिम धार्मिक भावनाएँ आहत करने का आरोप लगाया गया। उसी दिन मयमनसिंह जिले के गौरीपुर उपजिला में शाओन चंद्र दास को एक इस्लामिक धार्मिक ग्रंथ के कथित अपमान के आरोप में गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी से पहले इस्लामिक समूह 'तौहीदी जनता' ने गौरीपुर में विरोध मार्च निकाला और शाओन को फाँसी देने की माँग की, ऐसा कथित तौर पर बताया गया है।
इसी क्रम में गोपालगंज के एक स्कूल के कंप्यूटर लैब ऑपरेटर मिथु मंडल पर भी 'इस्लाम का अपमान' करने के आरोप में हमला हुआ। नसरीन ने रेखांकित किया कि इन तीनों मामलों में पुलिस ने हमलावरों के बजाय पीड़ितों को ही गिरफ्तार किया।
पीड़ितों के भविष्य पर सवाल
नसरीन ने मार्मिक सवाल उठाया — 'जेल से बाहर आने के बाद ये लोग क्या करेंगे? अपनी नौकरी खोकर, सामाजिक बहिष्कार झेलकर और अत्यधिक असुरक्षा में ये कैसे जीवित रहेंगे? क्या उन्हें भी आखिरकार देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ेगा?' उन्होंने इससे पहले रसराज दास, टिटू रॉय, उत्सव मंडल और दीपू दास सहित कई हिंदुओं का उल्लेख किया, जिनके घर जलाए गए, मंदिर तोड़े गए और जिन्हें जेल भेजा गया या देश छोड़ने पर मजबूर किया गया।
ब्लासफेमी कानून — दमन का हथियार?
नसरीन ने आरोप लगाया कि 'ब्लासफेमी' के आरोप अब असहमति को दबाने, अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने और सामाजिक आतंक फैलाने का हथियार बन चुके हैं। उनके अनुसार ये केवल अलग-अलग घटनाएँ नहीं, बल्कि 'एक भयावह साजिश' का हिस्सा हैं जिसका मकसद धीरे-धीरे बांग्लादेश को हिंदू-रहित बनाना है। उन्होंने चेतावनी दी, 'यदि राज्य उन लोगों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाता जो बांग्लादेश को धीरे-धीरे हिंदू-रहित देश बनाना चाहते हैं, तो यह चुप्पी उन्हें और बढ़ावा देगी।'
आगे क्या
तसलीमा नसरीन वर्षों से निर्वासन में हैं और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए आवाज उठाती रही हैं। उनकी यह अपील ऐसे समय में आई है जब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं। प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार की ओर से इस पत्र पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।