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तस्लीमा नसरीन की 1 अगस्त कोलकाता वापसी: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की असली परीक्षा

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तस्लीमा नसरीन की 1 अगस्त कोलकाता वापसी: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की असली परीक्षा

सारांश

2007 में कट्टरपंथी दबाव में कोलकाता से निकाली गई लेखिका तस्लीमा नसरीन 1 अगस्त को उसी शहर में एक कट्टरवाद-विरोधी साहित्यिक मंच पर लौट रही हैं। यह यात्रा सत्ता-परिवर्तन के बाद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की असली परीक्षा बन गई है।

मुख्य बातें

लेखिका तस्लीमा नसरीन 1 अगस्त को कोलकाता में एक कट्टरवाद-विरोधी साहित्यिक कार्यक्रम में भाग लेने वाली हैं।
नवंबर 2007 में कट्टरपंथी समूहों के दबाव में तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने उन्हें शहर से बाहर जाने पर मजबूर किया था।
BJP सांसद समिक भट्टाचार्य ने मार्च 2024 में राज्यसभा में उनकी वापसी की माँग उठाई थी।
CPI(M) नेता सुजान चक्रवर्ती ने कहा कि विदेशी नागरिक के प्रवास का निर्णय केंद्र सरकार का है, राज्य का नहीं।
TMC विधायक अखरुज्जमा ने यात्रा पर आपत्ति जताई; नई राज्य सरकार सुरक्षा व्यवस्था मज़बूत कर रही है।

विवादास्पद बांग्लादेशी-मूल की लेखिका तस्लीमा नसरीन 1 अगस्त को कोलकाता में एक कट्टरवाद-विरोधी साहित्यिक कार्यक्रम में भाग लेने वाली हैं — यह वही शहर है जहाँ से उन्हें नवंबर 2007 में कट्टरपंथी दबाव के बीच जबरन निकाला गया था। यह यात्रा राजनीतिक और वैचारिक दोनों स्तरों पर तीखी बहस का केंद्र बन गई है, क्योंकि पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद यह उनकी पहली संभावित उपस्थिति होगी।

2007 का निष्कासन: पृष्ठभूमि

नवंबर 2007 में कट्टरपंथी समूहों ने कोलकाता में हिंसक बंद और दंगे भड़काए थे। उनकी आत्मकथात्मक कृति 'द्विखंडितो' (दो भागों में विभाजित) को निशाना बनाते हुए इन समूहों ने उनके निष्कासन की माँग की थी। तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने कथित तौर पर इस दबाव के सामने घुटने टेक दिए और नसरीन को शहर छोड़ना पड़ा। इसके बाद उनकी रचनाओं पर प्रतिबंध जारी रहा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के दौर में भी राज्य में उनके प्रवेश पर अनौपचारिक रोक बनी रही।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद और पश्चिम बंगाल के वर्तमान पार्टी प्रमुख समिक भट्टाचार्य ने पिछले साल मार्च में संसद के उच्च सदन में माँग की थी कि नसरीन को कोलकाता लौटने की अनुमति दी जाए। यह बयान बाद में एक तीव्र राजनीतिक संदेश के रूप में उभरा।

वहीं, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के नेता सुजान चक्रवर्ती ने कहा कि किसी विदेशी नागरिक के प्रवास संबंधी निर्णय केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, न कि राज्य सरकार के। उन्होंने कहा, 'पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा सरकार रही होगी, लेकिन केंद्र में नहीं — तो राज्य सरकार को दोष क्यों दिया जाए?'

तृणमूल कांग्रेस विधायक अखरुज्जमा ने इस यात्रा पर तीखी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि नसरीन ने मुस्लिम समुदाय और इस्लाम में शरिया के विरुद्ध बहुत कुछ कहा है और यदि सरकार ऐसे व्यक्ति का सम्मान करती है तो यह एक राजनीतिक संदेश है।

नई सरकार का रुख

नई राज्य सरकार इस आयोजन को एक वैचारिक बदलाव के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत कर रही है और नसरीन की यात्रा के लिए सुरक्षा व्यवस्था को सक्रिय रूप से मज़बूत कर रही है। गौरतलब है कि यह वही शहर है जिसे नसरीन अपना 'गोद लिया हुआ घर' मानती थीं, और जहाँ से उनका निष्कासन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के समर्थकों के लिए लंबे समय से एक कलंक बना हुआ है।

आगे क्या

यह यात्रा न केवल एक लेखिका की वापसी है, बल्कि यह परखेगी कि क्या पश्चिम बंगाल में वैचारिक असहमति और साहित्यिक अभिव्यक्ति के लिए वास्तविक स्थान बन पाया है। 1 अगस्त का कार्यक्रम कट्टरवाद-विरोधी विमर्श को केंद्र में रखेगा — और उसके इर्द-गिर्द जमा होने वाली राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ राज्य के सामाजिक माहौल का असली आईना होंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो असली सवाल यह है कि क्या यह स्वागत संस्थागत है या केवल राजनीतिक सुविधा? TMC विधायक की आपत्ति यह स्पष्ट करती है कि कट्टरपंथी दबाव अभी भी सक्रिय है। सुरक्षा व्यवस्था मज़बूत करना ज़रूरी है, लेकिन यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी नहीं — बल्कि उसकी अनुपस्थिति का स्वीकार है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तस्लीमा नसरीन को 2007 में कोलकाता से क्यों निकाला गया था?
नवंबर 2007 में कट्टरपंथी समूहों ने उनकी आत्मकथात्मक कृति 'द्विखंडितो' के विरोध में कोलकाता में हिंसक बंद और दंगे किए। तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने कथित तौर पर इस दबाव के सामने झुककर उन्हें शहर छोड़ने पर मजबूर किया।
तस्लीमा नसरीन 1 अगस्त को कोलकाता में किस कार्यक्रम में भाग लेंगी?
वे एक कट्टरवाद-विरोधी साहित्यिक कार्यक्रम में शामिल होने वाली हैं। यह 2007 के निष्कासन के बाद उनकी पहली संभावित कोलकाता उपस्थिति होगी।
इस यात्रा पर राजनीतिक दलों की क्या प्रतिक्रिया है?
BJP सांसद समिक भट्टाचार्य ने उनकी वापसी का समर्थन किया है। CPI(M) नेता सुजान चक्रवर्ती ने कहा कि यह केंद्र सरकार का निर्णय है। TMC विधायक अखरुज्जमा ने यात्रा पर आपत्ति जताई है।
क्या तस्लीमा नसरीन की रचनाओं पर अभी भी प्रतिबंध है?
स्रोत के अनुसार उनकी रचनाओं पर प्रतिबंध वाम मोर्चा और बाद में TMC सरकार के दौर में भी जारी रहा। नई सरकार के रुख पर अभी स्पष्ट आधिकारिक घोषणा नहीं आई है।
नई राज्य सरकार इस यात्रा को कैसे देख रही है?
नई राज्य सरकार इस आयोजन को एक वैचारिक बदलाव के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत कर रही है और नसरीन की सुरक्षा के लिए व्यवस्था सक्रिय रूप से मज़बूत कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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