अंबिकेश महापात्रा का खुलासा: ममता राज में अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हुआ सुनियोजित हमला

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अंबिकेश महापात्रा का खुलासा: ममता राज में अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हुआ सुनियोजित हमला

सारांश

2012 में ममता बनर्जी का कार्टून फॉरवर्ड करने पर गिरफ्तार हुए प्रोफेसर अंबिकेश महापात्रा ने 15 साल के TMC शासन को 'वन-वूमन तानाशाही' बताया। उनके अनुसार यह मामला सिर्फ उनका नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सुनियोजित हमला था।

मुख्य बातें

प्रोफेसर अंबिकेश महापात्रा को 2012 में ममता बनर्जी का कार्टून ईमेल पर फॉरवर्ड करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था; उन्होंने कार्टून बनाने से इनकार किया।
सर्वोच्च न्यायालय ने आईटी अधिनियम की धारा 66ए को असंवैधानिक घोषित कर इससे जुड़े सभी मामले बंद करने का निर्देश दिया, फिर भी उनका मामला जारी रहा।
महापात्रा ने TMC शासन को 'वन-वूमन एडमिनिस्ट्रेशन' बताया और कहा कि 1998 से पार्टी में कोई आंतरिक लोकतंत्र नहीं रहा।
पश्चिम मेदिनीपुर के किसान शिलादित्य चौधरी को अगस्त 2012 में गिरफ्तार किया गया था और उनका आपराधिक मामला अभी भी लंबित है।
नई BJP सरकार को लेकर महापात्रा ने उम्मीद जताई, लेकिन कहा कि कम से कम शुरुआती 6 महीने का इंतजार ज़रूरी है।
महापात्रा ने चुनाव में हिंदू-मुस्लिम राजनीति की प्रधानता पर चिंता जताई और कहा कि मुख्य मुद्दे रोटी, शिक्षा और बुनियादी सुविधाएं होने चाहिए थे।

जादवपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अंबिकेश महापात्रा ने 17 मई 2026 को कोलकाता में एक विशेष बातचीत में पश्चिम बंगाल की पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कार्टून ईमेल पर फॉरवर्ड करने के कारण उनके खिलाफ चलाया गया मामला किसी एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सुनियोजित प्रहार था। बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में 15 साल बाद TMC की सत्ता से विदाई के बाद महापात्रा ने बंगाल के वर्तमान और भविष्य पर भी अपने विचार खुलकर रखे।

कार्टून विवाद और 11 साल का संघर्ष

प्रोफेसर महापात्रा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने वह कार्टून स्वयं नहीं बनाया था — उन्होंने केवल एक ईमेल अटैचमेंट फॉरवर्ड किया था। वह कार्टून तत्कालीन रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी के रेल बजट और उसके बाद हुए अचानक राजनीतिक बदलाव पर आधारित राजनीतिक व्यंग्य था। उनके अनुसार, इस मामले में सत्ताधारी TMC, पुलिस प्रशासन और निचली आपराधिक अदालत एक साथ मिलकर काम कर रहे थे और यह सब ममता बनर्जी की शह पर हो रहा था।

उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने अंतिम फैसले में आईटी अधिनियम की धारा 66ए को असंवैधानिक घोषित कर उसे कानून की किताब से हटा दिया और यह भी निर्देश दिया कि इस धारा से जुड़े सभी चल रहे मामले बंद किए जाएं। बावजूद इसके, उनका मामला बंद नहीं किया गया, जिसे वे संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन मानते हैं।

ममता सरकार की विदाई के कारण

प्रोफेसर महापात्रा के अनुसार, 2011 से पहले विपक्ष में रहते हुए ममता बनर्जी ने 'बदलाव चाहिए, बदला नहीं' और 'गणतंत्र चाहिए, दलतंत्र नहीं' जैसे नारे दिए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद उनका शासन एक 'वन-वूमन एडमिनिस्ट्रेशन' की तरह चला। उन्होंने कहा कि 1998 से TMC की अध्यक्ष रहते हुए ममता बनर्जी ने न पार्टी में लोकतंत्र को जगह दी और न प्रशासन में।

उन्होंने पश्चिम मेदिनीपुर के किसान शिलादित्य चौधरी का उदाहरण देते हुए कहा कि ममता सरकार के 15 साल के कार्यकाल में इस तरह की कई गिरफ्तारियाँ हुईं। चौधरी को अगस्त 2012 में गिरफ्तार किया गया था और उनके खिलाफ आपराधिक मामला आज भी जारी है। महापात्रा का मानना है कि जनता में इसी कुशासन को लेकर रोष था, जिसने अंततः 2026 के विधानसभा चुनाव में TMC को सत्ता से बाहर कर दिया।

नई भाजपा सरकार और राजनीतिक बदलाव पर नज़रिया

प्रोफेसर महापात्रा ने बंगाल की नई भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार को लेकर उम्मीद जताई, लेकिन साथ ही सतर्कता भी बरतने की बात कही। उनके अनुसार किसी भी सरकार के आने के बाद रातोंरात सब कुछ नहीं बदलता और कम से कम शुरुआती छह महीने देखना ज़रूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि 1998 में जो बीज बोया गया था, उसका फल 2026 में मिला है।

नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के बारे में उन्होंने टिप्पणी की कि वे पहले TMC में ममता बनर्जी के बेहद करीबी नेताओं में थे। मुकुल रॉय का भी उल्लेख करते हुए उन्होंने व्यंग्य में कहा कि 'भाजपा की वॉशिंग मशीन में सारे दाग धुल जाते हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि 2014 से केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में BJP की सरकार है और डबल-इंजन सरकार की अवधारणा बंगाल में भी लागू होगी।

चुनावी मुद्दे और सांप्रदायिक राजनीति पर चिंता

घुसपैठ के मुद्दे को स्वीकार करते हुए भी प्रोफेसर महापात्रा ने कहा कि मुख्य चुनावी मुद्दा रोटी, कपड़ा, शिक्षा और सड़क होना चाहिए था। उनके अनुसार इस चुनाव में हिंदू-मुस्लिम की राजनीति के अलावा कोई दूसरा बड़ा मुद्दा नहीं था, जो लोकतंत्र की भावना के विरुद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का संविधान किसी एक धर्म, जाति या समुदाय का नहीं, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मान देता है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सोशल मीडिया का भविष्य

यह पूछे जाने पर कि यदि 2012 की घटना आज 2026 में होती तो क्या वे उतना ही डर महसूस करते, प्रोफेसर महापात्रा ने कहा कि लोगों को बोलना और लिखना चाहिए। स्मार्टफोन और सोशल मीडिया ने हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का मंच दिया है। उन्होंने कहा कि हर सरकार यह कोशिश करती है कि लोग सवाल न उठाएं — कभी पुलिस के ज़रिए, कभी कानूनों के ज़रिए, कभी मानसिक दबाव से। फिर भी लोग लिखेंगे, बोलेंगे, कार्टून बनाएंगे — 'यह लोकतंत्र का हिस्सा है।' उन्होंने रवींद्रनाथ ठाकुर और राजा राममोहन राय की भूमि का हवाला देते हुए कहा कि बंगाल में भय की राजनीति ज़्यादा समय तक नहीं चल सकती।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब भी उनका मामला क्यों चलता रहा? यह न्यायिक आदेशों की प्रशासनिक अनदेखी का गंभीर उदाहरण है, जिस पर मुख्यधारा की कवरेज प्रायः मौन रहती है। दूसरी ओर, महापात्रा की नई BJP सरकार के प्रति सतर्क उम्मीद और TMC से BJP में आए नेताओं पर 'वॉशिंग मशीन' वाला व्यंग्य यह संकेत देता है कि बंगाल में सत्ता बदली है, राजनीतिक संस्कृति अभी परीक्षण के दौर में है। चुनावी मुद्दों पर उनकी टिप्पणी — कि हिंदू-मुस्लिम राजनीति ने बुनियादी सवालों को पीछे धकेल दिया — वह आत्म-आलोचना है जो किसी भी दल के समर्थक सुनना पसंद नहीं करते, लेकिन लोकतंत्र के लिए ज़रूरी है।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंबिकेश महापात्रा को 2012 में किस आरोप में गिरफ्तार किया गया था?
प्रोफेसर अंबिकेश महापात्रा को 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक राजनीतिक व्यंग्य कार्टून ईमेल पर फॉरवर्ड करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। महापात्रा के अनुसार उन्होंने कार्टून नहीं बनाया था, केवल एक ईमेल अटैचमेंट फॉरवर्ड किया था जो तत्कालीन रेल बजट विवाद पर आधारित राजनीतिक व्यंग्य था।
आईटी अधिनियम की धारा 66ए क्या है और इसे क्यों हटाया गया?
धारा 66ए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम का वह प्रावधान था जिसके तहत ऑनलाइन सामग्री को 'आपत्तिजनक' बताकर गिरफ्तारी की जा सकती थी। सर्वोच्च न्यायालय ने इसे असंवैधानिक घोषित करते हुए भारतीय कानून की किताब से हटा दिया और निर्देश दिया कि इस धारा से जुड़े सभी चल रहे मामले बंद किए जाएं।
प्रोफेसर महापात्रा के अनुसार 2026 में बंगाल में TMC की हार के क्या कारण थे?
महापात्रा के अनुसार ममता बनर्जी का 15 साल का शासन 'वन-वूमन एडमिनिस्ट्रेशन' की तरह चला, जिसमें पुलिस थानों पर कब्जा, कानून का उल्लंघन और राजनीतिक गिरफ्तारियाँ आम थीं। जनता में इस कुशासन के प्रति गहरा रोष था, जो 2026 के विधानसभा चुनाव में TMC की हार के रूप में सामने आया।
महापात्रा ने बंगाल की नई BJP सरकार के बारे में क्या कहा?
महापात्रा ने नई BJP सरकार को लेकर उम्मीद जताई, लेकिन कहा कि सरकार बदलने से रातोंरात सब कुछ नहीं बदलता। उनके अनुसार कम से कम शुरुआती छह महीने देखना ज़रूरी है कि सरकार किस दिशा में काम कर रही है और प्रशासनिक स्तर पर क्या बदलाव हो रहे हैं।
महापात्रा ने सोशल मीडिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया ने हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का मंच दिया है और लोगों को बोलना, लिखना और कार्टून बनाना चाहिए — यह लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि हर सरकार लोगों को चुप कराने की कोशिश करती है, लेकिन रवींद्रनाथ ठाकुर और राजा राममोहन राय की भूमि में भय की राजनीति अधिक समय तक नहीं टिक सकती।
राष्ट्र प्रेस
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