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तसलीमा नसरीन 19 साल बाद 1 अगस्त को कोलकाता लौटेंगी, रवींद्र सदन में सांस्कृतिक कार्यक्रम

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तसलीमा नसरीन 19 साल बाद 1 अगस्त को कोलकाता लौटेंगी, रवींद्र सदन में सांस्कृतिक कार्यक्रम

सारांश

19 साल का वनवास खत्म — तसलीमा नसरीन 1 अगस्त को कोलकाता लौट रही हैं। 2007 में 'द्विखंडितो' विवाद और सेना की तैनाती के बाद जिस शहर ने उन्हें निकाला था, वहीं अब रवींद्र सदन में उनका साहित्यिक स्वागत होगा — राज्य पुलिस की सुरक्षा छतरी तले।

मुख्य बातें

तसलीमा नसरीन 1 अगस्त 2026 को 19 वर्षों बाद कोलकाता लौटेंगी।
रवींद्र सदन, सेंट्रल कोलकाता में 'सेक्युलर मिशन' समेत कई सांस्कृतिक समूहों द्वारा आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम में वे शामिल होंगी।
राज्य पुलिस प्रशासन ने उनके पूरे प्रवास के दौरान पुख्ता सुरक्षा का आश्वासन दिया है।
2007 में 'द्विखंडितो' विवाद के बाद हुई हिंसा और सेना की तैनाती के बाद उन्हें शहर छोड़ना पड़ा था।
AISF विधायक नौशाद सिद्दीकी ने इस आयोजन पर आपत्ति जताई है और इसे राजनीतिक ध्यान भटकाव बताया है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित रहने की सहमति दी है।

बांग्लादेशी लेखिका और कवयित्री तसलीमा नसरीन 1 अगस्त 2026 को कोलकाता आएंगी — यह उनकी 19 वर्षों में पहली पश्चिम बंगाल यात्रा होगी। 2007 में उनके उपन्यास 'द्विखंडितो' को लेकर भड़की हिंसा के बाद उन्हें शहर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था। अब वे सेंट्रल कोलकाता के रवींद्र सदन में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में शिरकत करेंगी।

कार्यक्रम का स्वरूप और आयोजन

यह सांस्कृतिक आयोजन कई सांस्कृतिक समूहों के संयुक्त प्रयास से तैयार किया गया है, जिनमें 'सेक्युलर मिशन' प्रमुख है। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम पूरी तरह साहित्यिक है और नसरीन के लिखे उपन्यासों, कहानियों तथा कविताओं पर केंद्रित रहेगा। आयोजकों में से एक मोहित रॉय ने कहा कि इन कार्यक्रमों में कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है।

सांस्कृतिक समूहों ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को भी इस अवसर पर आमंत्रित किया था, और बताया जाता है कि उन्होंने इसके लिए सहमति दे दी है।

सुरक्षा व्यवस्था

मोहित रॉय ने बताया कि नसरीन की सुरक्षा एक संवेदनशील मुद्दा है, इसलिए राज्य पुलिस प्रशासन ने उनके पूरे प्रवास के दौरान पुख्ता सुरक्षा का आश्वासन दिया है। 'सेक्युलर मिशन' के प्रतिनिधि और कलकत्ता उच्च न्यायालय के अधिवक्ता उस्मान मल्लिक ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के ज़रिये नसरीन की उपस्थिति की पुष्टि की। मल्लिक ने लिखा कि लंबा इंतज़ार खत्म हो गया है और वे 'सभी प्रतिक्रियावादी ताकतों को मात देकर' आ रही हैं। उन्होंने नसरीन को 'कट्टरपंथ-विरोधी संघर्ष का एक सशक्त प्रतीक' बताया।

राजनीतिक विरोध

पश्चिम बंगाल विधानसभा में ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट (AISF) के एकमात्र विधायक नौशाद सिद्दीकी ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने मीडिया से कहा कि भाजपा ने अन्नपूर्णा योजना, बिजली और महिला सुरक्षा के वादे करके सत्ता हासिल की थी, लेकिन वे वादे अब तक पूरे नहीं हुए। सिद्दीकी के अनुसार, नसरीन को बुलाना उन विफलताओं से ध्यान भटकाने की कोशिश है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नसरीन 'कुछ मुस्लिम-विरोधी बयान देकर वापस चली जाएंगी।'

2007 का संकट: पृष्ठभूमि

2007 में नसरीन के उपन्यास 'द्विखंडितो (The Bifurcated)' के प्रकाशन पर कोलकाता के अल्पसंख्यक-बहुल इलाकों में हिंसक प्रदर्शन भड़क उठे थे। हालात इतने गंभीर हो गए कि प्रशासन को सेना तैनात करनी पड़ी। तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार ने राज्य में पुस्तक के वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया और नसरीन को कोलकाता छोड़ने को कहा गया। गौरतलब है कि 2011 से 2016 तक तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कार्यकाल में भी यह अघोषित प्रतिबंध बना रहा।

आगे क्या

नसरीन की यह वापसी साहित्यिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर एक व्यापक बहस को नए सिरे से जन्म दे सकती है। राज्य प्रशासन की सुरक्षा प्रतिबद्धता और मुख्यमंत्री की संभावित उपस्थिति यह संकेत देती है कि सरकार इस आयोजन को राजनीतिक रूप से संवेदनशील मानते हुए सावधानी से आगे बढ़ रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों सरकारों ने अघोषित प्रतिबंध को जारी रखकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से समझौता किया। अब राज्य पुलिस की सुरक्षा और मुख्यमंत्री की संभावित उपस्थिति एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि क्या प्रशासन किसी भी दबाव में झुके बिना इस आयोजन को शांतिपूर्वक संपन्न करा सकता है। नौशाद सिद्दीकी की आपत्ति यह भी याद दिलाती है कि राजनीतिक ध्रुवीकरण के इस दौर में साहित्य और विचार की स्वतंत्रता अभी भी विवाद के केंद्र में है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तसलीमा नसरीन 19 साल बाद कोलकाता क्यों नहीं आ सकी थीं?
2007 में उनके उपन्यास 'द्विखंडितो' के प्रकाशन पर कोलकाता के कुछ इलाकों में हिंसक प्रदर्शन हुए और सेना तैनात करनी पड़ी। तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने पुस्तक के वितरण पर रोक लगाई और नसरीन को शहर छोड़ने को कहा गया। इसके बाद 2011-2016 की TMC सरकार के दौरान भी यह अघोषित प्रतिबंध बना रहा।
तसलीमा नसरीन 1 अगस्त को कोलकाता में किस कार्यक्रम में शामिल होंगी?
वे सेंट्रल कोलकाता के रवींद्र सदन में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में शिरकत करेंगी, जिसका आयोजन 'सेक्युलर मिशन' समेत कई सांस्कृतिक समूहों ने मिलकर किया है। यह कार्यक्रम नसरीन के उपन्यासों, कहानियों और कविताओं पर केंद्रित होगा और इसमें कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है।
नसरीन की सुरक्षा का क्या इंतज़ाम किया गया है?
राज्य पुलिस प्रशासन ने उनके पश्चिम बंगाल प्रवास के दौरान पुख्ता सुरक्षा का आश्वासन दिया है। आयोजक मोहित रॉय ने बताया कि सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन से पूरा सहयोग मिल रहा है।
AISF विधायक नौशाद सिद्दीकी ने इस कार्यक्रम पर आपत्ति क्यों जताई?
सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि भाजपा अपनी प्रशासनिक विफलताओं — जैसे अन्नपूर्णा योजना, बिजली और महिला सुरक्षा के अधूरे वादे — से ध्यान भटकाने के लिए नसरीन को बुला रही है। उन्होंने यह भी कहा कि नसरीन के बयान सांप्रदायिक तनाव बढ़ा सकते हैं।
'द्विखंडितो' विवाद क्या था?
'द्विखंडितो (The Bifurcated)' तसलीमा नसरीन का एक उपन्यास है, जिसके 2007 में प्रकाशन पर कोलकाता के अल्पसंख्यक-बहुल इलाकों में हिंसक प्रदर्शन हुए। स्थिति इतनी बिगड़ी कि सेना तैनात करनी पड़ी और तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने पुस्तक के वितरण पर रोक लगा दी।
राष्ट्र प्रेस
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