इस्कॉन ने राधारमण दास को सभी पदों से हटाया, बांग्लादेश में हिंदुओं के पक्ष में बोलना बना कारण
सारांश
मुख्य बातें
इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) ने रविवार, 28 जून को कोलकाता इकाई के पूर्व वाइस-प्रेसिडेंट राधारमण दास को संगठन के सभी पदों और जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया। इस्कॉन ने एक आधिकारिक मीडिया बयान जारी कर इसकी पुष्टि की, जिसमें कहा गया कि दास को 'अनिवार्य छुट्टी' पर भेजा गया है और उन्हें मीडिया, सरकारी अधिकारियों या किसी भी सार्वजनिक मंच पर संगठन का प्रतिनिधित्व करने से रोका गया है।
इस्कॉन का आधिकारिक बयान
इस्कॉन ने अपने मीडिया वक्तव्य में स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई संगठन की आंतरिक प्रक्रियाओं के तहत की गई है। बयान में कहा गया, 'कई सालों तक उनसे कई बार अनुरोध करने के बाद, इस्कॉन ने सुधारात्मक कदम उठाते हुए उन्हें छुट्टी पर भेज दिया है।' संगठन के अनुसार दास ने इस्कॉन की आंतरिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया, संगठन के आधिकारिक रुख के विरुद्ध एकतरफा कार्य किया और अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ऐसे मामलों में हस्तक्षेप किया जिससे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सदस्यों की सुरक्षा और भलाई प्रभावित हुई।
इस्कॉन ने यह भी रेखांकित किया कि 100 देशों में कार्यरत इस वैश्विक संगठन के सदस्यों के लिए निर्धारित नियम, नैतिक मानक और दायित्व हैं, और उनका पालन न करने पर सुधारात्मक उपाय अनिवार्य हो जाते हैं।
राधारमण दास ने खुद एक्स पर दी जानकारी
उल्लेखनीय है कि इस्कॉन के आधिकारिक बयान से पहले राधारमण दास ने स्वयं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इस निर्णय की जानकारी सार्वजनिक की थी। उन्होंने लिखा, 'मैं शुभचिंतकों, भक्तों, मीडिया के सभी सदस्यों और आम जनता को बताना चाहता हूँ कि मुझे इस्कॉन में अपनी सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें मीडिया या किसी सार्वजनिक मंच पर इस्कॉन की ओर से बोलने से रोका गया है।
बांग्लादेश में हिंदुओं का मुद्दा और चिन्मय कृष्ण प्रभु का समर्थन
दास को दी गई जानकारी के अनुसार, उन्हें मुख्य रूप से दो कारणों से हटाया गया। पहला — उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं और इस्कॉन भक्तों पर हो रहे कथित अत्याचार के बारे में सार्वजनिक रूप से बोला और मीडिया को साक्षात्कार दिए। दूसरा — उन्होंने ढाका जेल में बंद इस्कॉन भिक्षु चिन्मय कृष्ण प्रभु का खुलकर समर्थन किया। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है।
आगे क्या होगा
इस्कॉन ने संकेत दिया है कि दास को इस अवधि में आत्म-चिंतन और अपने कार्यशैली में सुधार के लिए प्रोत्साहित किया गया है। यह स्पष्ट नहीं है कि यह 'अनिवार्य छुट्टी' स्थायी निष्कासन में बदलेगी या नहीं। संगठन के भीतर और बाहर इस निर्णय को लेकर प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं, और आने वाले दिनों में इस मामले पर और स्पष्टता आने की संभावना है।