क्या कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर और रामभद्राचार्य सत्ता द्वारा लगाए गए संत हैं: राकेश सिन्हा?
सारांश
Key Takeaways
- राकेश सिन्हा ने देवकीनंदन ठाकुर और रामभद्राचार्य पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
- बांग्लादेशी क्रिकेटर की खरीद पर संतों की प्रतिक्रिया राजनीतिक दबाव की ओर इशारा करती है।
- बुलेट ट्रेन की योजना पर सवाल उठाए गए हैं, यह सिर्फ गुजरात तक सीमित है।
- झारखंड में लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लिया गया है।
- इस मुद्दे ने राजनीतिक हलकों में विवाद उत्पन्न किया है।
रांची, २ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने देश के प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर और रामभद्राचार्य को सत्ता द्वारा लगाए गए संत के रूप में परिभाषित किया है।
उनकी यह टिप्पणी अभिनेता शाहरुख खान की आईपीएल टीम केकेआर द्वारा एक बांग्लादेशी क्रिकेटर को खरीदने पर देवकीनंदन ठाकुर और रामभद्राचार्य की आपत्तियों के संदर्भ में आई है।
रांची में राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि केकेआर ने एक बांग्लादेशी क्रिकेटर को खरीदा है, जिसके कारण देवकीनंदन, रामभद्राचार्य और कई भाजपा नेता ऐसे बयान दे रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया, 'जब पहलगाम में जिन २६ लोगों ने अपने परिजन खो दिए, वे भी हिंदू थे। उस घटना के तुरंत बाद और सीजफायर के बाद भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच खेला गया। उस समय देवकीनंदन और रामभद्राचार्य कहाँ थे? तब क्यों नहीं बोले? अब क्यों कष्ट हो रहा है? बीसीसीआई ने आईपीएल की इजाजत क्यों दी? बीसीसीआई कौन है? देश के गृहमंत्री से सवाल क्यों नहीं कर रहे हैं?'
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे संत केंद्र के इशारे पर बयान देते हैं। स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है। ये सत्ता के इशारे पर बयान देते हैं। भारत-पाकिस्तान के मैच पर कोई बयान नहीं आया। यदि शाहरुख खान गद्दार हैं, तो भारत-पाकिस्तान का मैच आयोजित करने वाले भी गद्दार हैं।
बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति पर उन्होंने कहा कि हर दिन बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में इस प्रकार की घटनाएं हो रही हैं। भारत के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री चुनावी समर में व्यस्त हैं और बांग्लादेश पर खामोश हैं।
१५ अगस्त २०२७बुलेट ट्रेन शुरू करने की केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की घोषणा पर राकेश सिन्हा ने कहा कि यह असल में बुलेट ट्रेन नहीं है। यह गुजरात की ट्रेन है। यह गुजरात से शुरू होगी और वहीं खत्म होगी। बिहार में क्यों नहीं? उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं? उत्तराखंड में क्यों नहीं? मध्य प्रदेश में क्यों नहीं? झारखंड में क्यों नहीं? हमारे लिए कोई बुलेट ट्रेन क्यों नहीं है? सिर्फ गुजरात ही क्यों? ऐसा इसलिए है क्योंकि प्रधानमंत्री को लगता है कि गुजरात अब उनके हाथों से फिसल रहा है। बुलेट ट्रेन के नाम पर जनता को झांसा दिया जा रहा है। यह सिर्फ एक सपना है।
एसआईआर को लेकर राकेश सिन्हा ने कहा कि विरोध करना हमारा काम है। झारखंड में लोकतंत्र की हत्या नहीं होने देंगे। राज्य की जनता को वोट देने के अधिकार से वंचित नहीं होने देंगे। एसआईआर के मुद्दे पर कांग्रेस कमर कस चुकी है, आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार है।