ममता बनर्जी की TMC ने 21 जुलाई शहीद दिवस रैली के लिए कोलकाता पुलिस से माँगी अनुमति
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 27 जून 2026 को कोलकाता पुलिस को पत्र लिखकर 21 जुलाई को मध्य कोलकाता के एस्प्लेनेड स्थित विक्टोरिया हाउस के सामने अपनी वार्षिक शहीद दिवस रैली आयोजित करने की अनुमति माँगी है। पार्टी पिछले दो दशकों से इसी स्थान पर यह कार्यक्रम मनाती आ रही है।
पार्टी में फूट का माहौल
यह अनुमति-पत्र ऐसे समय में भेजा गया है जब पश्चिम बंगाल में सरकार परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस गहरे संगठनात्मक संकट में है। राज्य विधानसभा में TMC के अधिकांश विधायक विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में एक अलग गुट बना चुके हैं और खुद को 'असली तृणमूल' बता रहे हैं। इस बागी खेमे ने अपनी अलग कार्यकारी समिति भी गठित कर ली है। ममता बनर्जी के कई पुराने वफादार भी इस विद्रोही धड़े में शामिल हो चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के एक वर्ग का मानना है कि इस समय ममता बनर्जी के साथ मुट्ठी भर नेता ही बचे हैं, और ऐसे में 21 जुलाई की रैली उनके लिए पार्टी संगठन को एकजुट रखने का अंतिम सार्वजनिक मंच बन सकती है।
ममता का संकल्प: 'पाँच कार्यकर्ता हों तो भी जाएँगी'
ममता बनर्जी ने हाल ही में पार्टी कार्यकर्ताओं की एक बैठक में स्पष्ट किया कि भले ही केवल पाँच कार्यकर्ता साथ हों, वे एस्प्लेनेड की सभा में अवश्य जाएँगी। उन्होंने कहा कि तृणमूल वर्षों से इस स्थान पर शहीदों को श्रद्धांजलि देती आई है और यदि पुलिस अनुमति देती है तो इस बार भी कार्यक्रम वहीं होगा।
इस वर्ष का कार्यक्रम 'हम बेईमान नहीं हैं' के नारे के तहत आयोजित करने की योजना है — जो कथित तौर पर पार्टी तोड़ने वाले नेताओं पर सीधा निशाना माना जा रहा है।
ममता का बागियों को संदेश
ममता बनर्जी ने बागी नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि 'समझदार लोगों को लौट आना चाहिए' और यह भी कहा कि जो लोग पार्टी छोड़ गए हैं वे 'न यहाँ हैं, न वहाँ।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे पैसे के लिए पार्टी नहीं बेचेंगी।
गौरतलब है कि 21 जुलाई का दिन TMC के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है — 1993 में इसी दिन कोलकाता में युवा कांग्रेस के एक प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में कई लोगों की जान गई थी, जिसे ममता बनर्जी 'शहीद दिवस' के रूप में मनाती आई हैं।
अब पुलिस के फैसले पर नज़र
राजनीतिक हलकों में अब यह देखा जा रहा है कि कोलकाता पुलिस तृणमूल कांग्रेस के इस अनुमति-पत्र पर क्या निर्णय लेती है। सरकार बदलने के बाद पुलिस प्रशासन का रुख TMC के प्रति कैसा रहेगा, यह भी इस फैसले से स्पष्ट होगा। अनुमति मिलने या न मिलने — दोनों ही स्थितियाँ — बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ला सकती हैं।