13 जुलाई 2026
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शहीद दिवस रैली पर 60 दिनों की निषेधाज्ञा: ममता गुट ने कलकत्ता हाईकोर्ट में दी चुनौती

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शहीद दिवस रैली पर 60 दिनों की निषेधाज्ञा: ममता गुट ने कलकत्ता हाईकोर्ट में दी चुनौती

सारांश

तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक दरार अब अदालत तक पहुँच गई है। ममता बनर्जी गुट ने 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली के पारंपरिक स्थल पर लगी 60 दिनों की निषेधाज्ञा को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जबकि विद्रोही गुट को वैकल्पिक स्थान पर अनुमति मिल चुकी है।

मुख्य बातें

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट ने 13 जुलाई को कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की।
कोलकाता पुलिस ने BNSS 2023 की धारा 163 के तहत सीईएससी हाउस के सामने 60 दिनों के लिए 4 या अधिक लोगों के जमावड़े पर रोक लगाई है।
यह प्रतिबंध 21 जुलाई को प्रस्तावित शहीद दिवस रैली की तिथि को भी कवर करता है।
वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने आदेश को 'मनमाना' और 'मौलिक अधिकारों के विपरीत' बताया।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने याचिका स्वीकार की; अगली सुनवाई 15 जुलाई को।
विद्रोही गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी को जवाहरलाल नेहरू रोड पर वैकल्पिक स्थल पर रैली की अनुमति मिल चुकी है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के ममता बनर्जी नेतृत्व वाले गुट ने सोमवार, 13 जुलाई को कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ में याचिका दाखिल कर कोलकाता पुलिस की उस अधिसूचना को चुनौती दी, जिसमें एस्प्लेनेड चौराहे के निकट सीईएससी हाउस के सामने 60 दिनों के लिए चार या अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह स्थल तृणमूल कांग्रेस की वार्षिक शहीद दिवस रैली का परंपरागत आयोजन-स्थान रहा है, और इस वर्ष 21 जुलाई को वहाँ रैली प्रस्तावित है।

मुख्य घटनाक्रम

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने याचिका स्वीकार कर ली है और अगली सुनवाई 15 जुलाई को निर्धारित की है। कोलकाता पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत यह अधिसूचना जारी की थी। उल्लेखनीय है कि प्रतिबंध की अवधि में 21 जुलाई का वह दिन भी शामिल है जब तृणमूल कांग्रेस का शहीद दिवस कार्यक्रम आयोजित होना है।

याचिकाकर्ता का पक्ष

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एवं तृणमूल कांग्रेस के चार बार के लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी ने इस आदेश को 'मनमाना' और 'मौलिक अधिकारों के विपरीत' करार दिया। उनका तर्क है कि यह निषेधाज्ञा विशेष रूप से शहीद दिवस रैली को बाधित करने के इरादे से लागू की गई है, क्योंकि इसकी समय-सीमा और स्थान का चुनाव संयोगवश नहीं है।

पार्टी में विभाजन की पृष्ठभूमि

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब तृणमूल कांग्रेस दो गुटों में बँट चुकी है। एक ओर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाला अल्पमत गुट है, तो दूसरी ओर पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बहुमत वाला विद्रोही गुट है। वर्ष 2025 तक पार्टी की शहीद दिवस रैली सीईएससी हाउस के सामने ही आयोजित होती रही थी।

दूसरे गुट की तैयारी

ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 21 जुलाई को जवाहरलाल नेहरू रोड पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने वैकल्पिक स्थल पर रैली आयोजित करने की अनुमति मिल चुकी है। इस प्रकार एक ही तिथि को दो अलग-अलग स्थानों पर शहीद दिवस रैलियाँ आयोजित होने की स्थिति बन सकती है, जो TMC की आंतरिक दरार को और गहरा उजागर करेगी।

आगे क्या होगा

अब सभी की निगाहें 15 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। कलकत्ता उच्च न्यायालय यह तय करेगा कि ममता बनर्जी के गुट को सीईएससी हाउस के सामने रैली की अनुमति मिलती है या नहीं। यह फैसला न केवल इस वर्ष की रैली, बल्कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पुलिस की निषेधाज्ञा शक्तियों की सीमाओं को लेकर भी एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका समय और स्थान-चुनाव इसे महज कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रहने देता। यह पश्चिम बंगाल की सत्ता-राजनीति में पुलिस के इस्तेमाल का एक और अध्याय बन सकता है — जहाँ प्रशासनिक आदेश और राजनीतिक हित अक्सर एक-दूसरे से उलझे नज़र आते हैं। TMC का विभाजन अब केवल संगठनात्मक नहीं रहा; यह भौगोलिक और न्यायिक भी हो गया है। कलकत्ता हाईकोर्ट का 15 जुलाई का फैसला बताएगा कि क्या न्यायपालिका इस विवाद में राजनीतिक तटस्थता की कसौटी पर खरी उतरती है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता पुलिस ने सीईएससी हाउस के सामने निषेधाज्ञा क्यों लगाई?
कोलकाता पुलिस ने BNSS 2023 की धारा 163 के तहत सीईएससी हाउस के सामने 60 दिनों के लिए चार या अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाया है। पुलिस ने इसका कारण सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन यह प्रतिबंध 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली की तिथि को भी कवर करता है।
तृणमूल कांग्रेस का शहीद दिवस कब और कहाँ मनाया जाता है?
तृणमूल कांग्रेस (TMC) हर वर्ष 21 जुलाई को शहीद दिवस रैली आयोजित करती है। वर्ष 2025 तक यह रैली कोलकाता के एस्प्लेनेड स्थित सीईएससी हाउस के सामने होती थी, जो पार्टी का परंपरागत आयोजन-स्थल रहा है।
TMC में दो गुट कौन-से हैं और उनमें क्या अंतर है?
TMC अब दो गुटों में बँट चुकी है — एक ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में अल्पमत गुट, और दूसरा पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बहुमत वाला विद्रोही गुट। दोनों गुट 21 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर शहीद दिवस रैली आयोजित करने की तैयारी में हैं।
कलकत्ता हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई कब है?
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने याचिका स्वीकार कर ली है और अगली सुनवाई 15 जुलाई को निर्धारित की है। अदालत का फैसला तय करेगा कि ममता बनर्जी का गुट सीईएससी हाउस के सामने रैली कर सकता है या नहीं।
ऋतब्रत बनर्जी के गुट को रैली की अनुमति कहाँ मिली है?
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विद्रोही गुट को 21 जुलाई को जवाहरलाल नेहरू रोड पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने वैकल्पिक स्थल पर रैली आयोजित करने की अनुमति मिल चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
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