कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता और अभिषेक बनर्जी से माँगा हलफनामा, अवमानना मामले में अगस्त में होगी सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 3 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी को उनके विरुद्ध लंबित अदालत की अवमानना मामले में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। यह मामला 21 जुलाई 2025 को मध्य कोलकाता में आयोजित TMC की शहीद दिवस रैली के दौरान हाईकोर्ट के 2018 के एक आदेश के कथित उल्लंघन से जुड़ा है।
मामले की पृष्ठभूमि
न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी और न्यायमूर्ति अपूर्बा सिन्हा रॉय की खंडपीठ ने इससे पहले 19 जून को ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को अवमानना का नोटिस जारी किया था। शुक्रवार को उसी खंडपीठ के समक्ष प्रारंभिक सुनवाई हुई, जिसमें दोनों नेताओं सहित मामले से जुड़े सभी पक्षों को अगली सुनवाई से पूर्व हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया। अगली सुनवाई अगस्त 2026 में निर्धारित की गई है।
2018 का हाईकोर्ट आदेश क्या था
वर्ष 2018 में कलकत्ता हाईकोर्ट की तत्कालीन खंडपीठ — जिसमें न्यायमूर्ति ज्योतिर्मय भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी शामिल थे — ने स्पष्ट आदेश दिया था कि शहर में होने वाली कोई भी राजनीतिक रैली प्रमुख और व्यस्त चौराहों को अवरुद्ध नहीं करेगी। आदेश में यह भी कहा गया था कि रैली या प्रदर्शन के दौरान सड़क का एक हिस्सा हर हाल में पैदल यात्रियों और वाहनों के लिए खुला रखा जाएगा।
उसी आदेश के तहत एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही किसी भी परिस्थिति में बाधित न हो, यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आयोजकों और पुलिस पर डाली गई थी। साथ ही पुलिस को निर्देश था कि किसी भी ट्रैफिक डायवर्जन की सूचना मीडिया के माध्यम से पहले से जनता तक पहुँचाई जाए।
याचिका में क्या आरोप लगाए गए
हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि 21 जुलाई 2025 को TMC की शहीद दिवस रैली के दौरान मध्य कोलकाता के एस्प्लेनेड स्थित एक महत्वपूर्ण जंक्शन को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया गया, जिससे आम जनता को भारी असुविधा हुई। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह 2018 के हाईकोर्ट आदेश का सीधा उल्लंघन है।
आगे क्या होगा
अदालत के निर्देश के अनुसार ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और अन्य संबंधित पक्षों को अगस्त में होने वाली अगली सुनवाई से पहले अपने हलफनामे दाखिल करने होंगे। यह मामला ऐसे समय में महत्वपूर्ण हो जाता है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ TMC पर न्यायिक आदेशों के प्रति अनुपालन को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। अदालत के अगले आदेश से स्पष्ट होगा कि मामला आगे किस दिशा में जाता है।