31 जुलाई 2026
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कलकत्ता हाईकोर्ट की तृणमूल के ममता गुट को कड़ी चेतावनी, 21 जुलाई रैली में 2,500 की सीमा तोड़ने पर नाराज़गी

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कलकत्ता हाईकोर्ट की तृणमूल के ममता गुट को कड़ी चेतावनी, 21 जुलाई रैली में 2,500 की सीमा तोड़ने पर नाराज़गी

सारांश

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने TMC के ममता गुट को 21 जुलाई शहीद दिवस रैली में 2,500 की अदालती सीमा तोड़ने और बिड़ला तारामंडल के सामने दोनों लेन बंद करने पर कड़ी चेतावनी दी — भविष्य में उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई तय।

मुख्य बातें

कलकत्ता उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने 31 जुलाई को TMC के ममता गुट को कड़ी चेतावनी दी।
न्यायालय ने 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली के लिए 2,500 प्रतिभागियों की ऊपरी सीमा तय की थी, जिसका उल्लंघन हुआ।
रैली में भीड़ सीमा से अधिक होने के कारण बिड़ला तारामंडल के सामने की दोनों लेन अवरुद्ध हो गईं, जबकि एक लेन खुली रखना अनिवार्य था।
कोलकाता पुलिस ने पहले पारंपरिक स्थल सीईएससी हाउस के पास रैली की अनुमति नहीं दी थी, जिसके बाद गुट ने न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था।
न्यायालय ने चेतावनी दी कि भविष्य में आदेशों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने 31 जुलाई 2026 को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के गुट को कड़ी चेतावनी दी — यह चेतावनी 21 जुलाई को मध्य कोलकाता स्थित बिड़ला तारामंडल के सामने आयोजित शहीद दिवस रैली में न्यायालय द्वारा निर्धारित 2,500 प्रतिभागियों की ऊपरी सीमा के उल्लंघन पर दी गई। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने स्पष्ट किया कि भविष्य में इस तरह के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मामले की पृष्ठभूमि

मूल विवाद तब शुरू हुआ जब कोलकाता पुलिस ने TMC के ममता गुट को 21 जुलाई को मध्य कोलकाता के एस्प्लेनेड क्रॉसिंग के पास सीईएससी हाउस के सामने पारंपरिक स्थल पर रैली की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद गुट ने कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया। न्यायालय ने रैली की अनुमति तो प्रदान की, परंतु दो सख्त शर्तें जोड़ीं।

पहली शर्त यह थी कि रैली में अधिकतम 2,500 प्रतिभागी ही शामिल हो सकते हैं। दूसरी शर्त यह थी कि बिड़ला तारामंडल के सामने की दो लेन में से एक लेन वाहनों के आवागमन के लिए खुली रखी जाए।

उल्लंघन के आरोप और याचिका

पिछले सप्ताह कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि ममता गुट ने दोनों शर्तों का उल्लंघन किया। याचिकाकर्ता के अनुसार, रैली में प्रतिभागियों की वास्तविक संख्या 2,500 की निर्धारित सीमा से कहीं अधिक थी, जिसके कारण बिड़ला तारामंडल के सामने की दोनों लेन अवरुद्ध हो गईं और उस व्यस्त क्षेत्र में भारी यातायात जाम की स्थिति उत्पन्न हुई।

गौरतलब है कि न्यायालय का स्पष्ट निर्देश था कि कम से कम एक लेन वाहनों के लिए खुली रहे, लेकिन आरोपों के अनुसार दोनों लेन बाधित हो गईं।

न्यायालय की प्रतिक्रिया

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने शुक्रवार दोपहर इस मामले की सुनवाई की। पीठ ने रैली में प्रतिभागियों की संख्या की ऊपरी सीमा के उल्लंघन और दोनों लेन अवरुद्ध होने पर खेद व्यक्त किया। न्यायालय ने कहा कि ये आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और न्यायिक निर्देशों की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है।

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में न्यायालय के आदेशों का इसी तरह उल्लंघन हुआ, तो न्यायालय को कड़ी कार्रवाई करने पर विवश होना पड़ेगा।

आम जनता और यातायात पर असर

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि अत्यधिक भीड़ और दोनों लेन के अवरुद्ध होने से मध्य कोलकाता के उस व्यस्त इलाके में आम नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। यह ऐसे समय में आया है जब कोलकाता में बड़े राजनीतिक आयोजनों और शहरी यातायात प्रबंधन को लेकर पहले से ही संवेदनशीलता बनी हुई है।

आगे क्या होगा

न्यायालय की चेतावनी के बाद अब यह देखना होगा कि TMC का ममता गुट भविष्य के आयोजनों में न्यायिक शर्तों का पालन कैसे सुनिश्चित करता है। न्यायालय ने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दे दी है, जो भविष्य में इस तरह की रैलियों के आयोजन पर सीधा असर डाल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यदि भविष्य में इसी तरह का उल्लंघन हुआ तो अवमानना कार्यवाही की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। राजनीतिक दलों को यह समझना होगा कि न्यायिक आदेश सुविधा के अनुसार नहीं, बल्कि बिना शर्त पालन के लिए होते हैं।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC के ममता गुट को चेतावनी क्यों दी?
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने TMC के ममता गुट को इसलिए चेतावनी दी क्योंकि 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली में न्यायालय द्वारा तय 2,500 प्रतिभागियों की सीमा का उल्लंघन हुआ और बिड़ला तारामंडल के सामने दोनों लेन अवरुद्ध हो गईं, जबकि एक लेन खुली रखना अनिवार्य था।
21 जुलाई शहीद दिवस रैली के लिए न्यायालय की शर्तें क्या थीं?
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने रैली की अनुमति देते समय दो मुख्य शर्तें लगाई थीं — प्रतिभागियों की संख्या 2,500 से अधिक नहीं होनी चाहिए, और बिड़ला तारामंडल के सामने की दो लेन में से एक लेन वाहनों के आवागमन के लिए खुली रखी जानी चाहिए।
रैली की अनुमति के लिए न्यायालय का दरवाज़ा क्यों खटखटाना पड़ा?
कोलकाता पुलिस ने TMC के ममता गुट को एस्प्लेनेड क्रॉसिंग के पास सीईएससी हाउस के सामने पारंपरिक स्थल पर रैली की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद गुट ने कलकत्ता उच्च न्यायालय से अनुमति माँगी, जो शर्तों के साथ मिली।
इस उल्लंघन का कोलकाता के यातायात पर क्या असर पड़ा?
याचिका के अनुसार, सीमा से अधिक भीड़ के कारण बिड़ला तारामंडल के सामने की दोनों लेन अवरुद्ध हो गईं, जिससे मध्य कोलकाता के उस व्यस्त इलाके में भारी यातायात जाम की स्थिति उत्पन्न हुई।
भविष्य में उल्लंघन पर न्यायालय क्या कार्रवाई कर सकता है?
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि भविष्य में न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालाँकि अभी तक केवल चेतावनी दी गई है, आगे अवमानना कार्यवाही की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
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