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कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC को 21 जुलाई शहीद दिवस रैली की अनुमति दी, 3,000 की सीमा तय

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC को 21 जुलाई शहीद दिवस रैली की अनुमति दी, 3,000 की सीमा तय

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC को 21 जुलाई का शहीद दिवस आयोजित करने की हरी झंडी दी, लेकिन सीईएससी हाउस की जगह बिड़ला तारामंडल के पास और अधिकतम 3,000 लोगों की शर्त के साथ। कोलकाता पुलिस की BNSS धारा 163 को चुनौती देने वाली इस कानूनी लड़ाई में TMC को आंशिक राहत मिली है।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC को 21 जुलाई को शहीद दिवस कार्यक्रम की अनुमति दी, लेकिन शर्तों के साथ।
कार्यक्रम बिड़ला तारामंडल के पास सड़क के एक हिस्से पर होगा; विक्टोरिया हाउस के सामने आयोजन पर रोक।
कार्यक्रम में शामिल होने वालों की अधिकतम संख्या 3,000 तय की गई है।
कोलकाता पुलिस ने 30 जून को BNSS धारा 163 लागू कर सीईएससी हाउस के सामने रैली पर प्रतिबंध लगाया था।
TMC ने 1 जुलाई को इस निषेधाज्ञा को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
शहीद दिवस रैली 1993 की घटना की याद में आयोजित होती है; 1998 से TMC इसका आयोजन करती है।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) को 21 जुलाई को शहीद दिवस कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दे दी है — हालाँकि इसके साथ कई महत्वपूर्ण शर्तें जोड़ी गई हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह आयोजन बिड़ला तारामंडल के निकट सड़क के एक निर्धारित हिस्से पर होगा और कार्यक्रम में शामिल होने वालों की अधिकतम संख्या 3,000 तय की गई है।

मुख्य घटनाक्रम

हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, TMC विक्टोरिया हाउस के सामने कोई कार्यक्रम नहीं कर सकती। बिड़ला तारामंडल के पास जिस सड़क पर आयोजन की अनुमति दी गई है, उसका दूसरा हिस्सा खाली रखना अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि कानून-व्यवस्था बनाए रखी जाए और कोई भी अप्रिय घटना न घटे।

विवाद की पृष्ठभूमि

30 जून को कोलकाता पुलिस ने घोषणा की थी कि इस वर्ष मध्य कोलकाता के व्यस्त एस्प्लेनेड क्रॉसिंग के पास सीईएससी हाउस के सामने शहीद दिवस रैली की अनुमति नहीं दी जाएगी। पुलिस ने उस क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी थी, जिसके तहत एक निश्चित संख्या से अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध था। इसके बाद TMC ने 1 जुलाई को इस निषेधाज्ञा को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।

TMC नेताओं की प्रतिक्रिया

TMC के चार बार लोकसभा सांसद रहे और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने पूरे इलाके में दो महीने के लिए BNSS धारा 163 लागू करने को गैर-कानूनी करार दिया था। उन्होंने कहा था, 'लोगों के लोकतांत्रिक आंदोलन को इस तरह नहीं रोका जा सकता।' बनर्जी ने यह भी कहा था, 'हम कानूनी और राजनीतिक, दोनों तरह से इसका मुकाबला करेंगे। हमें देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है।'

TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भी भरोसा जताया था कि न्यायपालिका राज्य प्रशासन की कथित अलोकतांत्रिक कार्रवाइयों का समाधान निकालेगी। उल्लेखनीय है कि बनर्जी ने अपने बयान में यह भी कहा था कि ऐसा प्रतीत होता है कि नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी लोगों के लोकतांत्रिक जमावड़े से भयभीत हैं — हालाँकि यह उनका राजनीतिक आरोप था, तथ्यात्मक दावा नहीं।

शहीद दिवस का इतिहास

21 जुलाई का यह कार्यक्रम 1993 में हुई उस घटना की याद में आयोजित होता है, जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं की हत्या हुई थी। पहले यह आयोजन कांग्रेस की ओर से होता था। 1998 में ममता बनर्जी के कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस का गठन करने के बाद से यह रैली TMC का वार्षिक प्रमुख राजनीतिक आयोजन बन गई है। पार्टी परंपरागत रूप से यह रैली सीईएससी हाउस के सामने आयोजित करती रही है।

आगे क्या होगा

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद TMC को 21 जुलाई का कार्यक्रम निर्धारित शर्तों के दायरे में आयोजित करना होगा। पुलिस को कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या TMC इन शर्तों को स्वीकार करते हुए अपनी वार्षिक रैली को नए स्थान पर सफलतापूर्वक आयोजित कर पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन परंपरागत स्थान और असीमित भीड़ नहीं। असली सवाल यह है कि क्या BNSS धारा 163 का दो महीने के लिए इतने बड़े क्षेत्र में इस्तेमाल राजनीतिक रूप से प्रेरित था — यह वह बिंदु है जिस पर अदालत ने अभी तक स्पष्ट राय नहीं दी है। शहीद दिवस TMC की राजनीतिक पहचान का केंद्र है, और स्थान परिवर्तन को पार्टी के भीतर प्रतीकात्मक पराजय के रूप में देखा जा सकता है। यह प्रकरण राज्य पुलिस और विपक्षी दलों के बीच सार्वजनिक स्थान के उपयोग को लेकर बढ़ते तनाव की एक बड़ी प्रवृत्ति को दर्शाता है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC की 21 जुलाई रैली पर क्या फैसला दिया?
हाईकोर्ट ने TMC को 21 जुलाई को शहीद दिवस कार्यक्रम की अनुमति दी है, लेकिन शर्त यह है कि आयोजन बिड़ला तारामंडल के पास सड़क के एक निर्धारित हिस्से पर होगा और अधिकतम 3,000 लोग ही शामिल हो सकेंगे। विक्टोरिया हाउस के सामने कार्यक्रम करने पर रोक लगाई गई है।
कोलकाता पुलिस ने TMC की रैली पर प्रतिबंध क्यों लगाया था?
30 जून को कोलकाता पुलिस ने एस्प्लेनेड क्रॉसिंग के पास सीईएससी हाउस के सामने BNSS की धारा 163 लागू की थी, जिसके तहत एक निश्चित संख्या से अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध था। पुलिस ने यह आदेश दो महीने के लिए जारी किया था।
TMC का शहीद दिवस क्या है और यह क्यों मनाया जाता है?
शहीद दिवस हर वर्ष 21 जुलाई को 1993 में हुई उस घटना की याद में मनाया जाता है, जिसमें कांग्रेस कार्यकर्ताओं की हत्या हुई थी। 1998 में ममता बनर्जी द्वारा तृणमूल कांग्रेस की स्थापना के बाद से यह TMC का प्रमुख वार्षिक राजनीतिक आयोजन बन गया है।
TMC के नेताओं ने पुलिस के प्रतिबंध पर क्या कहा?
वरिष्ठ अधिवक्ता और TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने BNSS धारा 163 को दो महीने के लिए पूरे इलाके में लागू करने को गैर-कानूनी बताया और कहा कि पार्टी कानूनी व राजनीतिक दोनों तरीकों से इसका मुकाबला करेगी। TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भरोसा जताया कि न्यायपालिका इस मामले में उचित समाधान निकालेगी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब 21 जुलाई को रैली कहाँ होगी?
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार रैली बिड़ला तारामंडल के पास सड़क के एक हिस्से पर आयोजित होगी, जबकि तारामंडल का दूसरा हिस्सा खाली रखा जाएगा। परंपरागत स्थान सीईएससी हाउस के सामने आयोजन की अनुमति नहीं दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
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