कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी की विरोध रैली को सशर्त मंजूरी दी, 1,000 लोगों की सीमा तय
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल-न्यायाधीश पीठ ने मंगलवार, 7 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में कोलकाता में प्रस्तावित विरोध रैली को सशर्त अनुमति प्रदान कर दी। यह रैली दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में एक नाबालिग लड़की के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म और हत्या की घटना सहित कई मुद्दों पर आयोजित की जानी थी। पुलिस से अनुमति न मिलने के बाद बनर्जी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य की पीठ ने विस्तृत सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया।
न्यायालय की शर्तें और रैली का मार्ग
न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य ने रैली के लिए कई कड़ी शर्तें निर्धारित की हैं। रैली का मार्ग दक्षिण कोलकाता के बल्लीगंज फारी चौराहे से हाजरा चौराहे तक ही सीमित रहेगा। न्यायालय ने रैली की समयावधि दोपहर 2:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक, अर्थात केवल दो घंटे, तय की है।
इसके अतिरिक्त, रैली को मार्ग की केवल एक लेन से गुजरने की अनुमति होगी, जबकि दूसरी लेन वाहनों की आवाजाही के लिए खुली रखी जाएगी। रैली में शामिल होने वाले लोगों की अधिकतम संख्या 1,000 निर्धारित की गई है।
मुख्य घटनाक्रम: सोमवार से मंगलवार तक
बारुईपुर की घटना के विरोध में ममता बनर्जी सोमवार को ही सड़कों पर उतर आई थीं। उन्होंने दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित अपने आवास से मोमबत्ती जुलूस निकाला था। हालाँकि, उनके आवास के पास तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवानों ने उस जुलूस को रोक दिया।
बाधाओं और बैरिकेड्स को पार करते हुए बनर्जी और उनके समर्थक हरीश चटर्जी स्ट्रीट की मुख्य सड़क तक पहुँचे। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच तनाव चरम पर है।
तृणमूल कांग्रेस नेताओं का बारुईपुर दौरा
सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सदस्य डोला सेन, लोकसभा सदस्य प्रतिमा मंडल, और पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष बिमान बनर्जी बारुईपुर पहुँचे। ये नेता तृणमूल कांग्रेस विधायक दल के 'मूल लेकिन अल्पसंख्यक' गुट का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
गौरतलब है कि पार्टी के भीतर इस गुट की मौजूदगी ने TMC की आंतरिक राजनीति को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
बारुईपुर घटना: पृष्ठभूमि
दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में एक नाबालिग लड़की की कथित तौर पर दुष्कर्म और हत्या के बाद मौत की खबर ने पूरे राज्य में आक्रोश फैला दिया। यह घटना पश्चिम बंगाल में महिला सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच सामने आई है। आलोचकों का कहना है कि राज्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है।
आगे क्या होगा
न्यायालय द्वारा निर्धारित शर्तों के तहत रैली आयोजित होने की स्थिति में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ममता बनर्जी इसे किस राजनीतिक संदेश के साथ आगे ले जाती हैं। बारुईपुर मामले में जाँच की दिशा और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में राजनीतिक परिदृश्य को और अधिक प्रभावित कर सकती है।