अहमदाबाद विमान हादसा: AAIB ने सुप्रीम कोर्ट में कॉकपिट रिकॉर्डिंग जारी करने से किया इनकार, अक्टूबर 2026 तक रिपोर्ट का वादा
सारांश
मुख्य बातें
एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने 15 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में एयर इंडिया फ्लाइट AI-171 दुर्घटना से जुड़ी कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करने और किसी समानांतर जांच के आदेश की मांग का कड़ा विरोध किया है। ब्यूरो का कहना है कि एयरक्राफ्ट (इन्वेस्टिगेशन ऑफ एक्सीडेंट्स एंड इंसिडेंट्स) रूल्स, 2025 के तहत केवल AAIB को ही ऐसी जांच का अधिकार है और संरक्षित सामग्री का खुलासा कानूनी रूप से वर्जित है। ब्यूरो ने अदालत को यह भी बताया कि जांच अक्टूबर 2026 तक पूरी कर अंतिम रिपोर्ट सौंपे जाने की उम्मीद है।
AAIB का कानूनी तर्क
हलफनामे में AAIB ने नियम 17 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि जांच के दौरान दर्ज गवाहों के बयान, विमान संचालन से जुड़े लोगों के बीच हुई बातचीत, मेडिकल और निजी जानकारी, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग और उसके ट्रांसक्रिप्ट, एयर ट्रैफिक कंट्रोल रिकॉर्डिंग, कॉकपिट इमेज रिकॉर्डिंग तथा जांच अधिकारियों की राय — ये सभी सामग्री सार्वजनिक नहीं की जा सकती। हलफनामे के अनुसार, नियम 17(5) यह 'पूर्ण वैधानिक प्रतिबंध' है। इसका एकमात्र अपवाद तब है जब केंद्र सरकार स्वयं यह तय करे कि सार्वजनिक हित में खुलासा आवश्यक है — और मौजूदा मामले में ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
गवाहों की स्वतंत्रता और 'नो-ब्लेम' जांच
AAIB ने तर्क दिया कि इन प्रावधानों का उद्देश्य गवाहों को बिना किसी भय या दबाव के सहयोग करने में सक्षम बनाना है। ब्यूरो ने कहा, 'यदि गवाहों को यह आशंका होगी कि उनके बयान सार्वजनिक किए जा सकते हैं, तो वे खुलकर सहयोग करने से बचेंगे, जिससे सुरक्षा जांच का मूल उद्देश्य ही प्रभावित होगा।' ब्यूरो ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच का लक्ष्य दुर्घटना के कारणों का पता लगाना है, न कि किसी की जिम्मेदारी तय करना — जो अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के मानकों के अनुरूप है।
याचिकाकर्ता और उनकी आपत्तियाँ
यह याचिका सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन ने दायर की है, जिसमें अदालत की निगरानी में उच्च स्तरीय जांच की माँग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने AAIB की जांच टीम की संरचना पर भी सवाल उठाए हैं — उनका कहना है कि टीम के कई सदस्य नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से हैं, जबकि इस हादसे के संदर्भ में DGCA की भूमिका भी जांच के दायरे में आती है। गौरतलब है कि इस वर्ष फरवरी में सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने AAIB से जांच की प्रगति और प्रक्रिया का ब्योरा माँगा था।
हादसे की पृष्ठभूमि
एयर इंडिया फ्लाइट AI-171 12 जून, 2025 को लंदन गैटविक के लिए उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद अहमदाबाद के मेघानीनगर इलाके में एक मेडिकल हॉस्टल कॉम्प्लेक्स से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में यात्रियों, क्रू सदस्यों और ज़मीन पर मौजूद लोगों सहित कथित तौर पर लगभग 260 लोगों की जान चली गई — जो भारतीय विमानन इतिहास की सबसे भीषण त्रासदियों में से एक है।
आगे क्या होगा
AAIB ने सर्वोच्च न्यायालय से इस रिट याचिका को खारिज करने का अनुरोध किया है। ब्यूरो का कहना है कि मौजूदा कानूनी ढाँचा अपने आप में पूर्ण है और इसमें अदालत द्वारा समानांतर जांच के आदेश की कोई गुंजाइश नहीं है। मामले की अगली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय का रुख तय करेगा कि जांच प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी।