15 जुलाई 2026
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अहमदाबाद विमान हादसा: AAIB ने सुप्रीम कोर्ट में कॉकपिट रिकॉर्डिंग जारी करने से किया इनकार, अक्टूबर 2026 तक रिपोर्ट का वादा

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अहमदाबाद विमान हादसा: AAIB ने सुप्रीम कोर्ट में कॉकपिट रिकॉर्डिंग जारी करने से किया इनकार, अक्टूबर 2026 तक रिपोर्ट का वादा

सारांश

AAIB ने सर्वोच्च न्यायालय में साफ कहा — AI-171 की कॉकपिट रिकॉर्डिंग न सार्वजनिक होगी, न किसी बाहरी समिति को मिलेगी। नियम 17(5) के तहत यह पूर्ण वैधानिक प्रतिबंध है। अक्टूबर 2026 तक अंतिम रिपोर्ट का वादा, लेकिन 260 मौतों के बाद जवाबदेही की माँग अदालत में बनी हुई है।

मुख्य बातें

AAIB ने 15 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर AI-171 की कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करने और समानांतर जांच की माँग का विरोध किया।
नियम 17(5) के तहत कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग की ऑडियो सामग्री का खुलासा 'पूर्ण वैधानिक प्रतिबंध' के अंतर्गत आता है।
AAIB को उम्मीद है कि जांच अक्टूबर 2026 तक पूरी होगी और अंतिम रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
जांच ICAO मानकों और एयरक्राफ्ट (इन्वेस्टिगेशन ऑफ एक्सीडेंट्स एंड इंसिडेंट्स) रूल्स, 2025 के तहत हो रही है।
सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन ने याचिका में DGCA से जुड़े जांच सदस्यों की तटस्थता पर सवाल उठाए हैं।
12 जून, 2025 के हादसे में अहमदाबाद के मेघानीनगर में लगभग 260 लोगों की जान गई थी।

एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने 15 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में एयर इंडिया फ्लाइट AI-171 दुर्घटना से जुड़ी कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करने और किसी समानांतर जांच के आदेश की मांग का कड़ा विरोध किया है। ब्यूरो का कहना है कि एयरक्राफ्ट (इन्वेस्टिगेशन ऑफ एक्सीडेंट्स एंड इंसिडेंट्स) रूल्स, 2025 के तहत केवल AAIB को ही ऐसी जांच का अधिकार है और संरक्षित सामग्री का खुलासा कानूनी रूप से वर्जित है। ब्यूरो ने अदालत को यह भी बताया कि जांच अक्टूबर 2026 तक पूरी कर अंतिम रिपोर्ट सौंपे जाने की उम्मीद है।

AAIB का कानूनी तर्क

हलफनामे में AAIB ने नियम 17 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि जांच के दौरान दर्ज गवाहों के बयान, विमान संचालन से जुड़े लोगों के बीच हुई बातचीत, मेडिकल और निजी जानकारी, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग और उसके ट्रांसक्रिप्ट, एयर ट्रैफिक कंट्रोल रिकॉर्डिंग, कॉकपिट इमेज रिकॉर्डिंग तथा जांच अधिकारियों की राय — ये सभी सामग्री सार्वजनिक नहीं की जा सकती। हलफनामे के अनुसार, नियम 17(5) यह 'पूर्ण वैधानिक प्रतिबंध' है। इसका एकमात्र अपवाद तब है जब केंद्र सरकार स्वयं यह तय करे कि सार्वजनिक हित में खुलासा आवश्यक है — और मौजूदा मामले में ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

गवाहों की स्वतंत्रता और 'नो-ब्लेम' जांच

AAIB ने तर्क दिया कि इन प्रावधानों का उद्देश्य गवाहों को बिना किसी भय या दबाव के सहयोग करने में सक्षम बनाना है। ब्यूरो ने कहा, 'यदि गवाहों को यह आशंका होगी कि उनके बयान सार्वजनिक किए जा सकते हैं, तो वे खुलकर सहयोग करने से बचेंगे, जिससे सुरक्षा जांच का मूल उद्देश्य ही प्रभावित होगा।' ब्यूरो ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच का लक्ष्य दुर्घटना के कारणों का पता लगाना है, न कि किसी की जिम्मेदारी तय करना — जो अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के मानकों के अनुरूप है।

याचिकाकर्ता और उनकी आपत्तियाँ

यह याचिका सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन ने दायर की है, जिसमें अदालत की निगरानी में उच्च स्तरीय जांच की माँग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने AAIB की जांच टीम की संरचना पर भी सवाल उठाए हैं — उनका कहना है कि टीम के कई सदस्य नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से हैं, जबकि इस हादसे के संदर्भ में DGCA की भूमिका भी जांच के दायरे में आती है। गौरतलब है कि इस वर्ष फरवरी में सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने AAIB से जांच की प्रगति और प्रक्रिया का ब्योरा माँगा था।

हादसे की पृष्ठभूमि

एयर इंडिया फ्लाइट AI-171 12 जून, 2025 को लंदन गैटविक के लिए उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद अहमदाबाद के मेघानीनगर इलाके में एक मेडिकल हॉस्टल कॉम्प्लेक्स से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में यात्रियों, क्रू सदस्यों और ज़मीन पर मौजूद लोगों सहित कथित तौर पर लगभग 260 लोगों की जान चली गई — जो भारतीय विमानन इतिहास की सबसे भीषण त्रासदियों में से एक है।

आगे क्या होगा

AAIB ने सर्वोच्च न्यायालय से इस रिट याचिका को खारिज करने का अनुरोध किया है। ब्यूरो का कहना है कि मौजूदा कानूनी ढाँचा अपने आप में पूर्ण है और इसमें अदालत द्वारा समानांतर जांच के आदेश की कोई गुंजाइश नहीं है। मामले की अगली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय का रुख तय करेगा कि जांच प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल को टालता है — जब जांच टीम में वही DGCA के अधिकारी हों जिनकी निगरानी भूमिका स्वयं जांच के दायरे में है, तो 'नो-ब्लेम' प्रक्रिया की विश्वसनीयता कैसे सुनिश्चित होगी? अंतरराष्ट्रीय मानकों में संरक्षित जांच और जवाबदेही के बीच संतुलन बनाने के उदाहरण मौजूद हैं। अक्टूबर 2026 की समयसीमा 260 परिवारों के लिए डेढ़ साल से अधिक की प्रतीक्षा है — और यदि अंतिम रिपोर्ट में भी प्रणालीगत खामियों को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया गया, तो सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा फिर खटखटाया जाएगा।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

AAIB ने कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग जारी करने से क्यों इनकार किया?
AAIB ने एयरक्राफ्ट (इन्वेस्टिगेशन ऑफ एक्सीडेंट्स एंड इंसिडेंट्स) रूल्स, 2025 के नियम 17(5) का हवाला देते हुए कहा कि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग की ऑडियो सामग्री को सार्वजनिक करना पूर्ण वैधानिक प्रतिबंध के अंतर्गत आता है। इसका खुलासा केवल तभी संभव है जब केंद्र सरकार सार्वजनिक हित में ऐसा निर्णय ले, जो अभी तक नहीं हुआ है।
AI-171 हादसे की जांच कब तक पूरी होगी?
AAIB ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि जांच अक्टूबर 2026 तक पूरी कर अंतिम रिपोर्ट सौंपे जाने की उम्मीद है। जांच ICAO के अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत की जा रही है।
सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन ने याचिका में क्या माँगा है?
सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन ने सर्वोच्च न्यायालय में AI-171 हादसे की अदालत की निगरानी में उच्च स्तरीय जांच की माँग की है। याचिकाकर्ताओं ने AAIB की जांच टीम में DGCA के अधिकारियों की उपस्थिति पर भी सवाल उठाए हैं, क्योंकि DGCA की भूमिका स्वयं जांच के दायरे में है।
अहमदाबाद विमान हादसा क्या था और इसमें कितने लोग मारे गए?
एयर इंडिया फ्लाइट AI-171 12 जून, 2025 को लंदन गैटविक के लिए उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद अहमदाबाद के मेघानीनगर इलाके में एक मेडिकल हॉस्टल कॉम्प्लेक्स से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में यात्रियों, क्रू सदस्यों और ज़मीन पर मौजूद लोगों सहित कथित तौर पर लगभग 260 लोगों की जान चली गई।
क्या सुप्रीम कोर्ट AAIB के समानांतर जांच का आदेश दे सकता है?
AAIB का कहना है कि मौजूदा कानूनी ढाँचा अपने आप में पूर्ण है और इसमें अदालत द्वारा समानांतर जांच के आदेश की कोई गुंजाइश नहीं है। ब्यूरो ने सर्वोच्च न्यायालय से रिट याचिका खारिज करने का अनुरोध किया है; अंतिम निर्णय अदालत पर निर्भर है।
राष्ट्र प्रेस
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