एयर इंडिया AI-171 क्रैश: पायलट संगठन FIP का दावा — बिजली की बड़ी खराबी थी असली वजह, आत्महत्या थ्योरी गलत
सारांश
मुख्य बातें
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने 12 जून 2025 को अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ सेकेंड बाद हुए एयर इंडिया बोइंग फ्लाइट AI-171 के क्रैश की आधिकारिक व्याख्या को सीधे चुनौती दी है। संगठन का कहना है कि नए सिम्युलेटर डेटा से स्पष्ट होता है कि इस हादसे की असली वजह पायलट की आत्महत्या नहीं, बल्कि विमान के सिस्टम में हुई एक बड़े पैमाने की बिजली की खराबी थी।
आधिकारिक रिपोर्ट और FIP का विरोध
सरकारी जांचकर्ताओं की अंतरिम रिपोर्ट में दावा किया गया था कि फ्लाइट क्रू ने सोची-समझी आत्महत्या की योजना के तहत जानबूझकर इंजन की फ्यूल सप्लाई बंद की। रिपोर्ट के अनुसार, मैन्युअल शटडाउन के ठीक चार सेकेंड बाद विमान का रैम एयर टर्बाइन (RAT) — जो पूरी बिजली जाने पर स्वचालित रूप से सक्रिय होने वाला बैकअप पावर सिस्टम है — नीचे गिर गया।
FIP इस टाइमलाइन को भौतिक और तकनीकी रूप से असंभव बताता है। संगठन के अध्यक्ष कैप्टन सी.एस. रंधावा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'हमारे सिम्युलेटर टेस्ट साबित करते हैं कि मैन्युअल रूप से फ्यूल बंद करने पर बैकअप टर्बाइन को नीचे गिरने में पूरे 18 सेकेंड लगते हैं। चार सेकेंड की आधिकारिक टाइमलाइन तकनीकी रूप से संभव ही नहीं है।'
सिम्युलेटर डेटा से क्या सामने आया
FIP के अनुसार, उसने उस घातक उड़ान के वजन, बैलेंस और मौसम की स्थितियों को हूबहू दोहराते हुए विस्तृत सिम्युलेटर परीक्षण किए। परिणामों ने, संगठन के दावे के अनुसार, आधिकारिक टाइमलाइन को पूरी तरह खारिज कर दिया।
FIP का तर्क है कि RAT इतनी तेज़ी से इसलिए सक्रिय हुआ क्योंकि इंजन बंद होने से पहले ही एक बड़े पैमाने की विद्युत खराबी ने विमान को निष्क्रिय कर दिया था। फेडरेशन का आरोप है कि इसी सिस्टम की विफलता ने इंजन स्विच को ट्रिप किया और अंततः विमान क्रैश हुआ। कथित तौर पर, क्रैश हुए विमान का उस घातक उड़ान से पहले भी बिजली की अनसुलझी समस्याओं का रिकॉर्ड था।
बचे यात्री की गवाही और अन्य साक्ष्य
FIP ने यह भी रेखांकित किया कि फ्लाइट AI-171 के एकमात्र जीवित बचे व्यक्ति ने बताया था कि विमान के अंतिम अवरोहण (टर्मिनल डिसेंट) से ठीक पहले केबिन की लाइटें टिमटिमा रही थीं और मंद पड़ रही थीं। संगठन का कहना है कि यह गवाही उसकी 'अचानक और व्यापक विद्युत विफलता' की थ्योरी से पूरी तरह मेल खाती है।
जांच प्रक्रिया पर गंभीर आरोप
FIP ने आरोप लगाया कि सरकारी जांचकर्ताओं ने भारत के शीर्ष बोइंग 787 विशेषज्ञ माने जाने वाले कैप्टन आर.एस. संधू को वास्तविक जांच परीक्षणों से जानबूझकर अलग रखा। कैप्टन रंधावा ने आरोप लगाया, 'वे हमारे सबसे अनुभवी पायलट की राय को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं क्योंकि उनकी जानकारी उनकी आत्महत्या थ्योरी को पूरी तरह गलत साबित कर देगी। किसी बड़ी मैकेनिकल या सॉफ्टवेयर खराबी का सामना करने के बजाय उन मृत पायलटों पर दोष मढ़ना आसान है जो अपना बचाव नहीं कर सकते।'
गौरतलब है कि FIP ने अपना सिम्युलेटर डेटा और निष्कर्ष बोइंग और सरकारी विमानन प्राधिकरण, दोनों को आधिकारिक रूप से सौंप दिए हैं।
FIP की मांगें और आगे की राह
फेडरेशन ने मांग की है कि जब तक RAT डिप्लॉयमेंट से जुड़ी तकनीकी और गणितीय विसंगतियों की पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक दुर्घटना की अंतिम रिपोर्ट प्रकाशित करने पर तत्काल रोक लगाई जाए। इसके साथ ही, FIP ने कैप्टन संधू को आधिकारिक जांच टीम में तुरंत वापस शामिल करने की माँग की है ताकि डेटा की पारदर्शी और निष्पक्ष समीक्षा सुनिश्चित हो सके। यह विवाद आने वाले हफ्तों में अंतिम जांच रिपोर्ट की विश्वसनीयता के लिए एक बड़ी परीक्षा बन सकता है।