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अहमदाबाद विमान हादसा: पायलट संगठन FIP ने प्रारंभिक रिपोर्ट को चुनौती दी, सुप्रीम कोर्ट में याचिका

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अहमदाबाद विमान हादसा: पायलट संगठन FIP ने प्रारंभिक रिपोर्ट को चुनौती दी, सुप्रीम कोर्ट में याचिका

सारांश

260 से अधिक मौतों वाले अहमदाबाद विमान हादसे की जांच अब विवादों में है। पायलट संगठन FIP ने सिम्युलेटर डेटा और प्रारंभिक रिपोर्ट में 14 सेकंड के अंतर का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है — और पूछा है कि 11 मेंटेनेंस कोड्स रिपोर्ट से क्यों गायब हैं।

मुख्य बातें

फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने एयर इंडिया AI-171 हादसे की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की।
FIP का दावा: रिपोर्ट में हाइड्रोलिक सिस्टम सक्रियण 4 सेकंड बताया गया, जबकि 10 सिम्युलेटर परीक्षणों में यह 18 सेकंड रहा।
दुर्घटना से पहले विमान के एयरक्राफ्ट हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम से भेजे गए 11 मेंटेनेंस कोड्स रिपोर्ट में शामिल नहीं।
संगठन ने कहा — रिपोर्ट में पायलटों द्वारा जानबूझकर ईंधन स्विच बंद करने का कोई स्पष्ट निष्कर्ष नहीं।
FIP ने एयरक्राफ्ट रूल्स नियम-12 के तहत केंद्र सरकार से न्यायिक जांच गठित करने की माँग की।
जांच समिति में डीजीसीए की मौजूदगी पर हितों के टकराव का आरोप।

फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने 20 जून 2025 को अहमदाबाद में हुई एयर इंडिया AI-171 बोइंग 787 विमान दुर्घटना — जिसमें 260 से अधिक लोगों की जान गई — की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को खुलेआम चुनौती दी है। संगठन ने शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पारदर्शी न्यायिक जांच की माँग की और मामले को सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचाया है।

रिपोर्ट में क्या विरोधाभास बताया गया

FIP के अध्यक्ष कैप्टन सी.एस. रंधावा ने कहा कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में दर्ज घटनाक्रम और स्वतंत्र सिम्युलेटर परीक्षणों के नतीजों में गंभीर अंतर है। रिपोर्ट के अनुसार विमान का हाइड्रोलिक सिस्टम 4 सेकंड में सक्रिय हो गया, जबकि प्रमाणित बोइंग 787 सिम्युलेटर पर किए गए 10 परीक्षणों में राम एयर टरबाइन (RAT) को हाइड्रोलिक दबाव बनाने में लगभग 18 सेकंड लगे।

रंधावा ने कहा, 'पायलट लोगों की जान लेने के लिए विमान नहीं उड़ाते। बिना ठोस तकनीकी प्रमाण के उन्हें दोषी ठहराना उचित नहीं है।'

ईंधन स्विच और तकनीकी खराबी की आशंका

FIP ने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक रिपोर्ट में यह कहीं नहीं कहा गया है कि पायलटों ने जानबूझकर ईंधन नियंत्रण स्विच बंद किए। संगठन ने आशंका जताई कि किसी तकनीकी या इलेक्ट्रिकल खराबी के चलते विमान के कंप्यूटर सिस्टम ने स्वतः ईंधन आपूर्ति बंद की हो सकती है — एक संभावना जिसकी जाँच अभी तक पर्याप्त रूप से नहीं हुई।

11 मेंटेनेंस कोड्स रिपोर्ट से बाहर

FIP का दावा है कि दुर्घटना से पूर्व विमान के एयरक्राफ्ट हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम ने 11 मेंटेनेंस कोड्स भेजे थे, जिन्हें प्रारंभिक रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया। संगठन ने बोइंग 787 में पहले सामने आ चुकी तकनीकी समस्याओं और एयर इंडिया के रखरखाव संबंधी मुद्दों का भी हवाला दिया।

जांच समिति की संरचना पर सवाल

FIP ने जांच समिति की बनावट पर भी आपत्ति जताई। संगठन के अनुसार समिति में बोइंग 787 के अनुभवी विशेषज्ञों की पर्याप्त भागीदारी नहीं है और डीजीसीए अधिकारियों की मौजूदगी हितों के टकराव का कारण बन सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब विमानन नियामक स्वयं जांच प्रक्रिया का हिस्सा है।

न्यायिक जांच और आगे की राह

FIP ने केंद्र सरकार से एयरक्राफ्ट रूल्स के नियम-12 के तहत न्यायिक जांच गठित करने की माँग की है। संगठन का कहना है कि तकनीकी सच्चाई सामने आए बिना पायलटों को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं होगा और 260 से अधिक पीड़ित परिवारों को पूरी पारदर्शिता के साथ न्याय मिलना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका पर सुनवाई की तारीख अभी तय होनी बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जांचकर्ता भी — वे कमज़ोरियाँ हैं जो भारतीय विमानन जांच प्रणाली में बार-बार उठती रही हैं। 260 परिवारों को जो जवाब चाहिए, वह केवल तभी विश्वसनीय होगा जब जांच प्रक्रिया स्वयं संदेह से परे हो।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

FIP ने एयर इंडिया AI-171 हादसे की जांच रिपोर्ट पर क्या आपत्ति जताई है?
FIP का कहना है कि प्रारंभिक रिपोर्ट में हाइड्रोलिक सिस्टम के 4 सेकंड में सक्रिय होने का दावा किया गया है, जबकि प्रमाणित बोइंग 787 सिम्युलेटर पर 10 परीक्षणों में यह प्रक्रिया 18 सेकंड में पूरी हुई। इसके अलावा दुर्घटना से पहले के 11 मेंटेनेंस कोड्स भी रिपोर्ट में शामिल नहीं किए गए।
क्या पायलटों ने जानबूझकर ईंधन स्विच बंद किए थे?
FIP के अनुसार प्रारंभिक रिपोर्ट में ऐसा कोई स्पष्ट निष्कर्ष नहीं दिया गया है। संगठन ने आशंका जताई है कि किसी तकनीकी या इलेक्ट्रिकल खराबी के कारण विमान के कंप्यूटर सिस्टम ने स्वतः ईंधन आपूर्ति बंद की हो सकती है।
FIP ने सुप्रीम कोर्ट में क्यों याचिका दायर की?
FIP ने सर्वोच्च न्यायालय से माँग की है कि दुर्घटना के सभी तकनीकी, इलेक्ट्रिकल और सिस्टम संबंधी पहलुओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए। संगठन का मानना है कि मौजूदा जांच समिति में डीजीसीए की मौजूदगी हितों के टकराव का कारण बन सकती है।
एयरक्राफ्ट रूल्स नियम-12 के तहत न्यायिक जांच क्या होती है?
एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 के नियम-12 के तहत केंद्र सरकार किसी गंभीर विमान दुर्घटना की जांच के लिए एक स्वतंत्र न्यायिक आयोग गठित कर सकती है। FIP ने इसी प्रावधान के तहत जांच की माँग की है ताकि तकनीकी सच्चाई बिना किसी हितों के टकराव के सामने आ सके।
AI-171 हादसे में कितने लोगों की मौत हुई और यह कब हुआ?
अहमदाबाद में एयर इंडिया की उड़ान AI-171 (बोइंग 787) दुर्घटना में 260 से अधिक लोगों की मौत हुई। यह भारत के हाल के इतिहास की सबसे बड़ी विमान दुर्घटनाओं में से एक है और इसकी जांच अभी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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