एआई-171 दुर्घटना जांच: एफआईपी ने एएआईबी से 15 सितंबर से पहले तकनीकी सुनवाई की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (एफआईपी) ने विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) से अनुरोध किया है कि एयर इंडिया उड़ान एआई-171 दुर्घटना की अंतिम जांच रिपोर्ट तैयार होने से पहले एक औपचारिक तकनीकी सुनवाई आयोजित की जाए। संगठन का कहना है कि परिचालन और तकनीकी पहलुओं पर उसके सुझावों को जांच रिकॉर्ड में शामिल किया जाना चाहिए।
मांग की पृष्ठभूमि
यह मांग सर्वोच्च न्यायालय के 28 जुलाई के उस आदेश के बाद आई है, जिसमें केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया था कि पायलट संगठन के तकनीकी सुझावों और टिप्पणियों पर जांच प्रक्रिया के दौरान उचित विचार किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब जांच रिपोर्ट के अक्टूबर 2026 के पहले सप्ताह तक पूरी होने की संभावना जताई जा रही है।
एफआईपी के अध्यक्ष कैप्टन सी.एस. रंधावा ने एएआईबी को लिखे एक पत्र में अनुरोध किया है कि अंतिम रिपोर्ट तैयार होने से पहले उन्हें जांच अधिकारी और संबंधित तकनीकी विशेषज्ञों के साथ व्यक्तिगत सुनवाई या तकनीकी बैठक का अवसर दिया जाए। संगठन ने प्रस्तावित बैठक के लिए 15 सितंबर 2026 की समय-सीमा सुझाई है।
एफआईपी की मुख्य मांगें
पायलट संगठन ने एएआईबी से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं — पहली, उसे विमानन क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण हितधारक के रूप में औपचारिक मान्यता दी जाए; दूसरी, उसके तकनीकी प्रस्तुतिकरणों को जांच रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाए; और तीसरी, उसके द्वारा उठाए गए मुद्दों की जांच टीम द्वारा समीक्षा की जाए।
एफआईपी ने यह भी अनुरोध किया है कि जांच एजेंसी स्पष्ट करे कि उसके द्वारा उठाए गए प्रत्येक प्रमुख तकनीकी मुद्दे का परीक्षण किस विशेषज्ञ या तकनीकी विभाग ने किया है।
तकनीकी विषय जिन पर चर्चा चाहता है एफआईपी
संगठन ने कहा है कि वह जांच में कई विषयों पर अपने तकनीकी सुझाव देना चाहता है — जिनमें फ्लाइट सिम्युलेटर परीक्षण और पुनर्निर्माण, घटनाक्रमों का क्रमिक विश्लेषण, क्रू प्रदर्शन और मानव कारक, विमान प्रणालियों का व्यवहार, तथा परिचालन और नियामकीय निगरानी शामिल हैं।
विशेष रूप से एफआईपी सिम्युलेटर कॉन्फिगरेशन, परीक्षण कार्यप्रणाली, फ्लाइट डेटा विश्लेषण, कॉकपिट में पायलटों की गतिविधियों, कार्यभार, चेतावनी प्रणालियों और प्रशिक्षण प्रक्रियाओं पर चर्चा करना चाहता है।
एफआईपी का स्पष्टीकरण
संगठन ने स्पष्ट किया है कि वह जांच से जुड़ी कोई गोपनीय जानकारी नहीं मांग रहा और न ही जांच की स्वतंत्रता को प्रभावित करना चाहता है। अपने पत्र में एफआईपी ने कहा, 'हमारा उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि अंतिम निष्कर्ष तय होने से पहले जांच प्राधिकरण के समक्ष सभी प्रासंगिक परिचालन और तकनीकी दृष्टिकोण उपलब्ध हों।'
दुर्घटना का संदर्भ
गौरतलब है कि एयर इंडिया की उड़ान एआई-171, जो एक बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर थी, 12 जून 2026 को अहमदाबाद से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में 260 लोगों की मौत हुई थी, जो इसे भारत के हालिया विमानन इतिहास की सबसे गंभीर दुर्घटनाओं में से एक बनाता है।
अब पूरे विमानन क्षेत्र की नजर एएआईबी की अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे दुर्घटना के कारणों और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने की उम्मीद है।