एयर इंडिया AI171 दुर्घटना जांच: FIP ने स्वतंत्र समीक्षा में पायलटों की भागीदारी की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू को पत्र लिखकर माँग की है कि एयर इंडिया की उड़ान AI171 दुर्घटना की अंतिम जांच रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पूर्व, यदि कोई स्वतंत्र समीक्षा समिति गठित की जाती है, तो उसमें पेशेवर पायलटों को औपचारिक तकनीकी हितधारक के रूप में शामिल किया जाए। संगठन का कहना है कि जांच के दौरान उभरे कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी बिंदुओं की निष्पक्ष और स्वतंत्र समीक्षा आवश्यक है।
पत्र का संदर्भ और मांग
FIP ने अपने पत्र में कहा है कि उसे विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी मिली है कि सरकार या मंत्रालय, एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) द्वारा तैयार की जा रही मसौदा अंतिम रिपोर्ट की स्वतंत्र समीक्षा कराने पर विचार कर रहा है — या इस दिशा में कदम उठा चुका है। संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि ऐसी समिति बनती है, तो उसमें FIP को एक स्वतंत्र तकनीकी प्रतिनिधि के रूप में स्थान मिलना चाहिए।
संगठन का तर्क है कि पेशेवर पायलट विमान संचालन और उड़ान सुरक्षा से जुड़े व्यावहारिक अनुभव रखते हैं, जो किसी भी समीक्षा प्रक्रिया को तकनीकी गहराई और विश्वसनीयता प्रदान कर सकता है।
दुर्घटना की पृष्ठभूमि
12 जून 2025 को एयर इंडिया की उड़ान AI171, जो अहमदाबाद से लंदन गैटविक के लिए रवाना हुई थी, दुर्घटनाग्रस्त हुई थी। यह बोइंग 787-8 विमान था। AAIB इस मामले की जांच भारत के विमान दुर्घटना जांच नियमों और अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (ICAO) के एनेक्स 13 ढाँचे के तहत कर रहा है। जुलाई 2025 में AAIB ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया था कि अंतिम जांच रिपोर्ट अक्टूबर 2026 तक तैयार होने की उम्मीद है।
RAM एयर टर्बाइन पर तकनीकी सवाल
FIP ने जिन तकनीकी बिंदुओं पर चिंता जताई है, उनमें सबसे प्रमुख रैम एयर टर्बाइन (RAT) से जुड़ा विषय है। RAT एक आपातकालीन प्रणाली होती है, जो विमान की मुख्य शक्ति प्रणाली में गंभीर व्यवधान की स्थिति में स्वतः सक्रिय होकर ऊर्जा और हाइड्रोलिक सहायता उपलब्ध कराती है।
संगठन के अनुसार, AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट में उल्लेख था कि लगभग 08:08:42 UTC पर ईंधन प्रणाली में व्यवधान आया और इसके लगभग चार सेकंड बाद RAT के माध्यम से हाइड्रोलिक शक्ति उत्पन्न हुई। FIP का कहना है कि इस तथ्य सहित अन्य तकनीकी निष्कर्षों का स्वतंत्र परीक्षण अनिवार्य है, ताकि अंतिम रिपोर्ट पूरी तरह तथ्यात्मक और तकनीकी विश्लेषण पर आधारित हो।
विमानन सुरक्षा का व्यापक सरोकार
FIP ने ज़ोर देकर कहा है कि दुर्घटना जांच केवल जवाबदेही तय करने का माध्यम नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम और विमानन सुरक्षा को मज़बूत बनाने का भी अवसर है। यह मांग ऐसे समय में आई है जब AAIB की अंतिम रिपोर्ट का इंतज़ार है और उड़ान सुरक्षा को लेकर देशभर में जन-सरोकार बना हुआ है।
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय विमानन जांच परंपरा में परिचालन विशेषज्ञों — विशेषकर अनुभवी पायलटों — की समीक्षा प्रक्रिया में सहभागिता को महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि वे उन व्यावहारिक परिस्थितियों से परिचित होते हैं जो तकनीकी दस्तावेज़ों में पूरी तरह नहीं उभर पातीं। आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि सरकार पायलट संगठन की इस माँग को स्वतंत्र समीक्षा तंत्र में किस रूप में स्थान देती है।