एआई-171 हादसा: पायलट संगठन FIP ने AAIB से बोइंग 787 के तकनीकी रिकॉर्ड की व्यापक जांच की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) से एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-171 के बोइंग 787 विमान हादसे की जारी जांच में इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक और एवियोनिक्स से संबंधित समस्त साक्ष्यों की गहन समीक्षा किए जाने की आधिकारिक मांग की है। संगठन का कहना है कि विमानन सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए उपलब्ध हर तकनीकी जानकारी की बारीकी से पड़ताल होनी चाहिए।
मुख्य मांग और पृष्ठभूमि
FIP के अध्यक्ष कैप्टन सीएस रंधावा ने एक औपचारिक पत्र के ज़रिए यह मांग रखी है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी को उन सभी तकनीकी दस्तावेज़ों पर ध्यान देना चाहिए जो हादसे के संभावित कारणों पर प्रकाश डाल सकते हैं। गौरतलब है कि संगठन पहले भी नागरिक उड्डयन मंत्रालय, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और जांच एजेंसी को कई पत्र और तकनीकी नोट्स सौंप चुका है।
इन पत्रों में बोइंग 787 विमानों में सामने आई इलेक्ट्रिकल सिस्टम संबंधी खामियों और जून 2025 में विमान वीटी-एएनबी के साथ हुए हादसे से उनके संभावित संबंध का मुद्दा विशेष रूप से उठाया गया था।
फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी की सामग्री की जांच की अपील
FIP ने AAIB से फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी द्वारा प्रस्तुत तकनीकी सामग्री की भी सावधानीपूर्वक समीक्षा करने का अनुरोध किया है। बताया गया है कि इस सामग्री में विमान के संचालन इतिहास, रखरखाव रिकॉर्ड, बार-बार उभरी सिस्टम गड़बड़ियों और खराबी के संकेतों से जुड़े दस्तावेज़ शामिल हैं।
संगठन के अनुसार, AAIB ने यह जानकारी प्राप्त करने और ब्रिटेन के AAIB विशेषज्ञ के माध्यम से उसकी समीक्षा किए जाने की बात स्वीकार की है।
बोइंग 787 की 'मोर इलेक्ट्रिक एयरक्राफ्ट' तकनीक पर सवाल
FIP ने बोइंग 787 में इस्तेमाल की गई अत्यधिक एकीकृत 'मोर इलेक्ट्रिक एयरक्राफ्ट' तकनीक की ओर ध्यान आकर्षित किया है। संगठन का तर्क है कि इस तकनीक में बिजली उत्पादन, बिजली वितरण, निगरानी प्रणाली और डेटा नेटवर्क — सभी विमान के सुरक्षित संचालन में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
संगठन का मानना है कि बार-बार दर्ज तकनीकी खराबियों, बीच-बीच में होने वाली विफलताओं, बिजली आपूर्ति में रुकावट, सॉफ्टवेयर रीसेट, सेंसर संबंधी गड़बड़ियों और रखरखाव के दौरान सामने आई समस्याओं के रिकॉर्ड को एक साथ खँगालने से हादसे के कारणों की पहचान में महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।
तकनीकी जांच के दायरे की विस्तृत सूची
FIP ने निम्नलिखित तकनीकी पहलुओं की गहन जांच की मांग की है — इलेक्ट्रिकल पावर उत्पादन और वितरण प्रणाली, इंटीग्रेटेड मॉड्यूलर एवियोनिक्स, फ्लाइट मैनेजमेंट और फ्लाइट-कंट्रोल कंप्यूटर, बैटरी सिस्टम, पावर-कंट्रोल यूनिट और विमान के डेटा नेटवर्क।
इसके अतिरिक्त, संगठन ने टेक्निकल लॉग एंट्री, बाद में ठीक किए जाने के लिए छोड़ी गई खराबियाँ, बार-बार आने वाली खराबी की रिपोर्ट, बदले गए उपकरण, विश्वसनीयता निगरानी डेटा और सेवा अवधि के दौरान किए गए इंजीनियरिंग सुधारों की विस्तृत समीक्षा की भी माँग की है।
क्रॉस-डेटा सत्यापन पर ज़ोर
FIP ने सुझाव दिया है कि जांचकर्ताओं को फ्लाइट रिकॉर्डर से मिली जानकारी का मिलान एयरक्राफ्ट हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम, ACARS ट्रांसमिशन, मेंटेनेंस डेटाबेस, बिल्ट-इन टेस्ट इक्विपमेंट रिपोर्ट और विमान निर्माता कंपनी के सर्विस रिकॉर्ड से करना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब एआई-171 हादसे की जांच के नतीजे भारतीय विमानन उद्योग के लिए दूरगामी प्रभाव रख सकते हैं।
आगे देखा जाएगा कि AAIB इस विस्तृत माँग-पत्र पर क्या रुख अपनाता है और क्या जांच का दायरा FIP की सिफारिशों के अनुरूप बढ़ाया जाता है।