सेमीकॉन 2026: सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 10 अरब डॉलर निवेश की उम्मीद, कंपनियों में जबरदस्त उत्साह
सारांश
मुख्य बातें
सेमीकॉन 2026 में भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र को लेकर उद्योग जगत में असाधारण उत्साह देखने को मिल रहा है — 19 सितंबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस आयोजन के दौरान करीब 10 अरब डॉलर के निवेश और कई समझौता ज्ञापनों (एमओयू) से जुड़े प्रयास सामने आए हैं। लिंडे इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर मिलंद साधुखान ने कहा कि देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास के लिए माहौल तेज़ी से तैयार हो रहा है।
निवेश और एमओयू का उभरता चित्र
साधुखान के अनुसार, सेमीकॉन 2026 में बड़ी स्थापित कंपनियों के साथ-साथ कई नए और उभरते खिलाड़ी भी सामने आ रहे हैं। ये कंपनियाँ पैकेजिंग, टेस्टिंग और असेंबली से जुड़ी सुविधाएँ भारत में स्थापित करने की तैयारी में हैं। उन्होंने बताया कि लिंडे इंडिया वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर क्षेत्र के प्रमुख खिलाड़ियों के सक्रिय संपर्क में है और उद्योग में परियोजनाओं को लेकर स्पष्ट गति दिखाई दे रही है।
केंद्र और राज्यों की दोहरी प्रोत्साहन नीति
साधुखान ने इस बात पर ज़ोर दिया कि केंद्र सरकार के प्रोत्साहनों के साथ-साथ कई राज्य सरकारें भी इन प्रोत्साहनों के अनुरूप सहयोग देने की इच्छा जता रही हैं, जिससे निवेशकों के लिए सकारात्मक माहौल बन रहा है। केंद्र द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं को राज्यों की ओर से सुविधाएँ उपलब्ध कराने में जो रुचि दिखाई जा रही है, वह आने वाले समय में इस क्षेत्र की विकास यात्रा को और गति दे सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला में एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करने की कोशिश में जुटा है।
ओडिशा में प्रस्तावित सेमीकंडक्टर केंद्र
ओडिशा में कटक और भुवनेश्वर के बीच करीब 178 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित नए औद्योगिक और सेमीकंडक्टर केंद्र को लेकर भी साधुखान ने सकारात्मक रुख अपनाया। उनके अनुसार, परियोजना के प्रारंभिक चरण में ही निवेश और कई एमओयू सामने आ चुके हैं। उन्होंने ओडिशा के मुख्यमंत्री से मुलाकात कर राज्य में सेमीकंडक्टर और औद्योगिक विकास पर चर्चा की है।
साधुखान ने बताया कि लिंडे इंडिया ओडिशा में औद्योगिक गैस की प्रमुख आपूर्तिकर्ता कंपनियों में शामिल है और कंपनी राज्य में हो रहे नए विकास में सक्रिय रूप से जुड़ना चाहती है। कंपनी ने गोपालपुर में एक और भूमि सुरक्षित की है और कटक से जुड़े अवसरों पर भी चर्चा जारी है।
आम जनता और उद्योग पर असर
गौरतलब है कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश की यह लहर न केवल उच्च-कुशल रोज़गार के अवसर पैदा कर सकती है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और रक्षा जैसे क्षेत्रों में आयात-निर्भरता घटाने में भी सहायक हो सकती है। ओडिशा सरकार निवेशकों को भूमि और आवश्यक बुनियादी ढाँचे के रूप में सहयोग देने के लिए सक्रिय बताई जा रही है, जिससे उद्योगों के लिए परियोजनाएँ स्थापित करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
क्या होगा आगे
केंद्र और राज्य सरकारों के प्रोत्साहन, नए निवेश और उद्योगों की बढ़ती भागीदारी के चलते भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र की विकास प्रक्रिया आने वाले समय में और तेज़ होने का अनुमान है। यदि घोषित एमओयू समय-सीमा के भीतर निष्पादित होते हैं और राज्य-स्तरीय सहयोग बना रहता है, तो भारत वैश्विक चिप-निर्माण परिदृश्य में एक उल्लेखनीय स्थान हासिल कर सकता है।