मनोज मुंतशिर ने राधा अष्टमी पर अपर्णा यादव से की मुलाकात, 'घर की चाय' का किस्सा बना चर्चा का केंद्र
सारांश
मुख्य बातें
गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर शुक्ला ने शनिवार, 19 सितंबर 2026 को राधा अष्टमी के पावन अवसर पर अपनी पत्नी नीलम के साथ लखनऊ में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के आवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों ने अपर्णा यादव के दिवंगत पति प्रतीक यादव के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
मुलाकात का माहौल और 'चाय का किस्सा'
मुलाकात के बाद मनोज मुंतशिर ने हल्के-फुल्के अंदाज में अपर्णा यादव के घर की चाय का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वे अपनी 'प्यारी बड़ी बहन' के घर आए हैं और वहाँ उन्हें ऐसी चाय मिली जिसमें चीनी, दूध और पानी का अनुपात बिल्कुल सही था।
मनोज मुंतशिर ने व्यंग्यात्मक अंदाज में टिप्पणी की कि आजकल जो चाय पिलाई जाती है, वह ऐसी लगती है जैसे 'चाय को फांसी दे दी गई हो।' उन्होंने कहा, 'चाय तो वह होती है जो अच्छे से पकाई जाए — मेरी बहन ने मुझे बहुत बढ़िया चाय पिलाई है।' करीब एक मिनट के इस वीडियो के अंत में उन्होंने हँसते हुए तालियों की फरमाइश की, जिस पर अपर्णा यादव भी खिलखिलाकर हँस पड़ीं।
अपर्णा यादव ने सोशल मीडिया पर व्यक्त किया आभार
अपर्णा यादव ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से इस भेंट की जानकारी साझा की। उन्होंने मनोज मुंतशिर शुक्ला और उनकी पत्नी नीलम की उपस्थिति और संवेदनाओं के लिए हृदय से आभार जताया। उन्होंने बताया कि राधा अष्टमी के अवसर पर दोनों ने उनके आवास पर आकर स्वर्गीय प्रतीक यादव को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
वंदे मातरम विवाद पर भी बोले मनोज मुंतशिर
इससे एक दिन पहले, शुक्रवार को मनोज मुंतशिर एक युवा धर्म संसद कार्यक्रम में शामिल हुए। वहाँ 'वंदे मातरम' को केवल दो छंदों तक सीमित करने के विवाद पर उन्होंने कहा कि प्रतिपक्ष के नेता को इस तरह की हरकतों से बाज़ आना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'वंदे मातरम पूरा गाया जाएगा और पूरा गाना पड़ेगा।'
विवादों में बेबाक रहे हैं मनोज मुंतशिर
मनोज मुंतशिर उन साहित्यकारों में गिने जाते हैं जो देश के संवेदनशील मुद्दों पर निर्भीकता से अपनी राय रखते हैं। जुलाई 2026 में जंतर-मंतर पर सीजेपी की अगुवाई में हुए धरना-प्रदर्शन को लेकर भी उनका बयान सुर्खियों में रहा था। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब वे सार्वजनिक विमर्श में सक्रिय रूप से उपस्थित हैं।
आने वाले दिनों में मनोज मुंतशिर के विभिन्न सामाजिक और साहित्यिक मंचों पर और भी सक्रिय रहने की संभावना है।