कोलकाता पुलिस ने 21 जुलाई 'शहीद दिवस' रैली पर लगाई रोक, कलकत्ता हाईकोर्ट जाएगी तृणमूल कांग्रेस
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 1 जुलाई 2026 को ऐलान किया कि वह कोलकाता पुलिस के उस फैसले को कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती देगी, जिसके तहत 21 जुलाई को मध्य कोलकाता के एस्प्लेनेड क्रॉसिंग क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू की गई है। यह वही स्थल है जहाँ पार्टी प्रतिवर्ष अपना ऐतिहासिक 'शहीद दिवस' समारोह आयोजित करती आई है। पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत यह प्रतिबंध दो महीने के लिए लागू किया है।
क्या है निषेधाज्ञा का आधार
कोलकाता पुलिस ने मंगलवार को जानकारी दी कि CESC हाउस के सामने और उसके आसपास के व्यस्त एस्प्लेनेड क्षेत्र में BNSS की धारा 163 लागू कर दी गई है। इस धारा के तहत एक निश्चित संख्या से अधिक लोगों का एक ही समय और स्थान पर एकत्र होना प्रतिबंधित है। उल्लेखनीय है कि यह प्रतिबंध किसी एक दिन के लिए नहीं, बल्कि पूरे दो महीने के लिए लगाया गया है — जो इसे असाधारण रूप से व्यापक बनाता है।
TMC नेताओं की कानूनी और राजनीतिक प्रतिक्रिया
तृणमूल कांग्रेस के चार बार लोकसभा सांसद रहे और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने इस आदेश को गैर-कानूनी करार दिया। उन्होंने कहा, 'हम इस आदेश के खिलाफ निश्चित रूप से अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। हम केस दायर करेंगे। हम कानूनी और राजनीतिक, दोनों तरह से इसका मुकाबला करेंगे। हमें देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है।' बनर्जी ने यह भी कहा कि 'लोगों के लोकतांत्रिक आंदोलन को इस तरह नहीं रोका जा सकता।'
उनका आरोप है कि पूरे इलाके में दो महीने के लिए धारा 163 लागू करना कानून के दायरे से बाहर है और ऐसा लगता है कि विपक्षी नेता सुवेंदु अधिकारी लोगों के लोकतांत्रिक रूप से इकट्ठा होने और संगठित विरोध प्रदर्शनों से भयभीत हैं।
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि उन्हें विश्वास है कि न्यायपालिका राज्य प्रशासन की अलोकतांत्रिक कार्रवाइयों का समाधान निकालेगी।
शहीद दिवस का ऐतिहासिक महत्व
तृणमूल कांग्रेस प्रतिवर्ष 21 जुलाई को 'शहीद दिवस' के रूप में मनाती है। यह परंपरा वर्ष 1993 की उस घटना की स्मृति में है जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं की हत्या हुई थी। प्रारंभ में यह कार्यक्रम कांग्रेस द्वारा आयोजित किया जाता था। 1998 में जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की, तब से यह आयोजन TMC की राजनीतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बन गया। CESC हाउस के सामने का यह स्थल दशकों से इस रैली का केंद्र रहा है।
आगे क्या होगा
TMC के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले को कानूनी और राजनीतिक, दोनों मोर्चों पर लड़ेंगे। कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर किए जाने की संभावना है, जहाँ अदालत यह तय करेगी कि दो महीने के लिए लागू यह व्यापक निषेधाज्ञा संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप है या नहीं। यह विवाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए टकराव की आहट दे रहा है।