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कोलकाता पुलिस ने 21 जुलाई 'शहीद दिवस' रैली पर लगाई रोक, कलकत्ता हाईकोर्ट जाएगी तृणमूल कांग्रेस

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कोलकाता पुलिस ने 21 जुलाई 'शहीद दिवस' रैली पर लगाई रोक, कलकत्ता हाईकोर्ट जाएगी तृणमूल कांग्रेस

सारांश

कोलकाता पुलिस ने 21 जुलाई की TMC शहीद दिवस रैली के ऐतिहासिक स्थल एस्प्लेनेड पर दो महीने की निषेधाज्ञा लगा दी है। अब तृणमूल कांग्रेस इसे कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी में है — यह टकराव पश्चिम बंगाल में लोकतांत्रिक अधिकारों और पुलिस शक्ति के बीच की रेखा पर है।

मुख्य बातें

कोलकाता पुलिस ने BNSS की धारा 163 के तहत मध्य कोलकाता के एस्प्लेनेड क्षेत्र में दो महीने की निषेधाज्ञा लागू की।
यह प्रतिबंध 21 जुलाई को TMC के वार्षिक 'शहीद दिवस' समारोह को प्रभावित करेगा।
TMC के वरिष्ठ अधिवक्ता और सांसद कल्याण बनर्जी ने आदेश को गैर-कानूनी बताया और कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की घोषणा की।
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि अदालत प्रशासन की अलोकतांत्रिक कार्रवाई का समाधान निकालेगी।
शहीद दिवस की परंपरा 1993 से चली आ रही है; 1998 में TMC की स्थापना के बाद से यह पार्टी इसे CESC हाउस के सामने आयोजित करती है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 1 जुलाई 2026 को ऐलान किया कि वह कोलकाता पुलिस के उस फैसले को कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती देगी, जिसके तहत 21 जुलाई को मध्य कोलकाता के एस्प्लेनेड क्रॉसिंग क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू की गई है। यह वही स्थल है जहाँ पार्टी प्रतिवर्ष अपना ऐतिहासिक 'शहीद दिवस' समारोह आयोजित करती आई है। पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत यह प्रतिबंध दो महीने के लिए लागू किया है।

क्या है निषेधाज्ञा का आधार

कोलकाता पुलिस ने मंगलवार को जानकारी दी कि CESC हाउस के सामने और उसके आसपास के व्यस्त एस्प्लेनेड क्षेत्र में BNSS की धारा 163 लागू कर दी गई है। इस धारा के तहत एक निश्चित संख्या से अधिक लोगों का एक ही समय और स्थान पर एकत्र होना प्रतिबंधित है। उल्लेखनीय है कि यह प्रतिबंध किसी एक दिन के लिए नहीं, बल्कि पूरे दो महीने के लिए लगाया गया है — जो इसे असाधारण रूप से व्यापक बनाता है।

TMC नेताओं की कानूनी और राजनीतिक प्रतिक्रिया

तृणमूल कांग्रेस के चार बार लोकसभा सांसद रहे और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने इस आदेश को गैर-कानूनी करार दिया। उन्होंने कहा, 'हम इस आदेश के खिलाफ निश्चित रूप से अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। हम केस दायर करेंगे। हम कानूनी और राजनीतिक, दोनों तरह से इसका मुकाबला करेंगे। हमें देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है।' बनर्जी ने यह भी कहा कि 'लोगों के लोकतांत्रिक आंदोलन को इस तरह नहीं रोका जा सकता।'

उनका आरोप है कि पूरे इलाके में दो महीने के लिए धारा 163 लागू करना कानून के दायरे से बाहर है और ऐसा लगता है कि विपक्षी नेता सुवेंदु अधिकारी लोगों के लोकतांत्रिक रूप से इकट्ठा होने और संगठित विरोध प्रदर्शनों से भयभीत हैं।

TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि उन्हें विश्वास है कि न्यायपालिका राज्य प्रशासन की अलोकतांत्रिक कार्रवाइयों का समाधान निकालेगी।

शहीद दिवस का ऐतिहासिक महत्व

तृणमूल कांग्रेस प्रतिवर्ष 21 जुलाई को 'शहीद दिवस' के रूप में मनाती है। यह परंपरा वर्ष 1993 की उस घटना की स्मृति में है जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं की हत्या हुई थी। प्रारंभ में यह कार्यक्रम कांग्रेस द्वारा आयोजित किया जाता था। 1998 में जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की, तब से यह आयोजन TMC की राजनीतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बन गया। CESC हाउस के सामने का यह स्थल दशकों से इस रैली का केंद्र रहा है।

आगे क्या होगा

TMC के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले को कानूनी और राजनीतिक, दोनों मोर्चों पर लड़ेंगे। कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर किए जाने की संभावना है, जहाँ अदालत यह तय करेगी कि दो महीने के लिए लागू यह व्यापक निषेधाज्ञा संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप है या नहीं। यह विवाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए टकराव की आहट दे रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील कदम है — खासकर जब यह प्रतिबंध किसी आपातकालीन स्थिति के बजाय एक पूर्व-नियोजित राजनीतिक रैली को निशाना बनाता है। यह ऐसे समय में आया है जब TMC और विपक्ष के बीच पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक स्थानों पर नियंत्रण को लेकर तनाव बढ़ रहा है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि BNSS की धारा 163 का इस्तेमाल दो महीने जैसी लंबी अवधि के लिए करना कानूनी रूप से असामान्य है और इसे न्यायिक जाँच में टिकाना मुश्किल हो सकता है। कलकत्ता उच्च न्यायालय का फैसला न केवल इस रैली के लिए, बल्कि भविष्य में सार्वजनिक सभाओं पर पुलिस की शक्ति की सीमाओं के लिए एक मिसाल बन सकता है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता पुलिस ने 21 जुलाई की TMC रैली पर क्यों रोक लगाई?
कोलकाता पुलिस ने BNSS की धारा 163 के तहत मध्य कोलकाता के एस्प्लेनेड क्षेत्र में दो महीने की निषेधाज्ञा लागू की है, जो एक निश्चित संख्या से अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाती है। इससे TMC का वार्षिक 21 जुलाई 'शहीद दिवस' समारोह प्रभावित होगा।
TMC का 'शहीद दिवस' क्या है और इसका इतिहास क्या है?
TMC प्रतिवर्ष 21 जुलाई को 'शहीद दिवस' मनाती है, जो 1993 में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की हत्या की स्मृति में आयोजित होता है। 1998 में ममता बनर्जी द्वारा TMC की स्थापना के बाद से यह रैली CESC हाउस के सामने आयोजित की जाती रही है।
TMC कलकत्ता हाईकोर्ट में क्या माँग करेगी?
TMC निषेधाज्ञा आदेश को गैर-कानूनी घोषित करने और रद्द करने की माँग करेगी। वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी का तर्क है कि पूरे इलाके में दो महीने के लिए BNSS धारा 163 लागू करना कानून के दायरे से बाहर है।
BNSS की धारा 163 क्या है?
BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की धारा 163 कार्यकारी मजिस्ट्रेट को किसी क्षेत्र में एक निश्चित संख्या से अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देती है। इसका उपयोग आमतौर पर कानून-व्यवस्था की आशंका के समय किया जाता है।
इस विवाद में TMC के कौन-से नेता सामने आए हैं?
TMC के चार बार लोकसभा सांसद रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कानूनी लड़ाई का नेतृत्व करने की घोषणा की है। TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भी न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए इस कार्रवाई को अलोकतांत्रिक बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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