पाकिस्तान में अफगान प्रवासियों पर बड़ी कार्रवाई: 24 घंटे में 4,000 से अधिक निर्वासित, UN ने जताई चिंता
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान सरकार ने 10 जुलाई 2025 की समय-सीमा समाप्त होने के बाद अफगान प्रवासियों के विरुद्ध व्यापक गिरफ्तारी और निर्वासन अभियान छेड़ दिया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बिना वैध दस्तावेज़ वाले अफगान नागरिकों को स्वेच्छा से देश छोड़ने का आखिरी मौका दिया गया था, जिसकी अवधि बीतते ही अधिकारियों ने देशव्यापी कार्रवाई शुरू कर दी। तालिबान हाई कमीशन फॉर एड्रेसिंग रिटर्नीज़ इश्यूज़ के सेक्रेटेरिएट के अनुसार, पिछले सप्ताहांत केवल 24 घंटों में 4,000 से अधिक अफगानों को पाकिस्तान से वापस भेजा गया।
अभियान का दायरा और स्वरूप
पाकिस्तानी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह अभियान पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान, गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर — यानी देश के सभी प्रमुख क्षेत्रों में एक साथ चलाया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारी केवल बिना दस्तावेज़ वाले लोगों को ही नहीं, बल्कि उन अफगानों को भी हिरासत में ले रहे हैं जिनके अफगान सिटीजन कार्ड (ACC) या वीज़ा की अवधि समाप्त हो चुकी है। पाकिस्तान सरकार ने स्पष्ट किया है कि अस्थायी दस्तावेज़ धारकों को भी निर्वासन से छूट नहीं दी जाएगी।
प्रवासियों की आपबीती और डर का माहौल
पाकिस्तान में रह रहे एक अफगान प्रवासी ने बताया कि 'लगभग एक वर्ष से वीज़ा मिलना या उसका नवीनीकरण कराना अत्यंत कठिन हो गया है।' उन्होंने कहा, 'अगर हमें गिरफ्तार करके वापस भेज दिया गया, तो हम सभी जानते हैं कि अफगानिस्तान में हालात कैसे हैं — हमें तालिबान से बदले की कार्रवाई का डर है।' पाकिस्तान में रहने वाली एक अफगान पत्रकार ने इस मुद्दे की गंभीरता रेखांकित करते हुए कहा कि 'जो लोग 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद पाकिस्तान आए, वे शरणार्थी हैं, सिर्फ प्रवासी नहीं — उन्हें वापस भेजना उनकी जान के लिए खतरा बन सकता है।'
2023 से अब तक: निर्वासन के आँकड़े
पाकिस्तानी मीडिया के आँकड़ों के अनुसार, 2023 के अंत में वापसी अभियान शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 25.9 लाख अफगान प्रवासियों और शरणार्थियों को पाकिस्तान से वापस भेजा जा चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब अफगानिस्तान में तालिबान शासन के तहत मानवाधिकार उल्लंघन की रिपोर्टें लगातार सामने आ रही हैं, जिससे निर्वासितों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता गहरी हो गई है।
संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों की अपील
संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तान से जबरन निर्वासन रोकने की अपील की है। उनका कहना है कि वापस भेजे जाने वाले कई अफगानों को अफगानिस्तान में उत्पीड़न, मनमानी हिरासत, यातना या बदले की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। आलोचकों का कहना है कि यह अभियान अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी कानून के तहत 'नॉन-रिफाउलमेंट' के सिद्धांत का उल्लंघन करता है, जो किसी को भी ऐसी जगह वापस भेजने से रोकता है जहाँ उसे गंभीर खतरा हो। पाकिस्तान सरकार ने अभी तक इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच पाकिस्तान अपने अभियान की रफ्तार को बनाए रखता है या कोई मध्यमार्ग अपनाता है।