पाकिस्तान से अफगान प्रवासियों का निष्कासन जारी: एक दिन में 4,237 लोग वापस भेजे गए
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान ने रविवार, 25 मई 2026 को 4,237 अफगान प्रवासियों को देश से निकाल दिया — यह बड़े पैमाने पर चल रहे निष्कासन अभियान की ताज़ा कड़ी है, जो पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच हालिया सैन्य तनाव के बाद और तेज़ हो गया है। तालिबान के रिफ्यूजी कमीशन ने स्थानीय मीडिया को यह जानकारी दी। ये प्रवासी दक्षिणी कंधार प्रांत के स्पिन बोल्डक बॉर्डर क्रॉसिंग के रास्ते अफगानिस्तान में दाखिल हुए।
मुख्य घटनाक्रम
निष्कासन का यह सिलसिला पिछले कई दिनों से लगातार जारी है। तालिबान के रिफ्यूजी कमीशन के अनुसार, गुरुवार को तोरखम क्रॉसिंग के जरिए 4,590 अफगानों को वापस भेजा गया था। इसके बाद शुक्रवार को 4,398 और शनिवार को 4,142 लोगों को निष्कासित किया गया। रविवार को डिपोर्ट किए गए लोगों के अलावा, उसी दिन ईरान से भी 355 अफगान प्रवासियों को वापस भेजा गया।
व्यापक आँकड़े और मानवीय संकट
इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) के मुताबिक, 26 अप्रैल से 9 मई के बीच ईरान और पाकिस्तान से मिलाकर करीब 1,14,321 लोग अफगानिस्तान लौटे, जिनमें 14,778 परिवार शामिल थे — इनमें बड़ी संख्या में महिलाएँ और बच्चे हैं। IOM के अनुसार, 1 जनवरी से 9 मई 2026 के बीच कुल 35 लाख से अधिक लोग अफगानिस्तान लौट चुके हैं, जिनमें करीब 4,87,000 परिवार शामिल हैं।
IOM ने स्पष्ट किया कि लौटने वालों में जबरन निष्कासित और स्वेच्छा से लौटने वाले — दोनों शामिल हैं। हालाँकि, रिपोर्टों के अनुसार अधिकांश लोग अपनी मर्जी से वापस आए हैं।
पाकिस्तान की सख्त नीति और मानवाधिकार चिंताएँ
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान बिना दस्तावेज़ वाले विदेशी नागरिकों के खिलाफ अपनी कार्रवाई लगातार जारी रखे हुए है, जिसका सबसे अधिक असर अफगान समुदाय पर पड़ा है। इस महीने की शुरुआत में पेशावर और आसपास के जिलों में छापेमारी के दौरान करीब 1,500 अफगान शरणार्थियों को हिरासत में लिया गया था। अफगान डायस्पोरा नेटवर्क की रिपोर्ट के मुताबिक, खजाना कैंप की एक मस्जिद से करीब 100 अफगान नागरिकों को गिरफ्तार किया गया।
मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने जबरन वापसी पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि निष्कासित लोगों को वापस लौटने पर आर्थिक तंगी, घर की कमी, नौकरी न मिलने और सार्वजनिक सेवाओं तक सीमित पहुँच जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
संयुक्त राष्ट्र की अपील
यूएन रिफ्यूजी एजेंसी (UNHCR) और यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने सरकारों से अपील की है कि वे उन अफगान प्रवासियों को जबरन वापस न भेजें जिन्हें उत्पीड़न या अन्य गंभीर खतरों का सामना करना पड़ सकता है। इनमें विशेष रूप से महिलाएँ, पूर्व सरकारी कर्मचारी, पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल हैं।
आगे की स्थिति
यह निष्कासन अभियान हाल के वर्षों में सबसे आक्रामक प्रवर्तन चरणों में से एक माना जा रहा है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच तनाव कम होने के कोई संकेत फिलहाल नहीं हैं, और IOM समेत अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ अफगानिस्तान में बढ़ते मानवीय दबाव पर नज़र बनाए हुए हैं।