10 जुलाई 2026
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पाकिस्तान से अफगान प्रवासियों का निष्कासन जारी: एक दिन में 4,237 लोग वापस भेजे गए

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पाकिस्तान से अफगान प्रवासियों का निष्कासन जारी: एक दिन में 4,237 लोग वापस भेजे गए

सारांश

पाकिस्तान का अफगान-निष्कासन अभियान थमने का नाम नहीं ले रहा — चार दिनों में 17,000 से अधिक लोग वापस भेजे जा चुके हैं। IOM के मुताबिक इस साल अब तक 35 लाख से ज़्यादा अफगान वापस लौटे हैं, जबकि UN एजेंसियाँ जबरन वापसी पर गंभीर चेतावनी दे रही हैं।

मुख्य बातें

पाकिस्तान ने रविवार, 25 मई को 4,237 अफगान प्रवासियों को स्पिन बोल्डक बॉर्डर क्रॉसिंग के जरिए निष्कासित किया।
पिछले चार दिनों में निष्कासित लोगों की संख्या: गुरुवार 4,590 , शुक्रवार 4,398 , शनिवार 4,142 , रविवार 4,237 ।
उसी दिन ईरान से भी 355 अफगान वापस भेजे गए।
IOM के अनुसार 1 जनवरी से 9 मई 2026 के बीच 35 लाख से अधिक लोग अफगानिस्तान लौटे, जिनमें करीब 4,87,000 परिवार शामिल हैं।
UNHCR और यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने महिलाओं, पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की जबरन वापसी पर गंभीर चिंता जताई है।
पेशावर क्षेत्र में छापेमारी के दौरान करीब 1,500 अफगान शरणार्थियों को हिरासत में लिया गया।

पाकिस्तान ने रविवार, 25 मई 2026 को 4,237 अफगान प्रवासियों को देश से निकाल दिया — यह बड़े पैमाने पर चल रहे निष्कासन अभियान की ताज़ा कड़ी है, जो पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच हालिया सैन्य तनाव के बाद और तेज़ हो गया है। तालिबान के रिफ्यूजी कमीशन ने स्थानीय मीडिया को यह जानकारी दी। ये प्रवासी दक्षिणी कंधार प्रांत के स्पिन बोल्डक बॉर्डर क्रॉसिंग के रास्ते अफगानिस्तान में दाखिल हुए।

मुख्य घटनाक्रम

निष्कासन का यह सिलसिला पिछले कई दिनों से लगातार जारी है। तालिबान के रिफ्यूजी कमीशन के अनुसार, गुरुवार को तोरखम क्रॉसिंग के जरिए 4,590 अफगानों को वापस भेजा गया था। इसके बाद शुक्रवार को 4,398 और शनिवार को 4,142 लोगों को निष्कासित किया गया। रविवार को डिपोर्ट किए गए लोगों के अलावा, उसी दिन ईरान से भी 355 अफगान प्रवासियों को वापस भेजा गया।

व्यापक आँकड़े और मानवीय संकट

इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) के मुताबिक, 26 अप्रैल से 9 मई के बीच ईरान और पाकिस्तान से मिलाकर करीब 1,14,321 लोग अफगानिस्तान लौटे, जिनमें 14,778 परिवार शामिल थे — इनमें बड़ी संख्या में महिलाएँ और बच्चे हैं। IOM के अनुसार, 1 जनवरी से 9 मई 2026 के बीच कुल 35 लाख से अधिक लोग अफगानिस्तान लौट चुके हैं, जिनमें करीब 4,87,000 परिवार शामिल हैं।

IOM ने स्पष्ट किया कि लौटने वालों में जबरन निष्कासित और स्वेच्छा से लौटने वाले — दोनों शामिल हैं। हालाँकि, रिपोर्टों के अनुसार अधिकांश लोग अपनी मर्जी से वापस आए हैं।

पाकिस्तान की सख्त नीति और मानवाधिकार चिंताएँ

रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान बिना दस्तावेज़ वाले विदेशी नागरिकों के खिलाफ अपनी कार्रवाई लगातार जारी रखे हुए है, जिसका सबसे अधिक असर अफगान समुदाय पर पड़ा है। इस महीने की शुरुआत में पेशावर और आसपास के जिलों में छापेमारी के दौरान करीब 1,500 अफगान शरणार्थियों को हिरासत में लिया गया था। अफगान डायस्पोरा नेटवर्क की रिपोर्ट के मुताबिक, खजाना कैंप की एक मस्जिद से करीब 100 अफगान नागरिकों को गिरफ्तार किया गया।

मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने जबरन वापसी पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि निष्कासित लोगों को वापस लौटने पर आर्थिक तंगी, घर की कमी, नौकरी न मिलने और सार्वजनिक सेवाओं तक सीमित पहुँच जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

संयुक्त राष्ट्र की अपील

यूएन रिफ्यूजी एजेंसी (UNHCR) और यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने सरकारों से अपील की है कि वे उन अफगान प्रवासियों को जबरन वापस न भेजें जिन्हें उत्पीड़न या अन्य गंभीर खतरों का सामना करना पड़ सकता है। इनमें विशेष रूप से महिलाएँ, पूर्व सरकारी कर्मचारी, पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल हैं।

आगे की स्थिति

यह निष्कासन अभियान हाल के वर्षों में सबसे आक्रामक प्रवर्तन चरणों में से एक माना जा रहा है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच तनाव कम होने के कोई संकेत फिलहाल नहीं हैं, और IOM समेत अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ अफगानिस्तान में बढ़ते मानवीय दबाव पर नज़र बनाए हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ सैन्य तनाव अब शरणार्थी नीति के हथियार में तब्दील हो गया है। IOM का '35 लाख वापसी' का आँकड़ा चौंकाने वाला है, लेकिन असली सवाल यह है कि इनमें से कितने लोग 'स्वेच्छा से' लौटे और कितने दबाव में — यह भेद दस्तावेज़ीकरण के बिना अस्पष्ट रहता है। UNHCR की चेतावनियाँ बार-बार आती हैं, पर नीति नहीं बदलती; यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार तंत्र की सीमाओं को उजागर करता है। अफगानिस्तान, जो पहले से ही तालिबान शासन में आर्थिक संकट झेल रहा है, इस अचानक जनसंख्या दबाव को संभालने में सक्षम है या नहीं — यह सबसे बड़ा अनुत्तरित प्रश्न है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान से अफगान प्रवासियों को क्यों निकाला जा रहा है?
पाकिस्तान बिना दस्तावेज़ वाले विदेशी नागरिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है, जिसका सबसे अधिक असर अफगान समुदाय पर पड़ा है। यह अभियान पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच हालिया सैन्य तनाव के बाद और तेज़ हो गया है।
इस साल कितने अफगान नागरिक वापस लौटे हैं?
IOM के अनुसार, 1 जनवरी से 9 मई 2026 के बीच 35 लाख से अधिक लोग अफगानिस्तान लौट चुके हैं, जिनमें करीब 4,87,000 परिवार शामिल हैं। इनमें पाकिस्तान और ईरान — दोनों देशों से वापस आने वाले लोग शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने इस निष्कासन पर क्या कहा है?
UNHCR और यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने सरकारों से अपील की है कि वे उन अफगान प्रवासियों को जबरन वापस न भेजें जिन्हें उत्पीड़न या गंभीर खतरों का सामना करना पड़ सकता है। इनमें विशेष रूप से महिलाएँ, पूर्व सरकारी कर्मचारी, पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल हैं।
निष्कासित अफगानों को वापस लौटने पर किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है?
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, वापस लौटने वालों को आर्थिक तंगी, घर की कमी, रोज़गार न मिलने और सार्वजनिक सेवाओं तक सीमित पहुँच जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अफगानिस्तान पहले से ही गहरे आर्थिक संकट में है।
पाकिस्तान में अफगान शरणार्थियों पर छापेमारी कहाँ हुई?
इस महीने की शुरुआत में पेशावर और आसपास के जिलों में ऑपरेशन किए गए, जिनमें करीब 1,500 अफगान शरणार्थियों को हिरासत में लिया गया। अफगान डायस्पोरा नेटवर्क की रिपोर्ट के मुताबिक खजाना कैंप की एक मस्जिद से करीब 100 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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