तस्लीमा नसरीन को CM सुवेंदु अधिकारी का आश्वासन: कोलकाता में आपकी सुरक्षा सुनिश्चित
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार, 2 अगस्त 2026 को बांग्लादेश की प्रख्यात लेखिका एवं कवयित्री तस्लीमा नसरीन को स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया कि कोलकाता में उनकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार उठाएगी। यह आश्वासन ऐसे समय आया जब नसरीन लगभग 19 वर्षों के निर्वासन के बाद शुक्रवार को पहली बार कोलकाता लौटी थीं।
मुख्यमंत्री का संबोधन और आश्वासन
मध्य कोलकाता के रवींद्र सदन में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा, 'एक सुरक्षित पश्चिम बंगाल में आपको सुरक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी मेरी है। आप जब चाहें और जितनी बार चाहें आ सकती हैं और बोल सकती हैं।' उन्होंने आगे जोड़ा कि वर्तमान पश्चिम बंगाल बंधनों और प्रतिबंधों से मुक्त है तथा डराना-धमकाना बीते दिनों की बात हो चुकी है। इस कार्यक्रम में तस्लीमा नसरीन मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थीं।
19 वर्षों का निर्वासन: पृष्ठभूमि
2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के कार्यकाल में नसरीन की पुस्तक 'द्विखंडितो' के प्रकाशन को लेकर कोलकाता के कई इलाकों में हिंसा भड़क उठी थी। अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में स्थिति इतनी बिगड़ी कि प्रशासन को सेना तैनात करनी पड़ी। तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने पुस्तक के वितरण पर प्रतिबंध लगाते हुए नसरीन को शहर छोड़ने का निर्देश दिया।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्तर पर साहित्य जगत ने सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार की कट्टरपंथी समूहों के दबाव में झुकने के लिए कड़ी आलोचना की थी। यह ऐसे समय में आया था जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर देशभर में बहस तेज थी।
तृणमूल शासनकाल में भी नहीं बदली स्थिति
2011 से 2026 तक तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 वर्षों के शासनकाल में भी पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नसरीन की कोलकाता वापसी सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की। 2011 से 2016 तक TMC सरकार के दौरान भी यह अलिखित प्रतिबंध यथावत बना रहा। इस प्रकार नसरीन का निर्वासन दो अलग-अलग राजनीतिक दलों के शासनकाल में निर्बाध जारी रहा।
19 साल बाद ऐतिहासिक वापसी
1 अगस्त 2026 को तस्लीमा नसरीन लगभग दो दशकों के बाद पहली बार कोलकाता की धरती पर लौटीं। अगले दिन उन्होंने रवींद्र सदन में विभिन्न सांस्कृतिक समूहों द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की, जहाँ मुख्यमंत्री अधिकारी ने उन्हें निडर होकर बार-बार आने का खुला निमंत्रण दिया।
आगे क्या
मुख्यमंत्री अधिकारी के इस आश्वासन को राज्य में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की नई सरकार की सांस्कृतिक नीति की पहली बड़ी सार्वजनिक अभिव्यक्ति मानी जा रही है। नसरीन की यह वापसी भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक आवाज़ों को लेकर चल रही व्यापक बहस में एक नया आयाम जोड़ती है।