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तस्लीमा नसरीन को CM सुवेंदु अधिकारी का आश्वासन: कोलकाता में आपकी सुरक्षा सुनिश्चित

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तस्लीमा नसरीन को CM सुवेंदु अधिकारी का आश्वासन: कोलकाता में आपकी सुरक्षा सुनिश्चित

सारांश

19 साल के निर्वासन के बाद तस्लीमा नसरीन की कोलकाता वापसी महज एक सांस्कृतिक घटना नहीं — यह दो दशकों की चुप्पी का टूटना है। CM सुवेंदु अधिकारी का सार्वजनिक आश्वासन उस दौर के विपरीत है जब वाम और तृणमूल दोनों सरकारें नसरीन के लिए दरवाज़े बंद रखती थीं।

मुख्य बातें

CM सुवेंदु अधिकारी ने 2 अगस्त 2026 को रवींद्र सदन, कोलकाता में तस्लीमा नसरीन को राज्य सरकार की ओर से पूर्ण सुरक्षा का आश्वासन दिया।
तस्लीमा नसरीन 1 अगस्त 2026 को लगभग 19 वर्षों के निर्वासन के बाद पहली बार कोलकाता लौटीं।
2007 में 'द्विखंडितो' पुस्तक को लेकर हुई हिंसा के बाद वाम मोर्चा सरकार ने नसरीन को कोलकाता छोड़ने का निर्देश दिया था।
2011 से 2026 तक तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्षों के शासन में भी नसरीन की वापसी सुनिश्चित नहीं हुई।
CM अधिकारी ने नसरीन को 'जब चाहें, जितनी बार चाहें' कोलकाता आने का खुला निमंत्रण दिया।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार, 2 अगस्त 2026 को बांग्लादेश की प्रख्यात लेखिका एवं कवयित्री तस्लीमा नसरीन को स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया कि कोलकाता में उनकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार उठाएगी। यह आश्वासन ऐसे समय आया जब नसरीन लगभग 19 वर्षों के निर्वासन के बाद शुक्रवार को पहली बार कोलकाता लौटी थीं।

मुख्यमंत्री का संबोधन और आश्वासन

मध्य कोलकाता के रवींद्र सदन में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा, 'एक सुरक्षित पश्चिम बंगाल में आपको सुरक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी मेरी है। आप जब चाहें और जितनी बार चाहें आ सकती हैं और बोल सकती हैं।' उन्होंने आगे जोड़ा कि वर्तमान पश्चिम बंगाल बंधनों और प्रतिबंधों से मुक्त है तथा डराना-धमकाना बीते दिनों की बात हो चुकी है। इस कार्यक्रम में तस्लीमा नसरीन मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थीं।

19 वर्षों का निर्वासन: पृष्ठभूमि

2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के कार्यकाल में नसरीन की पुस्तक 'द्विखंडितो' के प्रकाशन को लेकर कोलकाता के कई इलाकों में हिंसा भड़क उठी थी। अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में स्थिति इतनी बिगड़ी कि प्रशासन को सेना तैनात करनी पड़ी। तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने पुस्तक के वितरण पर प्रतिबंध लगाते हुए नसरीन को शहर छोड़ने का निर्देश दिया।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्तर पर साहित्य जगत ने सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार की कट्टरपंथी समूहों के दबाव में झुकने के लिए कड़ी आलोचना की थी। यह ऐसे समय में आया था जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर देशभर में बहस तेज थी।

तृणमूल शासनकाल में भी नहीं बदली स्थिति

2011 से 2026 तक तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 वर्षों के शासनकाल में भी पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नसरीन की कोलकाता वापसी सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की। 2011 से 2016 तक TMC सरकार के दौरान भी यह अलिखित प्रतिबंध यथावत बना रहा। इस प्रकार नसरीन का निर्वासन दो अलग-अलग राजनीतिक दलों के शासनकाल में निर्बाध जारी रहा।

19 साल बाद ऐतिहासिक वापसी

1 अगस्त 2026 को तस्लीमा नसरीन लगभग दो दशकों के बाद पहली बार कोलकाता की धरती पर लौटीं। अगले दिन उन्होंने रवींद्र सदन में विभिन्न सांस्कृतिक समूहों द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की, जहाँ मुख्यमंत्री अधिकारी ने उन्हें निडर होकर बार-बार आने का खुला निमंत्रण दिया।

आगे क्या

मुख्यमंत्री अधिकारी के इस आश्वासन को राज्य में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की नई सरकार की सांस्कृतिक नीति की पहली बड़ी सार्वजनिक अभिव्यक्ति मानी जा रही है। नसरीन की यह वापसी भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक आवाज़ों को लेकर चल रही व्यापक बहस में एक नया आयाम जोड़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे केवल उदारता के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए — यह नई सरकार द्वारा पूर्ववर्ती वाम और TMC शासन की विफलताओं को रेखांकित करने का सुचिंतित प्रयास भी है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह आश्वासन एक सांस्कृतिक कार्यक्रम की सुर्खी से आगे बढ़कर नीतिगत बदलाव का रूप लेता है। नसरीन का निर्वासन किसी एक दल की विफलता नहीं था — यह दो दशकों तक दो अलग-अलग सरकारों की सामूहिक चुप्पी थी, जो अब राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का औज़ार बन रही है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तस्लीमा नसरीन को कोलकाता क्यों छोड़ना पड़ा था?
2007 में नसरीन की पुस्तक 'द्विखंडितो' के प्रकाशन को लेकर कोलकाता में हिंसा भड़की और अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में तनाव फैला। तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने पुस्तक के वितरण पर प्रतिबंध लगाते हुए नसरीन को शहर छोड़ने का निर्देश दिया था।
तस्लीमा नसरीन कितने साल बाद कोलकाता लौटीं?
तस्लीमा नसरीन लगभग 19 वर्षों के बाद 1 अगस्त 2026 को पहली बार कोलकाता लौटीं। 2007 में हुई हिंसा के बाद से वे शहर से दूर थीं।
CM सुवेंदु अधिकारी ने तस्लीमा नसरीन को क्या आश्वासन दिया?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने रवींद्र सदन में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में कहा कि नसरीन की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी है और वे जब चाहें, जितनी बार चाहें कोलकाता आ सकती हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान पश्चिम बंगाल में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुरक्षित है।
क्या तृणमूल कांग्रेस सरकार ने तस्लीमा नसरीन की वापसी के लिए कोई पहल की थी?
नहीं। 2011 से 2026 तक तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्षों के शासनकाल में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नसरीन की कोलकाता वापसी सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की। 2011 से 2016 के बीच भी यह अलिखित प्रतिबंध जारी रहा।
तस्लीमा नसरीन की 'द्विखंडितो' पुस्तक पर क्या हुआ था?
'द्विखंडितो' के प्रकाशन को लेकर 2007 में कोलकाता के कई इलाकों में हिंसा हुई और स्थिति इतनी बिगड़ी कि प्रशासन को सेना तैनात करनी पड़ी। वाम मोर्चा सरकार ने पुस्तक के वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसकी साहित्य जगत ने व्यापक आलोचना की थी।
राष्ट्र प्रेस
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