तस्लीमा नसरीन की 19 साल बाद कोलकाता वापसी, CM सुवेंदु अधिकारी ने किया सम्मानित
सारांश
मुख्य बातें
निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन लगभग 19 वर्षों के अंतराल के बाद 1 अगस्त 2026 को सार्वजनिक रूप से कोलकाता पहुँचीं, जहाँ पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने उन्हें एक विशेष कार्यक्रम में सम्मानित किया। यह वापसी उस शहर में हुई जिसे नसरीन अपनी 'सिटी ऑफ जॉय' कहती रही हैं — और जहाँ से उन्हें कभी राजनीतिक दबाव में जाना पड़ा था।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सभी को आने का अवसर है और सभी को बोलने की स्वतंत्रता है। उन्होंने कहा, 'प्रख्यात लेखिका तस्लीमा नसरीन कल पश्चिम बंगाल पहुँचीं और आज कार्यक्रम में शामिल हो रही हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि नई सरकार के हाथों में बंगाल का लोकतंत्र, संविधान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकार सुरक्षित हैं।'
वापसी की पृष्ठभूमि
तस्लीमा नसरीन की कोलकाता वापसी की उम्मीद मार्च 2025 में तब जगी थी, जब पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने संसद के उच्च सदन में उन्हें कोलकाता लौटने की अनुमति देने की माँग उठाई थी। यह माँग उस विवाद के बाद सामने आई थी, जब तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर उनकी चर्चित पुस्तक 'लज्जा' पर आधारित नाटक के मंचन को रोकने का आरोप लगा था।
निर्वासन की कहानी
वर्ष 1993 में प्रकाशित 'लज्जा' में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद बांग्लादेश में एक हिंदू परिवार पर हुए अत्याचारों का चित्रण किया गया था, जिसके चलते उन्हें अपने देश में तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा। धार्मिक कट्टरता की आलोचना, महिलाओं के अधिकारों की मुखर वकालत और धर्म के नाम पर होने वाले भेदभाव के विरोध के कारण कट्टरपंथियों ने उनके सिर पर इनाम घोषित कर दिया, जिसके बाद उन्हें 1994 में बांग्लादेश छोड़ना पड़ा।
वर्ष 2004 में उन्होंने कोलकाता को अपना ठिकाना बनाया, लेकिन 2007 में उनकी आत्मकथात्मक पुस्तक 'द्विखंडित' को लेकर हुए उग्र विरोध प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें राज्य छोड़ने पर मजबूर कर दिया। हालाँकि उनकी वापसी पर कभी कोई औपचारिक प्रतिबंध नहीं लगाया गया, TMC सरकार के कार्यकाल में भी कोलकाता के दरवाजे उनके लिए प्रभावी रूप से बंद ही रहे।
कोलकाता से नसरीन का रिश्ता
तस्लीमा नसरीन का जन्म कोलकाता में नहीं हुआ, लेकिन वह इस शहर को हमेशा अपनी 'सिटी ऑफ जॉय' मानती रही हैं। भाषा, साहित्य, संस्कृति और आत्मीय संबंधों के इस केंद्र में उन्होंने एक दूसरा घर बनाया था। 2007 के बाद से वह नई दिल्ली को अपना निवास बनाए हुए थीं।
आगे क्या
यह वापसी राजनीतिक दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है — नई BJP सरकार ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य की सांस्कृतिक और राजनीतिक दिशा पर व्यापक बहस जारी है।