तसलीमा नसरीन विवाद: मौलाना साजिद रशीदी बोले — 'मुसलमानों ने कभी नहीं स्वीकारा, PM मोदी उन्हें भारत में न रहने दें'
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन द्वारा केंद्र सरकार की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना किए जाने के बाद ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने 2 अगस्त को तीखी प्रतिक्रिया दी। रशीदी ने दावा किया कि मुस्लिम समुदाय ने तसलीमा नसरीन को कभी स्वीकार नहीं किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि उन्हें भारत में न रहने दिया जाए।
तसलीमा नसरीन का बयान और पृष्ठभूमि
कोलकाता दौरे के दौरान तसलीमा नसरीन ने कहा कि विभिन्न सरकारों के कार्यकाल में उनके साथ अलग-अलग व्यवहार हुआ, लेकिन वर्तमान केंद्र सरकार ने उन्हें भारत आने की अनुमति दी। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर कथित अत्याचारों पर चिंता व्यक्त करते हुए शिक्षा को सबसे बड़ा और स्थायी समाधान बताया। गौरतलब है कि नसरीन पैगंबर मोहम्मद और धर्म से जुड़ी टिप्पणियों के कारण वर्षों से अपने देश से बाहर रहने को मजबूर हैं।
मौलाना रशीदी की तीखी प्रतिक्रिया
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा, 'तसलीमा नसरीन हमेशा से विवादों में रही हैं। अगर वह कहती हैं कि यूनुस सरकार नाकाम रही, तो वह बांग्लादेश जाकर खुद बदलाव लाने की कोशिश क्यों नहीं करतीं। मुसलमानों ने इन्हें कभी स्वीकार नहीं किया। इन्होंने मुसलमानों की भावनाओं को बहुत ठेस पहुँचाई है।' रशीदी ने यह भी कहा कि नसरीन की बातों को गंभीरता से नहीं लिया जा सकता।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व प्रवक्ता रिजु दत्ता ने इस यात्रा को धर्मनिरपेक्षता का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल अक्सर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर इस्लाम-विरोधी होने का आरोप लगाते हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में तसलीमा नसरीन का सम्मानजनक स्वागत इसके विपरीत तस्वीर पेश करता है। दत्ता ने यह भी कहा कि TMC ने 15 वर्षों तक उन्हें राज्य में आने नहीं दिया, जबकि विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने उनका स्वागत किया।
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने तसलीमा नसरीन के बयान को उनकी 'निजी राय' करार दिया। उन्होंने मदरसों, स्कूलों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे संस्थान बच्चों को शिक्षित करने का प्रयास करते हैं, क्योंकि सरकार के पास सभी बच्चों को शिक्षा देने के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। वहीं, कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि देश में पहले से कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं और बेहतर होगा कि पहले उन्हें सुलझाने पर ध्यान दिया जाए।
व्यापक संदर्भ
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर भारत में चर्चा तेज है। तसलीमा नसरीन दशकों से निर्वासन में हैं और उनकी रचनाएँ धार्मिक रूढ़िवाद की आलोचना के लिए जानी जाती हैं। उनकी भारत यात्रा और सरकार के प्रति सकारात्मक टिप्पणी ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक भावनाओं और राजनीतिक विमर्श के बीच की जटिल रेखा को उजागर किया है।
आगे क्या
मौलाना रशीदी की प्रधानमंत्री से अपील के बाद यह देखना होगा कि केंद्र सरकार तसलीमा नसरीन के भारत में प्रवास को लेकर अपना रुख स्पष्ट करती है या नहीं। फिलहाल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।