15 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मुसलमानों से देशभक्ति का सबूत माँगना अनुचित: मौलाना साजिद रशीदी, स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका याद दिलाई

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मुसलमानों से देशभक्ति का सबूत माँगना अनुचित: मौलाना साजिद रशीदी, स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका याद दिलाई

सारांश

स्वतंत्रता दिवस पर मौलाना साजिद रशीदी का दो-टूक संदेश — मुसलमानों से देशभक्ति का सबूत माँगना इतिहास की अनदेखी है। आजादी की लड़ाई हर मज़हब की साझी विरासत थी। साथ ही उन्होंने मॉब लिंचिंग पर सरकार से ठोस कार्रवाई और पाकिस्तान को भारत की ताकत न आँकने की चेतावनी दी।

मुख्य बातें

मौलाना साजिद रशीदी ने 15 अगस्त 2026 को कहा कि मुसलमानों से देशभक्ति का प्रमाण माँगना अनुचित और ऐतिहासिक तथ्यों के विरुद्ध है।
स्वतंत्रता संग्राम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई — सभी समुदायों ने अपनी जान कुर्बान की।
राष्ट्रगीत के सम्मान पर बल दिया, लेकिन कहा कि धार्मिक आस्था के विरुद्ध कुछ भी जबरन थोपना उचित नहीं।
नफरती बयानों और मॉब लिंचिंग पर केवल बयानबाजी नहीं, सरकार से ठोस कार्रवाई की माँग की।
ऑपरेशन सिंदूर का हवाला देते हुए पाकिस्तान को चेतावनी — भारत की शक्ति को कम न आँकें।

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर स्पष्ट कहा कि मुसलमानों से देशभक्ति का प्रमाण माँगना सर्वथा गलत है, क्योंकि भारत की आजादी की लड़ाई में उनकी कुर्बानियाँ ऐतिहासिक और अविस्मरणीय रही हैं। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राण न्योछावर करने वाले हर समुदाय के शहीदों को याद किया जाए।

मुसलमानों की कुर्बानियाँ और राष्ट्रीय एकता

रशीदी ने कहा कि देश की आजादी के लिए लाखों लोगों ने अपनी जान दी — इनमें हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी समुदायों के लोग शामिल थे। उन्होंने कहा, 'स्वतंत्रता आंदोलन किसी एक मज़हब या जाति की लड़ाई नहीं थी — यह पूरे हिंदुस्तान की साझी विरासत है।' उनके अनुसार, जो लोग मुसलमानों से राष्ट्रप्रेम का सबूत माँगते हैं, वे इतिहास की इस साझेदारी को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं।

राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत पर रुख

राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत से जुड़े सवाल पर मौलाना रशीदी ने कहा कि दोनों देश के सम्मान का विषय हैं और राष्ट्रगीत का अपमान किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी नागरिक पर उसकी धार्मिक आस्था के विरुद्ध जाकर कुछ भी जबरन थोपना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, देश के तिरंगे और राष्ट्रगीत का सम्मान करना हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है, लेकिन यह दबाव नहीं, भावना से आनी चाहिए।

राहुल गांधी की अनुपस्थिति पर टिप्पणी

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल न होने के सवाल पर रशीदी ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति की जगह है, परंतु स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर उपस्थित रहना राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देश के प्रति एकजुटता का प्रतीक होता है। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसरों पर सभी नेताओं की मौजूदगी वांछनीय है।

नफरती बयान और मॉब लिंचिंग पर सरकार से माँग

नफरत फैलाने वाले बयानों और मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर मौलाना रशीदी ने कहा कि केवल निंदा-प्रस्ताव पर्याप्त नहीं हैं — सरकार को ठोस कार्रवाई करनी होगी। उनके अनुसार, यदि नफरत फैलाने वालों के विरुद्ध प्रभावी और निष्पक्ष कार्रवाई हो, तो देश का सामाजिक माहौल काफी हद तक सुधर सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब मॉब लिंचिंग और सांप्रदायिक तनाव की घटनाएँ राष्ट्रीय विमर्श में केंद्र में हैं।

पाकिस्तान और ऑपरेशन सिंदूर पर कड़ा संदेश

पाकिस्तान के साथ चल रहे तनाव और सिंधु जल समझौते को लेकर रशीदी ने कहा कि पाकिस्तान को भारत की शक्ति को कम करके नहीं आँकना चाहिए। ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी चुनौती का मुँहतोड़ जवाब देने में सक्षम है और पाकिस्तान को किसी प्रकार की गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव का माहौल बना हुआ है।

मौलाना रशीदी का यह संबोधन स्वतंत्रता दिवस की उस व्यापक बहस का हिस्सा है जो हर साल राष्ट्रीय पहचान, सांप्रदायिक सौहार्द और नागरिक दायित्व के इर्द-गिर्द उठती है — और इस बार उनके बयानों ने इस विमर्श को और गहराई दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब सांप्रदायिक तनाव और 'राष्ट्रभक्ति की परीक्षा' की माँगें सार्वजनिक विमर्श में हावी हैं। यह विडंबना है कि जिस आजादी का जश्न मनाया जा रहा है, उसके लिए लड़ने वाले समुदाय को अपनी निष्ठा साबित करने के लिए कहा जाए। मॉब लिंचिंग पर सरकार से ठोस कार्रवाई की उनकी माँग वाजिब है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस माँग की जवाबदेही-परत को नज़रअंदाज़ कर देती है। पाकिस्तान पर उनका कड़ा रुख यह भी दर्शाता है कि भारतीय मुस्लिम नेतृत्व राष्ट्रीय सुरक्षा पर किसी अस्पष्टता की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना साजिद रशीदी ने मुसलमानों की देशभक्ति पर क्या कहा?
मौलाना रशीदी ने कहा कि मुसलमानों से देशभक्ति का प्रमाण माँगना गलत है, क्योंकि स्वतंत्रता संग्राम में उनकी कुर्बानियाँ ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रही हैं। उनके अनुसार, आजादी की लड़ाई हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई — सभी की साझी विरासत है।
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन क्या है?
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन भारत में मस्जिदों के इमामों का एक प्रमुख संगठन है, जिसके अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी हैं। यह संगठन धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर मुस्लिम समुदाय की ओर से अपनी राय रखता है।
मौलाना रशीदी ने राष्ट्रगीत को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों देश के सम्मान का विषय हैं और इनका अपमान नहीं होना चाहिए। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी की धार्मिक आस्था के विरुद्ध जाकर राष्ट्रगीत गाने के लिए जबरन दबाव बनाना उचित नहीं है।
मॉब लिंचिंग पर मौलाना रशीदी ने सरकार से क्या माँग की?
मौलाना रशीदी ने कहा कि नफरत फैलाने वालों के खिलाफ सरकार को केवल बयान देने की बजाय प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। उनके अनुसार, ऐसी ठोस कार्रवाई से देश का सामाजिक माहौल काफी हद तक सुधर सकता है।
ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान पर मौलाना रशीदी का क्या रुख है?
मौलाना रशीदी ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी चुनौती का जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि वह भारत की ताकत को कम करके न आँके और किसी प्रकार की गलतफहमी न पाले।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 घंटे पहले
  2. कल
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले