कल्पना सोरेन आपत्तिजनक पोस्ट केस: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी सहदेव उरांव को दी जमानत
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 29 सितंबर 2026 को झारखंड की विधायक और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन के खिलाफ कथित तौर पर अश्लील व आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट करने के मामले में आरोपी 30 वर्षीय सुरक्षा गार्ड सहदेव उरांव उर्फ सहदेव ओरांव को जमानत प्रदान कर दी। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने आरोपी की एक वर्ष से अधिक की हिरासत अवधि और संबंधित अपराधों में अधिकतम तीन वर्ष की सज़ा का प्रावधान होने को जमानत का प्रमुख आधार माना।
मामले की पृष्ठभूमि
आरोप है कि 28 अगस्त 2025 को 'आदिवासी लड़का राजू उरांव' नाम के एक फेसबुक अकाउंट से कल्पना सोरेन की तस्वीर के साथ कथित तौर पर अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणी पोस्ट की गई थी। इस घटना के अगले दिन रांची साइबर क्राइम थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई, जो सीधे कल्पना सोरेन की शिकायत पर नहीं, बल्कि अन्य माध्यम से दर्ज हुई थी। सहदेव उरांव को इस मामले में 6 सितंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया और तब से वह न्यायिक हिरासत में था।
सुप्रीम कोर्ट के जमानत के आधार
अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की मौजूदा स्थिति में आरोपी की हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है। आरोपी पक्ष की ओर से न्यायालय को बताया गया कि जांच पूरी हो चुकी है और आरोप-पत्र दाखिल किया जा चुका है। यह भी तर्क दिया गया कि अभियोजन का मामला मुख्यतः इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर टिका है और संबंधित डिजिटल साक्ष्य पहले ही पुलिस के कब्ज़े में हैं, इसलिए आरोपी की निरंतर हिरासत अनुचित है।
सहदेव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच एजेंसी ने डिजिटल साक्ष्यों को इस मामले में निर्णायक बताया है।
हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की यात्रा
आरोपी ने पहले झारखंड हाई कोर्ट में जमानत की अर्जी दी थी, लेकिन 17 अप्रैल 2026 को हाई कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद सहदेव ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया। अगस्त 2026 में इसी पीठ ने उसकी याचिका पर झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया था। अब लंबी हिरासत, जांच की समाप्ति और हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता न होने के तीन आधारों पर सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत मंज़ूर की।
दूसरे मामले में पहले ही मिल चुकी थी जमानत
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि इसी कथित घटना से जुड़े एक अन्य मामले में — जो कांके प्रखंड समन्वय समिति के प्रमुख जावेद अंसारी की शिकायत से संबंधित बताया गया है — सहदेव को फरवरी 2026 में पहले ही जमानत मिल चुकी है। उल्लेखनीय है कि दोनों मामलों में प्राथमिकी सीधे कल्पना सोरेन की ओर से दर्ज नहीं कराई गई थी।
आगे की कार्यवाही
जमानत मिलने के बाद अब मामले की सुनवाई निचली अदालत में जारी रहेगी, जहाँ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की परख होगी। यह मामला डिजिटल अभिव्यक्ति, साइबर अपराध कानून और जन-प्रतिनिधियों की गरिमा से जुड़े सवालों को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।