राजस्थान हाई कोर्ट का पॉक्सो मामले में बड़ा फैसला: आरोपी को जमानत, 3 साल सोशल मीडिया पर पाबंदी
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान हाई कोर्ट ने 9 जुलाई 2026 को एक पॉक्सो मामले में आरोपी को जमानत देते हुए असाधारण शर्त लगाई — आरोपी अगले तीन वर्षों तक फेसबुक, इंस्टाग्राम, थ्रेड और स्नैपचैट सहित किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं कर सकेगा। आरोपी पर राजसमंद जिले की एक नाबालिग लड़की की तस्वीर को मॉर्फ कर सोशल मीडिया पर अपलोड करने का आरोप है।
मामले की पृष्ठभूमि
जोधपुर बेंच के जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकल पीठ ने राजसमंद जिले के भीम पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले में आरोपी की जमानत याचिका स्वीकार की। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता की माँ ने इसी वर्ष फरवरी में प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जो 18 सितंबर से 16 अक्टूबर 2025 के बीच हुई कथित घटनाओं से संबंधित थी।
जाँच के दौरान पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 77, पॉक्सो अधिनियम की धारा 11 और 12 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67A के तहत चार्जशीट दाखिल की। आरोपी 2 अप्रैल 2026 से न्यायिक हिरासत में था।
कोर्ट की शर्तें और निर्देश
जमानत मंजूर करते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी ट्रायल कोर्ट के समक्ष एक वचन-पत्र जमा करेगा, जिसमें वह तीन वर्षों तक किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग न करने की प्रतिबद्धता देगा। यदि आरोपी अपने नाम या किसी फर्जी नाम से भी सोशल मीडिया का उपयोग करता पाया गया, तो ट्रायल कोर्ट स्वयं उसका जमानत आदेश वापस ले सकती है।
इसके अलावा आरोपी को ₹50,000 का व्यक्तिगत मुचलका और उतनी ही राशि की दो जमानत जमा करने का निर्देश दिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी पीड़िता या उसके परिवार के किसी भी सदस्य से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क नहीं करेगा और मुकदमे के निपटारे तक सभी सुनवाई तिथियों पर ट्रायल कोर्ट में उपस्थित रहेगा।
दोनों पक्षों के तर्क
बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है, जाँच पूरी हो चुकी है और आगे हिरासत में रखने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी एक युवा है जिसकी पीड़िता से दोस्ती थी और वह सुधार का अवसर चाहता है। वहीं, शिकायतकर्ता के वकील और सरकारी अभियोजक ने जमानत का विरोध किया।
जस्टिस जैन का अहम टिप्पणी
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता और शिकायतकर्ता के बयान पहले ही PW-1 और PW-2 के रूप में ट्रायल कोर्ट में दर्ज हो चुके हैं, इसलिए साक्ष्य प्रभावित होने की कोई आशंका नहीं है। जस्टिस अशोक कुमार जैन ने कहा, 'आरोपी ने सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल किया है, इसलिए कम से कम तीन साल तक सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाना उचित है ताकि वह किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल न करने का सबक सीख सके।'
आगे क्या होगा
यह मामला अब ट्रायल कोर्ट के समक्ष चलता रहेगा। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर जमानत तत्काल रद्द की जा सकती है। गौरतलब है कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग से जुड़े पॉक्सो मामलों में इस तरह की डिजिटल पाबंदी भारतीय अदालतों द्वारा लगाई जाने वाली असामान्य लेकिन बढ़ती हुई प्रवृत्ति को दर्शाती है।