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राजस्थान हाईकोर्ट ने पॉक्सो आरोपी को दी सशर्त जमानत, एक साल तक Instagram-Facebook-Snapchat पर बैन

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राजस्थान हाईकोर्ट ने पॉक्सो आरोपी को दी सशर्त जमानत, एक साल तक Instagram-Facebook-Snapchat पर बैन

सारांश

राजस्थान हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले के आरोपी को जमानत तो दी, लेकिन साथ में एक असाधारण शर्त भी — एक साल तक Instagram, Facebook और Snapchat पर पूर्ण प्रतिबंध। डिजिटल माध्यम से नाबालिग को निशाना बनाने के इस मामले में कोर्ट ने पीड़िता की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

मुख्य बातें

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने पॉक्सो मामले के आरोपी को सशर्त जमानत दी।
आरोपी पर एक वर्ष के लिए Instagram, Facebook और Snapchat समेत सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध।
किसी भी नाम या ई-मेल आईडी से सोशल मीडिया उपयोग पाए जाने पर जमानत रद्द होगी।
आरोपी को ₹50,000 का मुचलका और दो जमानतदार पेश करने का निर्देश।
मामला बीकानेर के मुक्ता प्रसाद नगर थाने में 22 फरवरी को दर्ज; आरोपी 24 फरवरी से हिरासत में था।
पीड़िता या उसके परिवार से किसी भी माध्यम से संपर्क करने पर भी प्रतिबंध।

राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर स्थित अपनी पीठ से एक पॉक्सो मामले के आरोपी को सशर्त जमानत देते हुए उस पर एक वर्ष के लिए इंस्टाग्राम, फेसबुक और स्नैपचैट समेत सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश बीकानेर के मुक्ता प्रसाद नगर थाने में दर्ज नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न मामले में पारित किया गया।

मामले की पृष्ठभूमि

अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता के पिता ने 22 फरवरी को प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि आरोपी ने 1 फरवरी से 20 फरवरी के बीच नाबालिग लड़की का यौन उत्पीड़न किया, उसका पीछा किया और साइबर संबंधित अपराध किए। आरोपी को 24 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में था। मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 78(2) और 79, तथा यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की धारा 11 और 12 के तहत दर्ज है। जाँच पूरी हो चुकी है और आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है।

कोर्ट का आदेश और शर्तें

न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन की एकल-न्यायाधीश पीठ ने जमानत याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि आरोपों की प्रकृति को देखते हुए पीड़िता की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए कुछ शर्तें लगाना आवश्यक है। कोर्ट ने आरोपी को ₹50,000 का निजी मुचलका और उतनी ही राशि के दो जमानतदार ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के अनुसार पेश करने का निर्देश दिया।

आदेश में स्पष्ट किया गया कि आरोपी यदि अपने नाम से, किसी काल्पनिक नाम से, अपनी मोबाइल या ई-मेल आईडी से, अथवा किसी काल्पनिक ई-मेल आईडी से भी किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए पाया गया, तो जमानत का आदेश तत्काल रद्द कर दिया जाएगा।

पीड़िता की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त निर्देश

कोर्ट ने आरोपी को पीड़िता या उसके परिवार के किसी भी सदस्य से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी माध्यम से संपर्क करने पर भी पाबंदी लगाई है। इसके अलावा, आरोपी को सबूतों से छेड़छाड़ न करने, गवाहों को प्रभावित न करने और किसी आपराधिक गतिविधि में संलिप्त न होने की शर्त भी रखी गई है। ट्रायल कोर्ट में सुनवाई की तय तारीखों पर उपस्थिति अनिवार्य होगी।

दोनों पक्षों के तर्क

आरोपी के अधिवक्ता ने दलील दी कि मौखिक आरोपों के अतिरिक्त एफआईआर में लगाए गए आरोपों को प्रमाणित करने के लिए कोई ठोस सामग्री प्रस्तुत नहीं की गई। यह भी कहा गया कि जाँच पूर्ण हो चुकी है, आरोपी के फरार होने की संभावना नहीं है और वह लंबे समय से हिरासत में है।

दूसरी ओर, शिकायतकर्ता के अधिवक्ता और लोक अभियोजक ने विरोध करते हुए कहा कि आरोपी पीड़िता को लगातार परेशान करता रहा था, जिससे उसके लिए सामान्य जीवन जीना कठिन हो गया था और उसे मनोवैज्ञानिक खतरा उत्पन्न हो गया था।

आगे की राह

यह मामला अब ट्रायल कोर्ट के समक्ष चलेगा। गौरतलब है कि डिजिटल माध्यमों के जरिये नाबालिगों को निशाना बनाने के मामलों में अदालतें सोशल मीडिया प्रतिबंध जैसी अभिनव जमानत शर्तें लगाने की ओर बढ़ रही हैं, जो भविष्य के ऐसे मामलों में एक मिसाल बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आलोचकों का कहना है कि ऐसे प्रतिबंधों की निगरानी और प्रवर्तन व्यावहारिक रूप से कठिन है, क्योंकि फर्जी अकाउंट बनाना सरल है। असली प्रश्न यह है कि क्या पुलिस और ट्रायल कोर्ट के पास इस डिजिटल शर्त की प्रभावी निगरानी के लिए संसाधन और तंत्र हैं — अन्यथा यह शर्त कागज़ पर ही सीमित रह जाएगी।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान हाईकोर्ट ने पॉक्सो आरोपी पर सोशल मीडिया बैन क्यों लगाया?
कोर्ट ने पाया कि आरोपी ने सोशल मीडिया के जरिये नाबालिग पीड़िता को परेशान किया था, जिससे उसकी मनोवैज्ञानिक सुरक्षा खतरे में थी। पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन ने यह असाधारण शर्त जमानत आदेश में शामिल की।
सोशल मीडिया बैन का उल्लंघन करने पर क्या होगा?
यदि आरोपी एक वर्ष की अवधि में अपने नाम से, किसी काल्पनिक नाम से या किसी भी ई-मेल आईडी से सोशल मीडिया का उपयोग करते पाया गया, तो उसकी जमानत तत्काल रद्द कर दी जाएगी। कोर्ट ने यह शर्त स्पष्ट रूप से आदेश में दर्ज की है।
यह पॉक्सो मामला किस थाने में और कब दर्ज हुआ था?
यह मामला बीकानेर के मुक्ता प्रसाद नगर पुलिस स्टेशन में 22 फरवरी को पीड़िता के पिता द्वारा दर्ज कराया गया था। आरोप है कि आरोपी ने 1 फरवरी से 20 फरवरी के बीच यौन उत्पीड़न, पीछा करने और साइबर अपराध किए।
जमानत के लिए आरोपी को कौन-सी अन्य शर्तें पूरी करनी होंगी?
आरोपी को ₹50,000 का निजी मुचलका और उतनी ही राशि के दो जमानतदार ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश करने होंगे। इसके अलावा, वह पीड़िता या उसके परिवार से संपर्क नहीं करेगा, सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेगा, गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा और सुनवाई की हर तारीख पर उपस्थित रहेगा।
इस मामले में कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
यह मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 78(2) और 79 तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 11 और 12 के तहत दर्ज है। जाँच पूरी हो चुकी है और आरोप पत्र भी दाखिल किया जा चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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