14 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने पॉक्सो आरोपी को दी जमानत, किशोरों के आपसी रिश्ते की परिस्थितियों को माना प्रासंगिक

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने पॉक्सो आरोपी को दी जमानत, किशोरों के आपसी रिश्ते की परिस्थितियों को माना प्रासंगिक

सारांश

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने पॉक्सो आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि किशोरों के बीच कथित आपसी सहमति से बने रिश्तों की परिस्थितियाँ जमानत के सीमित प्रश्न पर विचार करते समय प्रासंगिक हो सकती हैं — हालाँकि नाबालिग की सहमति को कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती। ट्रायल जारी रहेगा।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने 29 जून 2026 को पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत आरोपी व्यक्ति को जमानत दी।
जस्टिस संजय धर ने कहा कि किशोरों के बीच कथित आपसी सहमति से बने रिश्ते की परिस्थितियाँ जमानत निर्णय में प्रासंगिक हो सकती हैं।
पीड़िता ने ट्रायल कोर्ट में बयान दिया था कि वह स्वेच्छा से आरोपी के साथ गई थी और उससे विवाह करना चाहती थी।
अदालत ने 'उत्तर प्रदेश राज्य बनाम अनिरुद्ध' में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी केवल जमानत तक सीमित है और चल रहे ट्रायल के गुण-दोष पर कोई असर नहीं डालेगी।

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने 29 जून 2026 को पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपी एक व्यक्ति को जमानत प्रदान की, यह स्पष्ट करते हुए कि जमानत अर्जी पर विचार करते समय किशोरों के बीच कथित आपसी सहमति से बने रिश्तों की परिस्थितियाँ प्रासंगिक हो सकती हैं। जस्टिस संजय धर की एकल पीठ ने यह आदेश श्रीनगर में सुनाया और साफ किया कि यह टिप्पणी केवल जमानत के सीमित प्रश्न तक ही सीमित है तथा चल रहे ट्रायल के गुण-दोष पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

मामले की पृष्ठभूमि

आरोपी को मगम पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। उस पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के अंतर्गत अपहरण और बलात्कार के आरोप, तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर की अदालतें किशोर सहमति और पॉक्सो के कड़े प्रावधानों के बीच संतुलन के प्रश्न से जूझ रही हैं।

अदालत ने किन तथ्यों पर दिया ध्यान

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने गौर किया कि पीड़िता ने ट्रायल कोर्ट के समक्ष बयान दिया था कि वह स्वेच्छा से आरोपी के साथ गई थी, उसके साथ उसके अच्छे संबंध थे और उसने अपनी इच्छा से शारीरिक संबंध बनाए थे। पीड़िता की माँ ने भी बयान दिया था कि दोनों के बीच प्रेम-संबंध था, उनकी बेटी स्वयं घर से गई थी और आरोपी की गिरफ्तारी के बाद भी वह उसके परिवार के साथ रह रही थी क्योंकि वह उससे विवाह करना चाहती थी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का संदर्भ

जस्टिस धर ने 'उत्तर प्रदेश राज्य बनाम अनिरुद्ध और अन्य' मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का उल्लेख किया। उन्होंने रेखांकित किया कि पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत नाबालिग की सहमति को कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती, परंतु जमानत के सीमित प्रश्न पर विचार करते समय ऐसे रिश्तों से जुड़ी विशेष परिस्थितियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि इस मामले के खास तथ्यों को देखते हुए जमानत से इनकार करना न्याय के साथ अन्याय होगा।

साक्ष्य और गवाहों की स्थिति

हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि अभियोजन पक्ष के सभी प्रमुख गवाहों से पहले ही पूछताछ हो चुकी है। इससे आरोपी द्वारा गवाहों को प्रभावित करने या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने की संभावना अत्यंत कम हो गई है, जो जमानत देने के पक्ष में एक और महत्त्वपूर्ण कारक बना।

पॉक्सो एक्ट: कानूनी ढाँचा

प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज (पॉक्सो) एक्ट, 2012 एक लिंग-निरपेक्ष कानून है जो 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को यौन हमले, उत्पीड़न और अश्लील सामग्री से सुरक्षा प्रदान करता है। यह कानून नाबालिग के साथ किसी भी यौन गतिविधि को अपराध मानता है — चाहे सहमति हो या न हो। इस प्रकरण में हाईकोर्ट का आदेश ट्रायल के परिणाम को प्रभावित नहीं करता; मुकदमा अपनी स्वाभाविक गति से जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस तरह के निर्णयों की आलोचना यह भी होती है कि ये पीड़िता के 'सहमति' के बयान को अत्यधिक महत्त्व देते हैं जबकि नाबालिग पर सामाजिक दबाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि अदालत ने स्वयं स्पष्ट किया कि ट्रायल पर इसका कोई असर नहीं — यानी दोष-निर्धारण का प्रश्न अभी खुला है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने पॉक्सो आरोपी को जमानत क्यों दी?
जस्टिस संजय धर ने जमानत इसलिए दी क्योंकि पीड़िता ने स्वयं ट्रायल कोर्ट में कहा था कि वह स्वेच्छा से आरोपी के साथ गई थी और उससे विवाह करना चाहती थी। अदालत ने माना कि इन विशेष परिस्थितियों में जमानत से इनकार करना न्याय के साथ अन्याय होगा।
क्या पॉक्सो एक्ट के तहत नाबालिग की सहमति मान्य होती है?
नहीं। पॉक्सो एक्ट, 2012 के अंतर्गत 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति की सहमति को कोई कानूनी मान्यता नहीं दी जाती। हाईकोर्ट ने भी यह स्पष्ट किया, लेकिन कहा कि जमानत के सीमित प्रश्न पर रिश्ते की परिस्थितियाँ प्रासंगिक हो सकती हैं।
आरोपी पर कौन-कौन से आरोप हैं?
आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत अपहरण और बलात्कार के आरोप हैं, साथ ही पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत भी मामला दर्ज है। मगम पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज होने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था।
क्या यह जमानत आदेश ट्रायल को प्रभावित करेगा?
नहीं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि आदेश में की गई टिप्पणियाँ केवल जमानत के प्रश्न तक सीमित हैं और चल रहे ट्रायल के गुण-दोष पर कोई असर नहीं डालेंगी। मुकदमा अपनी सामान्य प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट के किस फैसले का हाईकोर्ट ने हवाला दिया?
हाईकोर्ट ने 'उत्तर प्रदेश राज्य बनाम अनिरुद्ध और अन्य' मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का संदर्भ दिया, जिसमें कहा गया था कि जमानत के सीमित प्रश्न पर किशोरों के बीच आपसी सहमति से बने रिश्तों की परिस्थितियों पर विचार किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले