झारखंड हाई कोर्ट ने ईडी अधिकारियों की FIR मामले में राज्य सरकार पर ₹8,000 का जुर्माना लगाया
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड हाई कोर्ट ने 2 नवंबर 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के तत्कालीन अधिकारियों के विरुद्ध एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की माँग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान झारखंड राज्य सरकार पर ₹8,000 का जुर्माना लगाया। अदालत ने यह आदेश तब दिया जब सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय माँगा। जुर्माने की यह राशि झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के खाते में जमा करानी होगी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 31 जनवरी 2024 का है, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची के एससी-एसटी थाने में ईडी के तत्कालीन अधिकारियों — कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार, अमन पटेल और अन्य अज्ञात व्यक्तियों — के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ईडी अधिकारियों ने उन्हें 29 से 31 जनवरी 2024 तक रांची में रहने को कहा और इसी दौरान उनकी अनुपस्थिति में दिल्ली स्थित आवास पर बिना पूर्व सूचना के तलाशी ली गई।
सोरेन ने यह भी आरोप लगाया था कि इस कार्रवाई से उन्हें मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित किया गया और मीडिया के माध्यम से उनकी छवि को नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया गया।
ईडी अधिकारियों की याचिका
इसके बाद कपिल राज, देवव्रत झा और अन्य ईडी अधिकारियों ने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर उक्त प्राथमिकी को निरस्त करने और उसके आधार पर पुलिस द्वारा की जा रही कार्रवाई पर रोक लगाने की माँग की। अदालत ने पहले इन अधिकारियों के विरुद्ध जारी पुलिस नोटिस और आगे की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया था। ईडी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने अदालत में पक्ष रखा।
जुर्माने का क्रम
गौरतलब है कि इस मामले में जुर्माना लगाए जाने का यह पहला उदाहरण नहीं है। पिछली सुनवाई में इस मामले के प्रतिवादी संख्या दो, पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से जवाब दाखिल करने हेतु चार सप्ताह का समय माँगा गया था, जिस पर अदालत ने समय देते हुए उन पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया था। इस प्रकार अब तक इस मामले में समय माँगने पर राज्य सरकार और हेमंत सोरेन, दोनों पर अलग-अलग जुर्माना लगाया जा चुका है।
आगे की कार्यवाही
अदालत का यह रुख स्पष्ट करता है कि वह इस मामले में अनावश्यक विलंब को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ईडी और राज्य सरकार के बीच कानूनी टकराव अदालत में एक नया आयाम ले चुका है। अगली सुनवाई में राज्य सरकार को जवाब दाखिल करना होगा, अन्यथा न्यायालय के निर्देश और भी कड़े हो सकते हैं।