2 नवंबर 2026
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झारखंड हाई कोर्ट ने ईडी अधिकारियों की FIR मामले में राज्य सरकार पर ₹8,000 का जुर्माना लगाया

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झारखंड हाई कोर्ट ने ईडी अधिकारियों की FIR मामले में राज्य सरकार पर ₹8,000 का जुर्माना लगाया

सारांश

झारखंड हाई कोर्ट ने ईडी अधिकारियों के विरुद्ध दर्ज एससी-एसटी एक्ट की FIR रद्द करने की याचिका पर राज्य सरकार को जवाब देने में देरी पर ₹8,000 का जुर्माना ठोका। पहले हेमंत सोरेन पर भी ₹10,000 जुर्माना लग चुका है — अदालत का रुख सख्त।

मुख्य बातें

झारखंड हाई कोर्ट ने 2 नवंबर 2026 को राज्य सरकार पर ₹8,000 का जुर्माना लगाया, क्योंकि सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए समय माँगा।
जुर्माने की राशि झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के खाते में जमा करानी होगी।
पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर पहले ही इसी मामले में समय माँगने पर ₹10,000 का जुर्माना लग चुका है।
यह मामला 31 जनवरी 2024 को सोरेन द्वारा ईडी अधिकारियों कपिल राज , देवव्रत झा और अन्य के विरुद्ध दर्ज कराई गई FIR से संबंधित है।
अदालत ने पहले ईडी अधिकारियों के विरुद्ध पुलिस नोटिस और आगे की कार्रवाई पर रोक लगा रखी है।

झारखंड हाई कोर्ट ने 2 नवंबर 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के तत्कालीन अधिकारियों के विरुद्ध एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की माँग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान झारखंड राज्य सरकार पर ₹8,000 का जुर्माना लगाया। अदालत ने यह आदेश तब दिया जब सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय माँगा। जुर्माने की यह राशि झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के खाते में जमा करानी होगी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 31 जनवरी 2024 का है, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची के एससी-एसटी थाने में ईडी के तत्कालीन अधिकारियों — कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार, अमन पटेल और अन्य अज्ञात व्यक्तियों — के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ईडी अधिकारियों ने उन्हें 29 से 31 जनवरी 2024 तक रांची में रहने को कहा और इसी दौरान उनकी अनुपस्थिति में दिल्ली स्थित आवास पर बिना पूर्व सूचना के तलाशी ली गई।

सोरेन ने यह भी आरोप लगाया था कि इस कार्रवाई से उन्हें मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित किया गया और मीडिया के माध्यम से उनकी छवि को नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया गया।

ईडी अधिकारियों की याचिका

इसके बाद कपिल राज, देवव्रत झा और अन्य ईडी अधिकारियों ने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर उक्त प्राथमिकी को निरस्त करने और उसके आधार पर पुलिस द्वारा की जा रही कार्रवाई पर रोक लगाने की माँग की। अदालत ने पहले इन अधिकारियों के विरुद्ध जारी पुलिस नोटिस और आगे की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया था। ईडी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने अदालत में पक्ष रखा।

जुर्माने का क्रम

गौरतलब है कि इस मामले में जुर्माना लगाए जाने का यह पहला उदाहरण नहीं है। पिछली सुनवाई में इस मामले के प्रतिवादी संख्या दो, पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से जवाब दाखिल करने हेतु चार सप्ताह का समय माँगा गया था, जिस पर अदालत ने समय देते हुए उन पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया था। इस प्रकार अब तक इस मामले में समय माँगने पर राज्य सरकार और हेमंत सोरेन, दोनों पर अलग-अलग जुर्माना लगाया जा चुका है।

आगे की कार्यवाही

अदालत का यह रुख स्पष्ट करता है कि वह इस मामले में अनावश्यक विलंब को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ईडी और राज्य सरकार के बीच कानूनी टकराव अदालत में एक नया आयाम ले चुका है। अगली सुनवाई में राज्य सरकार को जवाब दाखिल करना होगा, अन्यथा न्यायालय के निर्देश और भी कड़े हो सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों पर जुर्माना लगाना — बताता है कि न्यायपालिका इस मामले को राजनीतिक टकराव की तरह नहीं, बल्कि प्रक्रियागत जवाबदेही की कसौटी पर परख रही है। असली सवाल यह है कि जिस FIR को ईडी अधिकारी रद्द करवाना चाहते हैं, उसे दर्ज कराने का समय और परिस्थितियाँ — ईडी की गिरफ्तारी से ठीक पहले — मामले की राजनीतिक संवेदनशीलता को उजागर करती हैं। यह मामला केवल एक FIR से आगे जाकर यह तय करेगा कि जाँच एजेंसियों के अधिकारियों पर SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज करने की सीमाएँ क्या हों।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार पर जुर्माना क्यों लगाया?
अदालत ने ₹8,000 का जुर्माना इसलिए लगाया क्योंकि राज्य सरकार ने ईडी अधिकारियों की FIR रद्द करने की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय माँगा। यह जुर्माना झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के खाते में जमा कराना होगा।
ईडी अधिकारियों के विरुद्ध FIR किसने और कब दर्ज कराई थी?
तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 31 जनवरी 2024 को रांची के एससी-एसटी थाने में ईडी अधिकारियों कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार, अमन पटेल और अन्य के विरुद्ध FIR दर्ज कराई थी। आरोप था कि अधिकारियों ने उन्हें रांची रोककर दिल्ली स्थित आवास पर बिना सूचना तलाशी ली।
इस मामले में हेमंत सोरेन पर भी जुर्माना लगा था?
हाँ, पिछली सुनवाई में हेमंत सोरेन की ओर से जवाब दाखिल करने हेतु चार सप्ताह का समय माँगे जाने पर अदालत ने उन पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया था। इस प्रकार अब तक इस मामले में राज्य सरकार और सोरेन दोनों पर जुर्माना लगाया जा चुका है।
ईडी अधिकारियों ने हाई कोर्ट में याचिका क्यों दाखिल की?
ईडी के तत्कालीन अधिकारियों कपिल राज, देवव्रत झा और अन्य ने FIR को निरस्त कराने और उसके आधार पर पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाने की माँग के साथ हाई कोर्ट का रुख किया। अदालत ने पहले पुलिस नोटिस और आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
अगली सुनवाई में राज्य सरकार को अदालत में जवाब दाखिल करना होगा। अदालत का सख्त रुख — बार-बार समय माँगने पर जुर्माना — संकेत देता है कि मामले की सुनवाई में और विलंब की गुंजाइश कम है।
राष्ट्र प्रेस
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