वित्त मंत्री सीतारमण: घरेलू मांग और आकांक्षाएँ हैं भारतीय अर्थव्यवस्था की असली ताकत
सारांश
मुख्य बातें
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2 नवंबर 2026 को मुंबई में आयोजित HSBC इंडिया के 'फर्दरिंग फाइनेंशियल इंक्लूजन' कार्यक्रम में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी मज़बूती का मुख्य स्रोत देश की विशाल घरेलू माँग और नागरिकों की बढ़ती आकांक्षाएँ हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार वित्तीय समावेश, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास और राजकोषीय अनुशासन को अपनी आर्थिक नीति के केंद्र में रख रही है।
घरेलू माँग और मध्य वर्ग की भूमिका
HSBC इंडिया के सीईओ हितेंद्र दवे के साथ बातचीत में सीतारमण ने कहा कि मध्य वर्ग के विस्तार ने लोगों की क्रय शक्ति को बढ़ाया है, जिसने घरेलू माँग को मज़बूत आधार दिया है। उनके अनुसार, यही आंतरिक माँग भारत को बाहरी आर्थिक झटकों के सामने अपेक्षाकृत स्थिर रखती है। गौरतलब है कि वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में भारत की खपत-आधारित वृद्धि को अर्थशास्त्री एक निर्णायक ढाल मानते हैं।
वित्तीय सुरक्षा और बीमा योजनाएँ
वित्त मंत्री ने वित्तीय सुरक्षा को सरकार की 'उच्च प्राथमिकता' बताते हुए प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) का उल्लेख किया, जो किफायती प्रीमियम पर आम नागरिकों को जीवन और दुर्घटना बीमा कवरेज देती हैं। इसके साथ ही अटल पेंशन योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा का भरोसा देती है। सरकार का लक्ष्य 2047 तक 'सभी के लिए बीमा' हासिल करना है।
आयुष्मान भारत और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच
सीतारमण ने आयुष्मान भारत योजना की विशेष सराहना करते हुए कहा कि प्रति परिवार ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा कवरेज लोगों को अपनी संपत्ति या ज़मीन बेचे बिना इलाज करवाने में सक्षम बना रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के विस्तार को भी उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता में सुधार का महत्वपूर्ण कारक बताया। विश्व बैंक के उस अनुमान का हवाला देते हुए, जिसके अनुसार लगभग 50 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं, उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि निरंतर नीतिगत प्रयासों और बुनियादी सेवाओं तक बेहतर पहुँच का परिणाम है।
AI कौशल और भविष्य के रोज़गार
भविष्य की श्रम ज़रूरतों की ओर ध्यान खींचते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी नौकरियों के लिए तैयार करने पर विशेष ध्यान दे रही है। उनके अनुसार, AI-केंद्रित प्रशिक्षण कार्यक्रम उद्योग की माँग और कार्यबल की क्षमताओं के बीच की खाई को पाटने में सहायक होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूली शिक्षा के बाद कौशल प्रशिक्षण ने गरीबी कम करने में ठोस भूमिका निभाई है।
राजकोषीय अनुशासन और पूँजीगत व्यय
सीतारमण ने पूँजीगत व्यय को सरकार की विकास रणनीति का 'मुख्य स्तंभ' बताया और राजकोषीय घाटे पर कड़ी नज़र रखने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'सरकारी खर्च जिम्मेदारीपूर्ण होना चाहिए।' शासन में स्थिरता को उन्होंने व्यावसायिक विश्वास और निरंतर आर्थिक वृद्धि का आधार बताया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ारों में अनिश्चितता के बीच भारत की राजकोषीय स्थिरता की तुलनात्मक मज़बूती पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान केंद्रित है।