तमिलनाडु GST कलेक्शन पर अन्नामलाई का हमला, TVK सरकार की वित्तीय नीतियों पर उठाए गंभीर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तमिलनाडु इकाई के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने 2 नवंबर 2026 को राज्य के जीएसटी (GST) कलेक्शन आंकड़ों को लेकर TVK सरकार पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि पिछले 6 महीनों के राजस्व आंकड़े राज्य की अर्थव्यवस्था और सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
GST आंकड़ों पर क्या बोले अन्नामलाई
अन्नामलाई ने अपनी पोस्ट में लिखा कि अक्टूबर 2026 में जीएसटी राजस्व में बढ़ोतरी ज़रूर देखी गई, लेकिन यह वृद्धि 10 प्रतिशत से कम यानी सिंगल डिजिट में रही। उनके अनुसार, कई महीनों की गिरावट के बाद यह मामूली सुधार काफी चिंताजनक है।
उन्होंने इस पर विशेष ज़ोर दिया कि यह स्थिति तब है जब तमिलनाडु में त्योहारी सीजन सक्रिय था, स्कूलों में लंबी छुट्टियाँ थीं, पर्यटन में उछाल था और आर्थिक गतिविधियाँ तेज थीं। ऐसे अनुकूल माहौल में भी राजस्व वृद्धि सिंगल डिजिट में रहना, उनके अनुसार, चिंताजनक संकेत है।
अन्य राज्यों से तुलना
अन्नामलाई ने कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात और हरियाणा का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों की आर्थिक गतिविधियाँ तमिलनाडु के समकक्ष हैं, फिर भी ये राज्य लगातार मजबूत GST ग्रोथ दर्ज कर रहे हैं। उन्होंने सरकार को यह भी सुझाव दिया कि पोस्ट-सेटलमेंट राजस्व की बढ़त को तर्क के रूप में न पेश किया जाए, क्योंकि IGST सेटलमेंट की प्रक्रिया कोई नई बात नहीं है और तुलना पिछले साल व इस साल के आंकड़ों के बीच की जा रही है।
पूंजीगत व्यय पर चिंता
BJP नेता ने TVK सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि कैपिटल एक्सपेंडिचर (पूंजीगत व्यय) की विभागीय निगरानी से शुरुआत की जाए। उनके अनुसार, आम धारणा यह है कि पिछले 6 महीनों में राज्य के कई विभागों में पूंजीगत व्यय धीमा पड़ गया है, जिससे सरकारी खर्च से बनने वाली चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) बाधित हो रही है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की स्थिति
अन्नामलाई ने मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के आंकड़े भी पेश किए। उनके अनुसार, तमिलनाडु देश में कुल फैक्ट्रियों की संख्या के मामले में पहले स्थान पर है और देश की 15.43 प्रतिशत फैक्ट्रियाँ यहाँ हैं। हालाँकि, ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) के आधार पर राज्य का योगदान केवल 10.26 प्रतिशत है, जो इसे राष्ट्रीय स्तर पर तीसरे स्थान पर रखता है।
उन्होंने यह भी बताया कि डेढ़ दशक पहले राष्ट्रीय मैन्युफैक्चरिंग GVA में तमिलनाडु की हिस्सेदारी 10.3 प्रतिशत थी और तब से इसमें कोई खास बदलाव नहीं आया है। इस बीच जो राज्य कभी तमिलनाडु से पीछे थे, वे अब इस अंतर को तेज़ी से कम कर रहे हैं — यह प्रतिस्पर्धात्मक पिछड़ेपन का स्पष्ट संकेत है।
योजना आयोग की रिपोर्टों पर टिप्पणी
अन्नामलाई ने अंत में कहा कि राज्य योजना आयोग द्वारा तैयार की गई क्षेत्रीय असंतुलन की रिपोर्टें अपने आप समस्याओं का समाधान नहीं करतीं — ये केवल यथास्थिति का दर्पण हैं। उनके अनुसार, इन रिपोर्टों को नीतिगत कार्रवाई में बदलने की ज़रूरत है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ धीरे-धीरे जोर पकड़ रही हैं और राज्य की आर्थिक सेहत एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनती दिख रही है।