13 अक्टूबर 2026
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स्टालिन का TVK सरकार पर तीखा हमला: महंगाई, बिजली संकट और ₹35/यूनिट खरीद पर उठाए सवाल

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स्टालिन का TVK सरकार पर तीखा हमला: महंगाई, बिजली संकट और ₹35/यूनिट खरीद पर उठाए सवाल

सारांश

सत्ता संभालने के चार महीने के भीतर TVK सरकार को DMK अध्यक्ष स्टालिन का तीखा सामना करना पड़ा। महंगाई से लेकर ₹35 प्रति यूनिट पर बिजली खरीद और AIADMK विधायकों को 'खरीदने' के आरोप तक — यह विपक्ष की पहली व्यापक और बहुमोर्चा चुनौती है।

मुख्य बातें

स्टालिन ने 13 अक्टूबर 2026 को एक्स पोस्ट के जरिए TVK सरकार पर बहुआयामी हमला बोला।
स्टालिन का आरोप — सत्ता के चार महीने में तमिलनाडु महंगाई और जीवनयापन लागत में देश में शीर्ष पर पहुँचा।
सरकार खुले बाजार से ₹35 प्रति यूनिट की दर पर बिजली खरीद रही है; विपक्ष ने पहले ही चेतावनी दी थी।
AIADMK के 15 विधायकों को पाले में लाने की कथित कोशिश और बिजली खरीद में भ्रष्टाचार के बीच संबंध का आरोप।
कुरुवई फसल बर्बादी और मेत्तूर बांध को गलत तारीख पर खोलने से डेल्टा क्षेत्र के किसान प्रभावित।
मुख्यमंत्री पर ₹5 करोड़ बैरिकेड रील और विदेश यात्राओं पर ध्यान देने का आरोप।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को TVK सरकार पर बहुआयामी हमला बोला। स्टालिन ने आरोप लगाया कि सत्ता संभालने के महज चार महीने के भीतर तमिलनाडु महंगाई और जीवनयापन लागत के मामले में देश में सबसे ऊपर पहुँच गया है। उन्होंने आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतें, बिजली संकट और किसानों की अनदेखी — तीनों मोर्चों पर सरकार की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया।

महंगाई पर खाद्य मंत्री के बयान से भड़के स्टालिन

स्टालिन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में कहा कि यदि सरकार आवश्यक वस्तुओं की कीमतें नियंत्रित करने में विफल रही होती, तो भी यह अलग बात थी — लेकिन खाद्य मंत्री का यह दावा कि जीवनयापन लागत में कोई वृद्धि नहीं हुई, गरीबों के गुस्से को और भड़का रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब बाजार में जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हुई हैं और आम उपभोक्ता दबाव महसूस कर रहे हैं।

गौरतलब है कि यह TVK सरकार के गठन के चार महीने के भीतर विपक्ष की पहली व्यापक सार्वजनिक आलोचना है, जो एक वरिष्ठ और अनुभवी पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से आई है।

बिजली संकट: ₹35 प्रति यूनिट खरीद पर सवाल

स्टालिन ने बिजली संकट के मुद्दे पर सरकार को कड़ी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल कई महीनों से संभावित बिजली कटौती की चेतावनी दे रहे थे, लेकिन सरकार ने समय पर कोई कदम नहीं उठाया। परिणामस्वरूप, अब सरकार को अंतिम समय में खुले बाजार से ₹35 प्रति यूनिट की अत्यधिक ऊँची दर पर बिजली खरीदनी पड़ रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली मंत्री पंजाब का उदाहरण दे रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री विजय विदेश यात्रा पर लंदन चले गए हैं। स्टालिन ने यह भी पूछा कि क्या TVK सरकार का 'बदलाव' का वादा यही था — कि पहले कम दरों पर हुए बिजली खरीद समझौते रद्द कर सबसे ऊँची दरों पर खरीदारी की जाए। उन्होंने बिजली खरीद में कथित अनियमितताओं की भी जाँच की माँग की।

विधायक 'खरीद' और भ्रष्टाचार का आरोप

DMK अध्यक्ष ने एक गंभीर आरोप यह भी लगाया कि TVK सरकार खुले तौर पर AIADMK के 15 विधायकों को अपने पाले में लाने की बात स्वीकार कर रही है। उन्होंने कहा कि बिजली खरीद में कथित भ्रष्टाचार के पीछे इन विधायकों को 'प्रबंधित' करने के लिए धन जुटाने का उद्देश्य हो सकता है। यह एक गंभीर आरोप है, जिसे सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

किसानों की अनदेखी और मेत्तूर बांध विवाद

कृषि क्षेत्र को लेकर स्टालिन ने कहा कि कुरुवई फसल खराब होने के दौरान डेल्टा क्षेत्र के किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता देने की जगह ज्योतिषी की सलाह पर भरोसा करते हुए मेत्तूर बांध को गलत तारीख पर खोला गया।

उन्होंने ₹5 करोड़ की लागत से सड़क किनारे लगाए गए बैरिकेड के बीच मुख्यमंत्री द्वारा रील बनाने की कवायद पर भी तीखा कटाक्ष किया और सवाल उठाया कि इससे जनता को वास्तविक लाभ क्या हुआ। निचले इलाकों के किसानों को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है और सांबा धान की खेती को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है।

शासन पर कड़ी टिप्पणी और आगे का संकेत

स्टालिन ने TVK सरकार के मंत्रिमंडल की तुलना 'आग लगी पूंछ वाले बंदरों के झुंड' से की — एक कठोर लाक्षणिक प्रहार — और आरोप लगाया कि सरकार में दूरदर्शिता और बुनियादी प्रशासनिक समझ का अभाव है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को शासन पर ध्यान देने की जगह हर महीने उडुपी, लंदन और विजयवाड़ा जैसे शहरों के दौरे पर रहते हैं।

DMK अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि सरकार की कथित लापरवाही और प्रशासनिक फैसलों के कारण राज्य की अर्थव्यवस्था, किसान और आम जनता — तीनों प्रभावित हो रहे हैं। यह हमला ऐसे समय में आया है जब TVK सरकार अभी अपने शुरुआती महीनों में ही है, और विपक्ष की रणनीति स्पष्ट है — जल्द से जल्द शासन विफलताओं की छवि स्थापित करना।

संपादकीय दृष्टिकोण

₹35 प्रति यूनिट बिजली खरीद और AIADMK विधायकों के 'दलबदल फंड' जैसे आरोप गंभीर हैं और इनकी स्वतंत्र जाँच जरूरी है — जो अभी तक नहीं हुई। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है, वह यह है कि TVK सरकार की प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई — और इस चुप्पी का राजनीतिक अर्थ उतना ही महत्वपूर्ण है जितना स्टालिन के आरोप।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्टालिन ने TVK सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
स्टालिन ने TVK सरकार पर महंगाई नियंत्रण में विफलता, ₹35 प्रति यूनिट की दर पर महंगी बिजली खरीद, डेल्टा किसानों की अनदेखी और AIADMK विधायकों को पाले में लाने के लिए कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता के चार महीने में तमिलनाडु देश में जीवनयापन लागत के मामले में शीर्ष पर पहुँच गया है।
तमिलनाडु में बिजली संकट क्यों पैदा हुआ?
स्टालिन के अनुसार, विपक्ष महीनों पहले से चेतावनी दे रहा था लेकिन TVK सरकार ने समय पर कदम नहीं उठाए। नतीजतन, सरकार को खुले बाजार से ₹35 प्रति यूनिट की अत्यधिक ऊँची दर पर बिजली खरीदनी पड़ रही है, जो पहले के कम दरों वाले समझौतों को रद्द करने के बाद हुआ।
TVK सरकार क्या है और यह कितने समय से सत्ता में है?
TVK (तमिलगा वेत्री कषगम) मुख्यमंत्री विजय की पार्टी है, जो तमिलनाडु में सत्तारूढ़ है। स्टालिन के अनुसार यह सरकार लगभग चार महीने पहले ही सत्ता में आई है, और इतने कम समय में ही विपक्ष ने कई मोर्चों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
किसानों की समस्याओं को लेकर स्टालिन ने क्या कहा?
स्टालिन ने आरोप लगाया कि कुरुवई फसल बर्बादी के दौरान डेल्टा क्षेत्र के किसानों को नजरअंदाज किया गया और मेत्तूर बांध को ज्योतिषी की सलाह पर गलत तारीख पर खोला गया। उन्होंने यह भी चेताया कि निचले इलाकों में पानी की कमी से सांबा धान की खेती खतरे में है।
AIADMK विधायकों और बिजली भ्रष्टाचार का क्या संबंध बताया गया है?
स्टालिन ने आशंका जताई कि बिजली खरीद में कथित अनियमितताओं के पीछे AIADMK के 15 विधायकों को अपने पक्ष में करने के लिए धन जुटाने का उद्देश्य हो सकता है। उन्होंने कहा कि TVK सरकार खुले तौर पर इन विधायकों को पाले में लाने की बात स्वीकार कर रही है। यह एक कथित आरोप है जिसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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