अन्नामलाई का तमिलनाडु सरकार पर हमला: जलीकट्टू, मंदिर प्रशासन और औद्योगिक नीति पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
वी द लीडर्स के अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने 20 सितंबर 2026 को मदुरै में आयोजित वैगई शिल्पी अवॉर्ड समारोह में तमिलनाडु की सत्तारूढ़ सरकार पर कड़े प्रहार किए — जलीकट्टू की रक्षा में विफलता, मंदिर प्रशासन में अनियमितता और औद्योगिक नीति की कमज़ोरी को मुद्दा बनाते हुए। तेप्पाकुलम के पास एक निजी हॉल में दिए गए इस संबोधन में उन्होंने राज्य की राजनीति में व्यापक बदलाव की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
संगठन की बढ़ती ताकत का दावा
अन्नामलाई ने दावा किया कि 5 जून को वी द लीडर्स की स्थापना के महज 15 दिनों के भीतर संगठन से 20 लाख सदस्य जुड़ गए। उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु के 5.6 करोड़ मतदाताओं में से 1.5 करोड़ से अधिक लोग किसी भी दल के प्राथमिक सदस्य नहीं हैं — एक संकेत कि राज्य में एक बड़ा राजनीतिक शून्य मौजूद है जिसे भरने की वह कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, 'तमिलनाडु की राजनीति में आई गिरावट को खत्म करना होगा और उसका समय अब करीब है। हमें अपने पर्यावरण, भाषा और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करनी चाहिए।'
जलीकट्टू विवाद पर सीधा निशाना
अन्नामलाई ने विधानसभा में चोलावंदन के विधायक करुप्पैया की उस टिप्पणी की कड़ी आलोचना की, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि जलीकट्टू युवाओं को गलत दिशा में ले जा रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि विधायक की अपनी पार्टी ने चुनावी घोषणापत्र में जलीकट्टू को अंतरराष्ट्रीय खेल के रूप में विकसित करने का वादा किया था।
उन्होंने कहा, 'जब सत्तारूढ़ दल के विधायक ने ऐसी टिप्पणी की, तो मुख्यमंत्री को तुरंत हस्तक्षेप कर उन्हें बैठने के लिए कहना चाहिए था।' जलीकट्टू को तमिल संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बताते हुए उन्होंने इसके संरक्षण और प्रचार की वकालत की।
मंदिर प्रशासन और HR&CE विभाग पर सवाल
अन्नामलाई ने कहा कि यदि उनकी पार्टी तमिलनाडु में सत्ता में आती है, तो हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग के कामकाज की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने मदुरै के मीनाक्षी अम्मन मंदिर में हुए कुंभाभिषेक समारोह का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने प्रवेश पासों की बिक्री इस तरह की, मानो सिनेमा टिकटों की कालाबाज़ारी हो रही हो।
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और विधायकों की धार्मिक पहचान को विधानसभा में राजनीतिक बहस का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए और सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।
पेरियार और सामाजिक सुधार पर रुख
अन्नामलाई ने सामाजिक सुधारक पेरियार का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि वह उनकी नास्तिक विचारधारा और ब्राह्मण-विरोधी सोच से सहमत नहीं हैं, लेकिन महिलाओं की मुक्ति और जातिगत भेदभाव समाप्त करने के उनके अभियानों का समर्थन करते हैं। यह बयान उन्हें तमिलनाडु की जटिल सामाजिक-राजनीतिक भूमि पर एक संतुलित छवि प्रस्तुत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
औद्योगिक नीति और विदेश यात्राओं पर आलोचना
मुख्यमंत्री की विदेश यात्राओं की भी आलोचना करते हुए अन्नामलाई ने कहा कि सरकार को तमिलनाडु में निवेश लाने वाली कंपनियों को वास्तविक अवसर देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि केवल आंकड़ों में निवेश घोषणाएँ जुटाने पर। उन्होंने राज्य में 'वास्तविक औद्योगिक संभावनाओं' को बढ़ावा देने की माँग की। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु सरकार अपने निवेश शिखर सम्मेलनों में बड़ी घोषणाओं पर गर्व करती रही है।