20 सितंबर 2026
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महिपालपुर जलभराव: दिल्ली हाईकोर्ट का NHAI और एजेंसियों को कड़ा नोटिस, 30 अक्टूबर तक माँगी जवाबदेही रिपोर्ट

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महिपालपुर जलभराव: दिल्ली हाईकोर्ट का NHAI और एजेंसियों को कड़ा नोटिस, 30 अक्टूबर तक माँगी जवाबदेही रिपोर्ट

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट ने महिपालपुर जलभराव पर सख्त रुख अपनाया — कहा कि कागजी बैठकें तो खूब हुईं, लेकिन ज़मीन पर कोई एजेंसी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं। NHAI की अनुपस्थिति पर 'सरासर अस्वीकार्य' टिप्पणी करते हुए 30 अक्टूबर तक कड़े निर्देश की चेतावनी दी।

मुख्य बातें

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 20 सितंबर 2026 को महिपालपुर जलभराव मामले में सभी संबंधित एजेंसियों को कड़ी फटकार लगाई।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम.
सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने NHAI की अनुपस्थिति को 'सरासर अस्वीकार्य' करार दिया।
मुख्य सचिव को 15 अक्टूबर तक दो बैठकें बुलाकर जिम्मेदार एजेंसियों की पहचान करते हुए रिपोर्ट देनी होगी।
सभी एजेंसियों को 30 अक्टूबर 2026 तक अपने उपायों और समयसीमाओं के साथ स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
DIAL ने शंकर विहार से रेडिसन सर्कल तक 3.5 किलोमीटर लंबी तूफानी जल निकासी नाली बनाने की 'सैद्धांतिक प्रतिबद्धता' दी है।
याचिका सामाजिक अधिकार संगठन सोशल ज्यूरिस्ट ने दायर की थी; मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर 2026 को होगी।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 20 सितंबर 2026 को महिपालपुर क्षेत्र में इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के नज़दीक वर्षों से जारी जलभराव और यातायात जाम की समस्या पर सरकारी एजेंसियों की घोर लापरवाही को लेकर कड़ी फटकार लगाई। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कई बैठकों के बावजूद एक भी एजेंसी ने अब तक समस्या की जिम्मेदारी लेने की तैयारी नहीं दिखाई है। अगली सुनवाई 30 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि और याचिका

यह मामला सामाजिक अधिकार संगठन सोशल ज्यूरिस्ट द्वारा दायर याचिका पर आधारित है, जिसमें महिपालपुर क्षेत्र — जो इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और गुरुग्राम जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित है — में भीषण जलभराव की स्थिति का उल्लेख किया गया था। दिल्ली सरकार के अनुसार एयरोसिटी क्षेत्र और राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुनर्विकास के कारण यहाँ मौजूदा जल निकासी नेटवर्क की वहन क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, और इससे नजफगढ़ नाले में जल निकासी बाधित हो रही है।

गौरतलब है कि उच्च न्यायालय पहले ही दिल्ली के मुख्य सचिव की निगरानी में एक विशेष कार्य बल गठित कर चुका है, जिसे दिल्ली नगर निगम (MCD), दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC), लोक निर्माण विभाग (PWD) और हवाई अड्डे के संचालक GMR समूह सहित सभी हितधारकों के साथ समन्वय करने का निर्देश दिया जा चुका है।

बैठकें हुईं, नतीजा शून्य

3 अगस्त 2026 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई थी, जिसके बाद कई निर्देश जारी हुए। इसके बाद विशेष कार्य बल की कई और बैठकें 4 अगस्त से 7 सितंबर के बीच आयोजित हुईं। परंतु उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत स्थिति रिपोर्ट में यह स्वीकार किया गया कि भारी कागजी कार्रवाई के बावजूद जमीनी स्तर पर यह स्पष्ट नहीं है कि कौन-सा काम किस एजेंसी को सौंपा जाना है और किसी भी उपाय के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की गई है।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने कहा, 'महिपालपुर में जलभराव की तस्वीरों को देखकर इन एजेंसियों को गंभीर प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी। हालांकि, ऐसा नहीं है क्योंकि कोई भी विशिष्ट एजेंसी जलभराव या यातायात जाम की समस्या को हल करने की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।'

NHAI की लापरवाही पर न्यायालय की तीखी टिप्पणी

न्यायालय ने NHAI की अनुपस्थिति और उसके वकील के रवैये पर विशेष नाराज़गी जताई। पीठ ने कहा कि आज न्यायालय के समक्ष NHAI का लापरवाह रवैया सरासर अस्वीकार्य है — NHAI का कोई भी अधिकारी उपस्थित नहीं था और उसके वकील, जो वर्चुअल रूप से हाज़िर हुए, ठोस दलीलें देने के लिए तैयार नहीं थे और उन्होंने केवल स्थगन का अनुरोध किया।

इसी तरह, दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) ने भी स्थगन का अनुरोध यह कहते हुए किया कि 3.5 किलोमीटर लंबी तूफानी जल निकासी नाली बनाने का उसका प्रस्ताव केवल 'सद्भावनापूर्ण प्रस्ताव' था। न्यायालय ने यह भी दर्ज किया कि उपस्थित दस्तावेज़ों से NHAI ही 'उक्त क्षेत्र के लिए जिम्मेदार एजेंसी प्रतीत होती है।'

अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपायों का प्रस्ताव

NHAI और DIAL ने संयुक्त रूप से कुछ उपाय प्रस्तावित किए हैं। अल्पकालिक उपायों में समालखा और महिपालपुर जंक्शन पर पंपिंग स्टेशन स्थापित करना तथा मानसून के दौरान स्थिर पंप और इनलेट की सफाई शामिल है। दीर्घकालिक उपायों में महिपालपुर नाले में जल अवरोध बिंदु का उन्मूलन, द्वारका एक्सप्रेसवे की जल निकासी प्रणाली की पुनर्योजना, समालखा नाले और नजफगढ़ नाले की नियमित सफाई और गाद निकालना, और रेलवे जल निकासी प्रणाली में सुधार जैसे कदम शामिल हैं।

न्यायालय के निर्देश और आगे की राह

पीठ ने दिल्ली के मुख्य सचिव को 15 अक्टूबर 2026 तक दो और बैठकें बुलाने और अल्पकालिक तथा दीर्घकालिक उपायों के लिए जिम्मेदार एजेंसियों की स्पष्ट पहचान करते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। 30 अक्टूबर 2026 तक सभी जिम्मेदार एजेंसियों को अपने कदमों और विशिष्ट समयसीमाओं के साथ स्थिति रिपोर्ट देनी होगी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अगली सुनवाई में सभी एजेंसियों के वरिष्ठ और सक्षम अधिकारी स्वयं उपस्थित रहें।

न्यायालय ने चेतावनी दी कि यदि NHAI और DIAL अगली सुनवाई तक उचित प्रस्ताव नहीं लाते, तो न्यायालय इस संबंध में 'कुछ कड़े निर्देश' पारित करने के लिए विवश होगा। यह मामला अब जवाबदेही तय करने की न्यायालय की प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जिम्मेदारी लेने की बारी आने पर पीछे हट जाती है। हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी अगर NHAI जैसी केंद्रीय संस्था का कोई अधिकारी सुनवाई में नहीं पहुँचता, तो यह संस्थागत जवाबदेही की गंभीर विफलता है। असली सवाल यह है कि क्या 30 अक्टूबर की समयसीमा महज एक और कागजी पड़ाव बनेगी या इस बार न्यायालय की चेतावनी का कोई वास्तविक असर होगा — खासकर जब एयरोसिटी जैसे बड़े व्यावसायिक विकास ने मौजूदा जल निकासी ढाँचे को पहले ही ध्वस्त कर दिया है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिपालपुर जलभराव मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 20 सितंबर 2026 को दिल्ली के मुख्य सचिव को 15 अक्टूबर तक दो बैठकें बुलाकर जिम्मेदार एजेंसियों की पहचान करने और रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। सभी एजेंसियों को 30 अक्टूबर 2026 तक अपने उपायों और समयसीमाओं के साथ स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
महिपालपुर में जलभराव की समस्या क्यों उत्पन्न हो रही है?
दिल्ली सरकार के अनुसार एयरोसिटी क्षेत्र और राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुनर्विकास कार्यों के कारण मौजूदा जल निकासी नेटवर्क की वहन क्षमता प्रभावित हुई है, जिससे नजफगढ़ नाले में जल निकासी बुरी तरह बाधित हो रही है। यह क्षेत्र इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और गुरुग्राम मार्ग पर है, जहाँ लगभग प्रतिदिन भारी यातायात जाम की भी सूचना मिलती है।
NHAI पर हाईकोर्ट ने इतनी कड़ी टिप्पणी क्यों की?
सुनवाई के दौरान NHAI का कोई भी अधिकारी उपस्थित नहीं था और उसके वकील वर्चुअल रूप से आए लेकिन ठोस दलीलें देने की बजाय केवल स्थगन का अनुरोध किया। न्यायालय ने इसे 'सरासर अस्वीकार्य' बताया और कहा कि दस्तावेज़ों के अनुसार NHAI ही इस क्षेत्र की जिम्मेदार एजेंसी प्रतीत होती है।
महिपालपुर जलभराव के लिए क्या अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपाय प्रस्तावित हैं?
अल्पकालिक उपायों में समालखा और महिपालपुर जंक्शन पर पंपिंग स्टेशन स्थापित करना और इनलेट की सफाई शामिल है। दीर्घकालिक उपायों में महिपालपुर नाले में जल अवरोध बिंदु का उन्मूलन, द्वारका एक्सप्रेसवे की जल निकासी प्रणाली की पुनर्योजना, नालों की नियमित गाद निकालना और रेलवे जल निकासी प्रणाली में सुधार शामिल हैं।
इस मामले में सोशल ज्यूरिस्ट की याचिका क्या थी?
सामाजिक अधिकार संगठन सोशल ज्यूरिस्ट ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर महिपालपुर क्षेत्र — जो इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास और गुरुग्राम जाने वाले मार्ग पर स्थित है — में भीषण जलभराव की शिकायत की थी। इसी याचिका के आधार पर न्यायालय ने विशेष कार्य बल गठित किया और एजेंसियों से समन्वित कार्रवाई की माँग की।
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