अन्नामलाई की 'वी द लीडर्स' का पहला बड़ा सम्मेलन पोलाची में, 20,000 लोगों की भागीदारी की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई के नेतृत्व में गठित जन-आंदोलन 'वी द लीडर्स' का पहला बड़ा जन-सम्मेलन रविवार, 13 जुलाई 2025 को पोलाची के निकट अचिप्पट्टी में आयोजित होगा। शाम 4 बजे IST से शुरू होने वाले इस सम्मेलन का केंद्रीय विषय नशा-मुक्त तमिलनाडु है, और पूरे राज्य से हज़ारों प्रतिभागियों के जुटने की उम्मीद है।
मुख्य घटनाक्रम
BJP छोड़ने और 'वी द लीडर्स' की स्थापना के बाद अन्नामलाई की अगुवाई में यह पहला बड़ा सार्वजनिक आयोजन है। अचिप्पट्टी में स्थित कार्यक्रम स्थल को एक विशाल कन्वेंशन स्पेस में तब्दील किया गया है, जहाँ लगभग 20,000 लोगों के बैठने की व्यवस्था है। जो प्रतिभागी मुख्य हॉल में प्रवेश नहीं पा सकेंगे, उनके लिए परिसर के बाहर बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं ताकि कार्यवाही सभी तक पहुँच सके।
सांस्कृतिक माहौल और सजावट
सम्मेलन हॉल की सजावट में पोलाची की पहचान और सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता दी गई है — विशेष रूप से अलियार बांध और पोलाची के प्रसिद्ध नारियल के बागों के दृश्यों को प्रदर्शित किया गया है। आयोजकों के अनुसार, यह सजावट स्थानीय पहचान को सम्मान देने के साथ-साथ कार्यक्रम के लिए एक प्रेरक वातावरण भी निर्मित करती है।
कार्यक्रम की रूपरेखा
सम्मेलन की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से होगी, जिनमें संगीत, नृत्य और अन्य कलात्मक माध्यमों से नशीली दवाओं के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया जाएगा। आयोजकों का विशेष ज़ोर युवाओं की भागीदारी पर है। उम्मीद है कि अन्नामलाई मुख्य भाषण में 'वी द लीडर्स' के उद्देश्यों, जन जागरूकता अभियान और नशा-मुक्त तमिलनाडु के संगठन के विज़न को स्पष्ट करेंगे।
सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था
तमिलनाडु के विभिन्न ज़िलों से आने वाले प्रतिभागियों की सुविधा के लिए ट्रैफिक प्रबंधन के विशेष उपाय किए गए हैं। कार्यक्रम स्थल के भीतर और बाहर सुरक्षा कड़ी की गई है और स्वयंसेवकों की टीमें भी तैनात की गई हैं। आयोजकों ने पूरे राज्य की जिला इकाइयों के सदस्यों और स्वयंसेवकों को आमंत्रित किया है।
आगे की राह
यह सम्मेलन 'वी द लीडर्स' आंदोलन की स्थापना के बाद का सबसे बड़ा जमावड़ा होने की संभावना है और इसे राज्यभर में संगठन की गतिविधियों के विस्तार की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में नशे की समस्या को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज़ हो रही है।