तमिलनाडु में यौन अपराधों पर दिनाकरन का CM विजय पर हमला, 2 दिनों में 4 जघन्य मामले
सारांश
मुख्य बातें
अम्मा मक्कल मुनेत्र कजगम (AMMK) के महासचिव टीटीवी दिनाकरन ने 15 जून 2026 को मुख्यमंत्री जोसेफ विजय पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि तमिलनाडु में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते यौन अपराध राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। दिनाकरन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी बयान में सरकार से तत्काल और युद्धस्तर पर कार्रवाई की माँग की।
दो दिनों में चार दिल दहलाने वाली घटनाएँ
दिनाकरन ने अपने बयान में पिछले दो दिनों के दौरान प्रदेश में सामने आए चार अलग-अलग मामलों का उल्लेख किया। इनमें शिवगंगा में एक आर्म्ड रिजर्व महिला पुलिसकर्मी के साथ बलात्कार, शंकरनकोविल के पास 10वीं कक्षा के एक छात्र के साथ यौन उत्पीड़न, श्रीविल्लिपुथुर के पास स्कूल जाने वाली 9 वर्षीया बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या, तथा गुमिदिपुंडी के पास 3 वर्षीया मासूम बच्ची के साथ बलात्कार एवं हत्या — जिसका शव झाड़ियों में मिला — शामिल हैं। इन घटनाओं ने पूरे राज्य में आक्रोश की लहर पैदा की है।
दिनाकरन की CM विजय को सीधी चुनौती
दिनाकरन ने कहा कि विकास कार्यों के क्रियान्वयन के लिए समय माँगना समझ में आता है, किंतु कानून-व्यवस्था की स्थिति को सुधारने के लिए किसी प्रतीक्षा की गुंजाइश नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री विजय पर निशाना साधते हुए कहा कि 'फिल्मी और आक्रामक डायलॉग' बोलने के बजाय उन्हें इन बार-बार हो रहे अत्याचारों के लिए ठोस जवाब देना होगा और जिम्मेदारी लेनी होगी। दिनाकरन ने सवाल किया कि आखिर जनता से कब तक ऐसे भयावह अपराध सहते रहने की उम्मीद की जा सकती है।
निवेश पलायन पर भी सरकार घिरी
यह पहली बार नहीं है जब दिनाकरन ने विजय सरकार को घेरा हो। 8 जून को भी उन्होंने राज्य में प्रमुख औद्योगिक निवेशों को बनाए रखने की सरकार की क्षमता पर सवाल उठाए थे। तब खबरें आई थीं कि थूथुकुडी में ₹29,000 करोड़ की परियोजना के लिए पूर्व तमिलनाडु सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने वाली मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने अब आंध्र प्रदेश सरकार के साथ करार कर लिया है।
दिनाकरन ने इस घटनाक्रम को राज्य की औद्योगिक नीति और निवेश तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न बताया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री, उद्योग मंत्री और बहुराष्ट्रीय निगमों के प्रतिनिधियों के बीच बैठकों की तस्वीरें तो खूब दिखाई जाती हैं, लेकिन इस बात की जानकारी बहुत कम मिलती है कि उन बैठकों के परिणामस्वरूप वास्तव में कितने ठोस समझौते, निवेश या रोजगार सृजित हुए।
आम जनता पर असर और व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में महिला सुरक्षा को लेकर पहले से ही सार्वजनिक बहस तेज है। आलोचकों का कहना है कि राज्य पुलिस बल में संसाधनों की कमी और त्वरित न्याय की धीमी प्रक्रिया अपराधियों को प्रोत्साहित करती है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी विपक्षी नेता ने तमिलनाडु में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सत्तारूढ़ सरकार को जवाबदेह ठहराने की माँग की हो।
आगे क्या
विपक्ष के बढ़ते दबाव के बीच अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं — क्या राज्य सरकार त्वरित गिरफ्तारी, फास्ट-ट्रैक न्याय और पुलिस सुधार जैसे ठोस कदम उठाएगी, या यह मामला भी महज राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाएगा।