हेमंत सोरेन पर झारखंड हाईकोर्ट का ₹10,000 जुर्माना, ईडी-SC/ST मामले में जवाब टालने पर नाराज़गी
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड हाईकोर्ट ने 1 अक्टूबर 2026 को पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया, जब उनकी ओर से प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज SC/ST एक्ट की प्राथमिकी को रद्द करने की माँग वाली याचिका में जवाब दाखिल करने के लिए छह हफ्ते का अतिरिक्त समय माँगा गया। अदालत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए जुर्माने के साथ केवल चार हफ्ते का समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 31 जनवरी 2024 का है, जब हेमंत सोरेन ने रांची के SC/ST थाने में ईडी के तत्कालीन अधिकारियों — कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। यह FIR 29 जनवरी 2024 को दिल्ली स्थित उनके आवास पर हुई ईडी की तलाशी के बाद दर्ज की गई थी।
प्राथमिकी में सोरेन ने आरोप लगाया था कि तलाशी अभियान अपमानजनक और दुष्प्रचार से भरा था। उन्होंने कहा था कि वे अनुसूचित जनजाति समुदाय से आते हैं और ईडी का ऑपरेशन उन्हें तथा उनके पूरे समुदाय को अपमानित करने वाला है। इस FIR के आधार पर रांची पुलिस ने CRPC की धारा 41A के तहत ईडी अधिकारियों को नोटिस जारी किया था।
ईडी अधिकारियों की याचिका
नोटिस मिलने के बाद ईडी अधिकारियों — कपिल राज, देवव्रत झा और अन्य — ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया और प्राथमिकी को निरस्त करने की माँग की। उनकी ओर से जाँच और FIR के आधार पर होने वाली आगामी कार्यवाही पर भी राहत माँगी गई थी।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान ईडी अधिकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा जारी नोटिस और आगे की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब माँगा था। यह रोक अभी भी प्रभावी बताई जा रही है।
बार-बार टालने पर अदालत की नाराज़गी
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब अदालत ने सोरेन की ओर से जवाब में देरी पर आपत्ति जताई हो। अप्रैल 2026 में हुई सुनवाई में भी जवाब दाखिल करने के लिए समय माँगा गया था और तब भी अदालत ने जुर्माना लगाया था। हाईकोर्ट पूर्व में भी सोरेन की ओर से जवाब दाखिल करने का स्पष्ट निर्देश दे चुका है।
यह ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक और कानूनी मोर्चे पर हेमंत सोरेन पहले से ही कई जटिल मामलों से जूझ रहे हैं। बार-बार जवाब टालने की प्रवृत्ति को अदालत ने अब सख्ती से लिया है।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 2 नवंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई तक हेमंत सोरेन की ओर से जवाब दाखिल करना अनिवार्य होगा। इस मामले में हाईकोर्ट का रुख यह संकेत देता है कि अदालत प्रक्रियागत विलंब के प्रति अब और सहिष्णु नहीं रहेगी। सुनवाई के परिणाम से यह तय होगा कि ईडी अधिकारियों के विरुद्ध SC/ST एक्ट के तहत दर्ज FIR आगे बढ़ती है या निरस्त होती है।