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हेमंत सोरेन पर झारखंड हाईकोर्ट का ₹10,000 जुर्माना, ईडी-SC/ST मामले में जवाब टालने पर नाराज़गी

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हेमंत सोरेन पर झारखंड हाईकोर्ट का ₹10,000 जुर्माना, ईडी-SC/ST मामले में जवाब टालने पर नाराज़गी

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने ईडी-SC/ST मामले में हेमंत सोरेन की ओर से बार-बार जवाब टालने की प्रवृत्ति पर ₹10,000 का जुर्माना ठोका। यह अप्रैल 2026 के बाद दूसरी बार है जब अदालत ने विलंब पर सख्ती दिखाई। अगली सुनवाई 2 नवंबर को।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने 1 अक्टूबर 2026 को पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया।
सोरेन की ओर से SC/ST मामले में जवाब के लिए छह हफ्ते का समय माँगा गया था; अदालत ने केवल चार हफ्ते दिए।
मूल FIR 31 जनवरी 2024 को ईडी अधिकारियों — कपिल राज , देवव्रत झा , अनुपम कुमार व अन्य के खिलाफ रांची के SC/ST थाने में दर्ज हुई थी।
अप्रैल 2026 में भी विलंब पर जुर्माना लगाया जा चुका है — यह दूसरी बार है।
मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को निर्धारित।

झारखंड हाईकोर्ट ने 1 अक्टूबर 2026 को पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया, जब उनकी ओर से प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज SC/ST एक्ट की प्राथमिकी को रद्द करने की माँग वाली याचिका में जवाब दाखिल करने के लिए छह हफ्ते का अतिरिक्त समय माँगा गया। अदालत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए जुर्माने के साथ केवल चार हफ्ते का समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 31 जनवरी 2024 का है, जब हेमंत सोरेन ने रांची के SC/ST थाने में ईडी के तत्कालीन अधिकारियों — कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। यह FIR 29 जनवरी 2024 को दिल्ली स्थित उनके आवास पर हुई ईडी की तलाशी के बाद दर्ज की गई थी।

प्राथमिकी में सोरेन ने आरोप लगाया था कि तलाशी अभियान अपमानजनक और दुष्प्रचार से भरा था। उन्होंने कहा था कि वे अनुसूचित जनजाति समुदाय से आते हैं और ईडी का ऑपरेशन उन्हें तथा उनके पूरे समुदाय को अपमानित करने वाला है। इस FIR के आधार पर रांची पुलिस ने CRPC की धारा 41A के तहत ईडी अधिकारियों को नोटिस जारी किया था।

ईडी अधिकारियों की याचिका

नोटिस मिलने के बाद ईडी अधिकारियों — कपिल राज, देवव्रत झा और अन्य — ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया और प्राथमिकी को निरस्त करने की माँग की। उनकी ओर से जाँच और FIR के आधार पर होने वाली आगामी कार्यवाही पर भी राहत माँगी गई थी।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान ईडी अधिकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा जारी नोटिस और आगे की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब माँगा था। यह रोक अभी भी प्रभावी बताई जा रही है।

बार-बार टालने पर अदालत की नाराज़गी

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब अदालत ने सोरेन की ओर से जवाब में देरी पर आपत्ति जताई हो। अप्रैल 2026 में हुई सुनवाई में भी जवाब दाखिल करने के लिए समय माँगा गया था और तब भी अदालत ने जुर्माना लगाया था। हाईकोर्ट पूर्व में भी सोरेन की ओर से जवाब दाखिल करने का स्पष्ट निर्देश दे चुका है।

यह ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक और कानूनी मोर्चे पर हेमंत सोरेन पहले से ही कई जटिल मामलों से जूझ रहे हैं। बार-बार जवाब टालने की प्रवृत्ति को अदालत ने अब सख्ती से लिया है।

आगे क्या होगा

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 2 नवंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई तक हेमंत सोरेन की ओर से जवाब दाखिल करना अनिवार्य होगा। इस मामले में हाईकोर्ट का रुख यह संकेत देता है कि अदालत प्रक्रियागत विलंब के प्रति अब और सहिष्णु नहीं रहेगी। सुनवाई के परिणाम से यह तय होगा कि ईडी अधिकारियों के विरुद्ध SC/ST एक्ट के तहत दर्ज FIR आगे बढ़ती है या निरस्त होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 के जुर्माने में नहीं, बल्कि उस पैटर्न में है जो उभर रहा है — एक वरिष्ठ राजनेता की ओर से अदालती प्रक्रिया में बार-बार विलंब, और हाईकोर्ट का उसे अब साफ़ नकारना। SC/ST एक्ट, जो ऐतिहासिक रूप से कमज़ोर वर्गों की सुरक्षा के लिए बना है, का इस्तेमाल सरकारी अधिकारियों के खिलाफ राजनीतिक संदर्भ में होना अपने आप में एक जटिल कानूनी प्रश्न खड़ा करता है। हाईकोर्ट ने ईडी अधिकारियों को अंतरिम राहत दे रखी है, जो संकेत देता है कि न्यायालय मूल FIR की वैधता पर गंभीर सवाल देख रहा है। 2 नवंबर की सुनवाई इस केस की दिशा तय करेगी।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हेमंत सोरेन पर झारखंड हाईकोर्ट ने जुर्माना क्यों लगाया?
हेमंत सोरेन की ओर से ईडी अधिकारियों से जुड़े SC/ST मामले में अदालत में जवाब दाखिल करने के लिए बार-बार अतिरिक्त समय माँगा जा रहा था। 1 अक्टूबर 2026 को छह हफ्ते की माँग पर नाराज़ होते हुए हाईकोर्ट ने ₹10,000 का जुर्माना लगाया और केवल चार हफ्ते दिए।
ईडी अधिकारियों के खिलाफ SC/ST FIR क्यों दर्ज की गई थी?
हेमंत सोरेन ने 31 जनवरी 2024 को रांची के SC/ST थाने में ईडी अधिकारियों कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार व अन्य के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। FIR में आरोप था कि 29 जनवरी 2024 को दिल्ली आवास पर हुई तलाशी अपमानजनक थी और अनुसूचित जनजाति समुदाय को बदनाम करने वाली थी।
इस मामले में ईडी अधिकारियों की याचिका पर हाईकोर्ट का क्या रुख है?
झारखंड हाईकोर्ट ने ईडी अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके खिलाफ पुलिस द्वारा जारी CRPC-41A नोटिस और आगे की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाई हुई है। राज्य सरकार से जवाब माँगा गया है और अब तक पूरी प्रक्रिया लंबित है।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को निर्धारित की है। तब तक हेमंत सोरेन की ओर से जवाब दाखिल करना अनिवार्य किया गया है।
क्या पहले भी इस मामले में जुर्माना लगाया गया था?
हाँ, अप्रैल 2026 में हुई सुनवाई में भी जवाब दाखिल करने में देरी पर अदालत ने जुर्माना लगाया था। 1 अक्टूबर 2026 का जुर्माना इस मामले में दूसरी बार की गई ऐसी कार्रवाई है।
राष्ट्र प्रेस
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