रूस के 4 नए क्षेत्रों ने नई दिल्ली में पेश किए पर्यटन उत्पाद, मॉस्को से परे की खूबसूरती से भारतीयों को किया रूबरू
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली स्थित रशियन हाउस में 2 नवंबर 2026 को आयोजित एक विशेष सत्र में रूस के चार क्षेत्रों ने भारतीय पर्यटन उद्योग के प्रतिनिधियों के सामने अपने पर्यटन उत्पाद प्रस्तुत किए, जिसका उद्देश्य भारतीय यात्रियों को यह दिखाना था कि रूस केवल मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग तक सीमित नहीं है। यह आयोजन 'ओपन योर रशिया 2.0 इनबाउंड टूरिज्म डेवलपमेंट प्रोग्राम' के अंतर्गत हुआ, जिसे सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक रिसर्च और रॉसोट्रुडनिचेस्टवो द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जा रहा है।
कार्यक्रम का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
भारत-रूस संबंध दशकों पुराने हैं, परंतु पर्यटन के मोर्चे पर यह साझेदारी अपेक्षाकृत कमज़ोर रही है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक रिसर्च की डिप्टी सीईओ एलेक्जेंड्रा उसाचेवा ने कहा, 'रूस और भारत बहुत करीब हैं और हमारी दोस्ती का इतिहास बहुत पुराना है। हालांकि पर्यटन क्षेत्र में हमारे संबंध उतने मजबूत नहीं हैं। हम यहाँ रूस को एक पर्यटन स्थल के रूप में प्रमोट करने और यह दिखाने के लिए हैं कि यह सिर्फ मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग ही नहीं है, बल्कि हमारे पास भारतीय यात्रियों के लिए कई अन्य डेस्टिनेशन भी हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय पर्यटकों की विदेश यात्राओं में विविधता आ रही है और वे नए, कम-ज्ञात गंतव्यों की तलाश कर रहे हैं।
भारतीय उद्योग की प्रतिक्रिया
फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FHRAI) की असिस्टेंट सेक्रेटरी जनरल पायल स्वामी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आतिथ्य सत्कार की कोई क्षेत्रीय या सीमा की पाबंदी नहीं होती। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जो आतिथ्य को महत्व देता है और यह 2.0 पहल भी उसी भावना से पर्यटकों का स्वागत करती है।
एसटीआईसी ट्रैवल्स के चेयरमैन और इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स की एविएशन एंड टूरिज्म एक्सपर्ट कमेटी के चेयरमैन सुभाष गोयल ने कहा कि आज का सेमिनार भारत और रूस के पर्यटन उद्योग के प्रतिनिधियों को एक साथ लाता है। उन्होंने कहा, 'रूस दुनिया का सबसे बड़ा देश है, और यहाँ प्रदर्शित किए गए चार नए क्षेत्र बहुत ही खूबसूरत हैं।'
रूसी क्षेत्रों की विशेषताएँ
लेनिनग्राद क्षेत्र की बाहरी संबंध समिति के अंतर्राष्ट्रीय सहयोग विभाग की मुख्य विशेषज्ञ एलेक्जेंड्रा वेरबिट्सकाया ने बताया कि उनके क्षेत्र में विशेष रूप से सुसज्जित इको-ट्रेल्स विकसित किए गए हैं, जहाँ पर्यटक पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में देख सकते हैं। उन्होंने कहा, 'पर्यटक इन रास्तों पर चल सकते हैं, प्रकृति का आनंद ले सकते हैं और बिना ज्यादा दूर जाए एक नए रूस की खोज कर सकते हैं।' रूस में अनेक वन्यजीव अभयारण्य और प्राकृतिक अजूबे हैं, जो अभी तक भारतीय पर्यटकों की नज़र से अछूते रहे हैं।
मॉस्को माइस एंबेसडर और एसोसिएशन ऑफ हॉस्पिटैलिटी प्रोफेशनल्स वेलफेयर (इंडिया) के वाइस प्रेसिडेंट अनुपम वोहरा ने कहा कि रूस में गंतव्यों की विविधता को उजागर करना इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यटक संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहते हुए भी देश के अन्य हिस्सों को एक्सप्लोर कर सकते हैं।
भारत-रूस पर्यटन साझेदारी की संभावनाएँ
भारत में रॉसोट्रुडनिचेस्टवो प्रतिनिधि कार्यालय के प्रमुख अलेक्जेंडर डोडोनोव ने विश्वास जताया कि इस सत्र से दोनों देशों के बीच पर्यटन क्षेत्र में नई साझेदारियाँ स्थापित होंगी। उन्होंने कहा, 'रूस के चार क्षेत्र भारत में पार्टनर तलाशने के लिए रशियन हाउस आए हैं। मुझे यकीन है कि कई कनेक्शन स्थापित होंगे।' गौरतलब है कि यह कार्यक्रम भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों को पर्यटन के माध्यम से नई ऊर्जा देने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में और अधिक रूसी क्षेत्रों के भारतीय बाज़ार में प्रवेश करने की उम्मीद है।