2 नवंबर 2026
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बैंक धोखाधड़ी में ईडी की बड़ी कार्रवाई: पारेख एल्युमिनेक्स की ₹53.95 करोड़ की संपत्ति जब्त, कुल कुर्की ₹546 करोड़ पार

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बैंक धोखाधड़ी में ईडी की बड़ी कार्रवाई: पारेख एल्युमिनेक्स की ₹53.95 करोड़ की संपत्ति जब्त, कुल कुर्की ₹546 करोड़ पार

सारांश

₹2,296 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले में ईडी ने पारेख एल्युमिनेक्स की ₹53.95 करोड़ की संपत्ति जब्त कर कुल कुर्की ₹546 करोड़ तक पहुँचाई। इंडियन ओवरसीज बैंक नेतृत्व के 17 बैंकों के कंसोर्टियम को नुकसान, जेके शाह ग्रुप पर ₹110.54 करोड़ की अपराध आय छुपाने का आरोप।

मुख्य बातें

ईडी ने 2 नवंबर 2026 को पारेख एल्युमिनेक्स लिमिटेड (PAL) की ₹53.95 करोड़ की चल-अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त कीं।
इस मामले में अब तक कुल ₹546 करोड़ की संपत्तियाँ कुर्क हो चुकी हैं; इससे पहले ₹493 करोड़ की कुर्की हो चुकी थी।
आरोप है कि कंपनी ने फर्ज़ी दस्तावेज़ों के आधार पर 17 बैंकों के कंसोर्टियम से ऋण लिया, जो बाद में ₹2,296 करोड़ का NPA बना।
जेके शाह ग्रुप पर ₹110.54 करोड़ की अपराध आय को स्थानांतरित करने में सहयोग का आरोप; एक लाभार्थी ने कथित तौर पर ₹70.25 करोड़ का फ़ायदा उठाया।
ईडी विशेष PMLA अदालत, मुंबई में चार्जशीट दाखिल, अदालत संज्ञान ले चुकी है।
जाँच जारी; अन्य संभावित लाभार्थियों और धन-प्रवाह की पहचान के लिए दस्तावेज़ों की छानबीन चल रही है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2 नवंबर 2026 को पारेख एल्युमिनेक्स लिमिटेड (PAL) से जुड़े ₹2,296 करोड़ से अधिक के बैंक धोखाधड़ी मामले में ₹53.95 करोड़ मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है। इस कार्रवाई के साथ इस मामले में अब तक कुल जब्त संपत्तियों का आँकड़ा ₹546 करोड़ को पार कर गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI), आर्थिक अपराध शाखा (EOW) मुंबई और EOB मुंबई द्वारा दर्ज प्राथमिकियों (FIR) के आधार पर शुरू की गई थी। पारेख एल्युमिनेक्स लिमिटेड और अन्य आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) तथा धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

ईडी की वर्तमान कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत की गई है। ईडी के मुंबई जोन-1 कार्यालय ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है।

आरोप: किस तरह हुई धोखाधड़ी

ईडी की जाँच में कथित तौर पर सामने आया है कि पारेख एल्युमिनेक्स लिमिटेड ने स्टॉक और देनदारियों से संबंधित बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किए गए दस्तावेज़ों के आधार पर बैंकों के एक समूह (कंसोर्टियम) से ऋण हासिल किया। बाद में कंपनी के ऋण खाते गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) घोषित कर दिए गए, जिनकी कुल राशि ₹2,296 करोड़ से अधिक बताई गई है।

जाँच एजेंसी के अनुसार, जेके शाह ग्रुप ने भी इस कथित धोखाधड़ी में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। आरोप है कि विभिन्न संस्थाओं और व्यक्तियों के ज़रिये ₹110.54 करोड़ की अपराध से अर्जित आय को इधर-उधर स्थानांतरित किया गया। एजेंसी का दावा है कि इस धनराशि का एक लाभार्थी ₹70.25 करोड़ का फ़ायदा उठाने में सफल रहा।

17 बैंकों के कंसोर्टियम को नुकसान

ईडी के अनुसार, इंडियन ओवरसीज बैंक के नेतृत्व वाले 17 बैंकों के एक कंसोर्टियम को इस कथित साजिश के कारण भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा। गौरतलब है कि बड़े पैमाने पर बैंक धोखाधड़ी के मामलों में कंसोर्टियम ऋण का दुरुपयोग एक स्थापित पैटर्न रहा है — जिसमें एकाधिक बैंकों से एक साथ ऋण लेकर दस्तावेज़ों में हेराफेरी की जाती है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में बैंकिंग क्षेत्र में NPA की वसूली को लेकर ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता पहले से अधिक बढ़ी हुई है।

अब तक की कार्रवाई और आगे की जाँच

ईडी पहले ही इस मामले में ₹493 करोड़ की संपत्तियाँ कुर्क कर चुकी है। इसके अलावा ईडी विशेष PMLA अदालत, मुंबई में अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल की जा चुकी है, जिस पर अदालत संज्ञान ले चुकी है।

एजेंसी अब छापों के दौरान ज़ब्त किए गए दस्तावेज़ों की बारीकी से जाँच कर रही है, ताकि इस बैंक धोखाधड़ी में संलिप्त अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं की पहचान की जा सके। अधिकारियों के अनुसार, धन के प्रवाह और अन्य संभावित लाभार्थियों की भूमिका का पता लगाने के लिए आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ₹2,296 करोड़ की कथित धोखाधड़ी का मात्र एक चौथाई है — जो यह सवाल उठाता है कि शेष राशि कहाँ गई और क्यों अब तक उसका पता नहीं चला। कंसोर्टियम-आधारित ऋण धोखाधड़ी का यह पैटर्न नया नहीं है; बड़े एनपीए घोटालों में बार-बार यही मॉडल सामने आता है — फर्ज़ी स्टॉक दस्तावेज़, एकाधिक बैंकों से एकसाथ ऋण, और लंबी अदालती प्रक्रिया। असली परीक्षा यह है कि PMLA अदालत में चार्जशीट के बावजूद सज़ा और वसूली दर क्या रहती है — जो ऐतिहासिक रूप से निराशाजनक रही है। जब तक धन वसूली और दोषसिद्धि दर में सुधार नहीं होता, बड़ी कुर्की की सुर्खियाँ पीड़ित बैंकों और अंततः जमाकर्ताओं को वास्तविक राहत देने में सीमित साबित होती हैं।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पारेख एल्युमिनेक्स बैंक धोखाधड़ी मामला क्या है?
पारेख एल्युमिनेक्स लिमिटेड (PAL) पर आरोप है कि उसने स्टॉक और देनदारियों के फर्ज़ी दस्तावेज़ों के आधार पर इंडियन ओवरसीज बैंक नेतृत्व के 17 बैंकों के कंसोर्टियम से ऋण प्राप्त किया। यह ऋण खाते बाद में ₹2,296 करोड़ से अधिक के NPA घोषित हो गए।
ईडी ने अब तक इस मामले में कितनी संपत्ति जब्त की है?
ईडी ने 2 नवंबर 2026 को ₹53.95 करोड़ की नवीनतम कुर्की के साथ इस मामले में कुल ₹546 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त कर ली हैं। इससे पहले ₹493 करोड़ की कुर्की पहले ही हो चुकी थी।
जेके शाह ग्रुप की इस मामले में क्या भूमिका बताई गई है?
ईडी के अनुसार, जेके शाह ग्रुप ने विभिन्न संस्थाओं और व्यक्तियों के माध्यम से कथित तौर पर ₹110.54 करोड़ की अपराध से अर्जित आय को स्थानांतरित करने में मदद की। एक लाभार्थी ने कथित तौर पर इसमें से ₹70.25 करोड़ का फ़ायदा उठाया।
इस मामले में कानूनी कार्रवाई कहाँ तक पहुँची है?
ईडी ने ईडी विशेष PMLA अदालत, मुंबई में अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल कर दी है और अदालत उस पर संज्ञान ले चुकी है। जाँच जारी है और आगे भी कार्रवाई की संभावना बताई गई है।
इस धोखाधड़ी में कौन से कानून लागू हुए हैं?
मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत ईडी की कार्रवाई हो रही है। इसके अलावा CBI, EOW और EOB मुंबई ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420 व 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं के तहत FIR दर्ज की थी।
राष्ट्र प्रेस
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