पैरीमैच बेटिंग कांड: ईडी की 5 राज्यों में 17 ठिकानों पर छापेमारी, ₹150 करोड़ की संपत्ति जब्त
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई जोनल ऑफिस ने 3 सितंबर को साइप्रस-आधारित अवैध ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म 'पैरीमैच' के खिलाफ चल रही जांच के तहत महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, गुजरात और उत्तर प्रदेश में 17 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई में ₹2.11 करोड़ की चल संपत्ति जब्त की गई और ₹37 करोड़ का बैंक बैलेंस फ्रीज किया गया, जबकि अब तक कुल ₹150 करोड़ की संपत्ति फ्रीज अथवा जब्त की जा चुकी है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने यह जांच मुंबई साइबर पुलिस स्टेशन में पैरीमैच के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) के आधार पर शुरू की। आरोप है कि इस प्लेटफॉर्म ने उपयोगकर्ताओं को अधिक रिटर्न का लालच देकर ऑनलाइन बेटिंग के जरिए ठगा और एक वर्ष में ₹3,000 करोड़ से अधिक की कमाई की। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म पर शिकंजा कसने की कोशिशें तेज कर रही है।
मनी लॉन्ड्रिंग का जटिल तंत्र
जांच में सामने आया कि बेटिंग से हुई कमाई को छिपाने के लिए एक बहु-स्तरीय (मल्टी-लेयर्ड) प्रणाली अपनाई गई। सबसे पहले धनराशि को कई 'म्यूल अकाउंट्स' और मर्चेंट अकाउंट्स के जरिए भेजा गया। इसके बाद इसे कैश मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएस) और डोमेस्टिक मनी ट्रांसफर (डीएमटी) एजेंट्स के माध्यम से वैध दिखाने का प्रयास किया गया।
जांच के अनुसार, बैंकिंग फंड्स ने वैध नकद संग्रह चक्र की जगह ले ली, जबकि बेटिंग नेटवर्क से जुड़े लोगों को उतना ही भौतिक नकद उपलब्ध कराया गया। इस नकद को हवाला और क्रिप्टो ऑपरेटर्स के जरिए विदेश स्थित पैरीमैच नेटवर्क द्वारा नियंत्रित क्रिप्टो वॉलेट्स में स्थानांतरित किया गया।
टूर-ट्रैवल और फर्जी विदेशी निवेश का दुरुपयोग
जांच में यह भी उजागर हुआ कि पैरीमैच नेटवर्क से आई धनराशि को पेमेंट इंटरमीडियरीज के जरिए भारतीय टूर और ट्रैवल ऑपरेटर्स के बैंक खातों में जमा किया गया, बिना किसी वास्तविक सेवा के बदले। ऐसे दो टूर और ट्रैवल ऑपरेटर्स के जरिए कम से कम ₹200 करोड़ का लेनदेन किया गया।
इसके अतिरिक्त, फर्जी ओवरसीज डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (ओडीआई) ट्रांजैक्शन और सेवाओं के जाली आयात के जरिए ₹500 करोड़ का लेनदेन किया गया। इन रेमिटेंस के लिए फर्जी वैल्यूएशन रिपोर्ट और जाली फॉर्म दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, जबकि वास्तविक लेनदेन में कोई व्यावसायिक आधार नहीं था।
छापेमारी में क्या मिला
तलाशी के दौरान जब्त की गई ₹2.11 करोड़ की चल संपत्ति में ₹61 लाख नकद, 1 किलोग्राम सोने की ईंट और कई आपत्तिजनक दस्तावेज व डिजिटल उपकरण शामिल हैं। इसके साथ ही ₹37 करोड़ का बैंक बैलेंस फ्रीज किया गया। गौरतलब है कि इस मामले में ईडी अब तक कुल ₹150 करोड़ की संपत्ति फ्रीज या जब्त कर चुकी है।
आगे क्या होगा
ईडी की जांच में म्यूल और मर्चेंट अकाउंट, सीएमएस-डीएमटी एजेंट, टूर-ट्रैवल ऑपरेटर, घरेलू कंपनियाँ, विदेशी निवेश संरचनाएँ, हवाला ऑपरेटर और क्रिप्टो चैनल का एक जटिल नेटवर्क सामने आया है। जांच एजेंसी इस नेटवर्क में शामिल सभी कड़ियों की पहचान कर आगे की कार्रवाई करेगी। यह मामला अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग के बीच गहरे संबंध को उजागर करता है, और आने वाले समय में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।