मणिपुर में 36,000 विस्थापित पुनर्वासित, 24,000 अभी भी शिविरों में: CM खेमचंद सिंह
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को राज्य विधानसभा में खुलासा किया कि 3 मई 2023 को भड़की जातीय हिंसा के चलते विस्थापित हुए 60,000 लोगों में से लगभग 36,000 को अब तक पुनर्वासित किया जा चुका है, जबकि शेष 24,000 लोग अभी भी राज्यभर के राहत शिविरों में जीवन बिता रहे हैं। यह जानकारी कांग्रेस विधायक लोकेश्वर सिंह द्वारा उठाई गई अल्पकालिक चर्चा के जवाब में सामने आई।
पुनर्वास की स्थिति
मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि 36,000 विस्थापितों की घर वापसी के बावजूद सरकार कुल 60,000 में से करीब 59,000 लोगों को अभी भी आर्थिक सहायता दे रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग अपने घरों को लौट चुके हैं, वे भी आजीविका और रोज़गार के अवसरों की कमी के कारण कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं — इसीलिए मासिक आर्थिक मदद जारी रखी गई है। पुनर्वास में हुई प्रगति का श्रेय उन्होंने विधायकों के सामूहिक सहयोग को दिया।
मानसिक आघात और स्वास्थ्य सेवाएँ
खेमचंद सिंह ने रेखांकित किया कि तीन वर्षों से जारी इस जातीय संकट ने प्रभावित लोगों में गहरा मानसिक आघात पैदा किया है। उन्होंने कहा कि केवल आर्थिक मदद से इस दीर्घकालिक संघर्ष के घावों को नहीं भरा जा सकता। स्वास्थ्य विभाग मानसिक परेशानियों को कम करने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठा रहा है।
समुदायों के बीच भरोसे की चुनौती
मुख्यमंत्री ने सामुदायिक अविश्वास को सबसे बड़ी बाधा बताया। उन्होंने कहा कि राहत शिविरों और हिंसा प्रभावित क्षेत्रों के अपने दौरों के दौरान उन्होंने पाया कि पहाड़ी और घाटी — दोनों क्षेत्रों के लोगों की साझा इच्छा शांति से जीना और अपने घरों को लौटना है। पिछले महीने उन्होंने विस्थापितों के छह-सात संयुक्त संगठनों के प्रतिनिधियों को बुलाकर पुनर्वास को सुगम बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया।
आर्थिक पुनरुद्धार और कनेक्टिविटी
इंफाल-दीमापुर (नागालैंड)-गुवाहाटी के बीच अंतर-राज्यीय बस सेवा की सफल बहाली के बाद, सरकार अब म्यांमार के साथ मोरेह व्यापार मार्ग को फिर से खोलने पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वे आजीविका और पुनर्वास के लिए योजना विभाग के साथ मिलकर नई पहलों पर चर्चा कर रहे हैं। श्रम विभाग के लेबर कार्ड जैसे उपायों को रोज़गार के अवसर बढ़ाने के संभावित माध्यम के रूप में रेखांकित किया गया।
सरकार का रुख
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए और सरकार सभी पक्षों से सुझावों का स्वागत करती है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि समुदायों के बीच विश्वास बहाल करना, लोगों को पुनर्वासित करना और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों को पुनः शुरू करने के लिए अनुकूल माहौल बनाना — ये सरकार की प्राथमिकताएँ हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में जातीय तनाव के तीन वर्ष पूरे होने को हैं और पुनर्वास की गति पर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है।