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मणिपुर में 36,000 विस्थापित पुनर्वासित, 24,000 अभी भी शिविरों में: CM खेमचंद सिंह

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मणिपुर में 36,000 विस्थापित पुनर्वासित, 24,000 अभी भी शिविरों में: CM खेमचंद सिंह

सारांश

तीन साल बाद भी मणिपुर की जातीय हिंसा के घाव पूरी तरह नहीं भरे — 60,000 विस्थापितों में से 36,000 घर लौटे, पर 24,000 अभी भी शिविरों में हैं। CM खेमचंद सिंह ने विधानसभा में माना कि भरोसे की कमी सबसे बड़ी चुनौती है।

मुख्य बातें

3 मई 2023 की जातीय हिंसा से विस्थापित 60,000 लोगों में से 36,000 को पुनर्वासित किया जा चुका है।
24,000 विस्थापित अभी भी मणिपुर के विभिन्न राहत शिविरों में हैं।
सरकार कुल 59,000 लोगों को मासिक आर्थिक सहायता दे रही है, जिनमें घर लौट चुके लोग भी शामिल हैं।
CM खेमचंद सिंह ने सामुदायिक अविश्वास को पुनर्वास की सबसे बड़ी बाधा बताया।
इंफाल-दीमापुर-गुवाहाटी बस सेवा बहाल; मोरेह-म्यांमार व्यापार मार्ग फिर खोलने पर काम जारी।
स्वास्थ्य विभाग प्रभावित लोगों की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय।

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को राज्य विधानसभा में खुलासा किया कि 3 मई 2023 को भड़की जातीय हिंसा के चलते विस्थापित हुए 60,000 लोगों में से लगभग 36,000 को अब तक पुनर्वासित किया जा चुका है, जबकि शेष 24,000 लोग अभी भी राज्यभर के राहत शिविरों में जीवन बिता रहे हैं। यह जानकारी कांग्रेस विधायक लोकेश्वर सिंह द्वारा उठाई गई अल्पकालिक चर्चा के जवाब में सामने आई।

पुनर्वास की स्थिति

मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि 36,000 विस्थापितों की घर वापसी के बावजूद सरकार कुल 60,000 में से करीब 59,000 लोगों को अभी भी आर्थिक सहायता दे रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग अपने घरों को लौट चुके हैं, वे भी आजीविका और रोज़गार के अवसरों की कमी के कारण कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं — इसीलिए मासिक आर्थिक मदद जारी रखी गई है। पुनर्वास में हुई प्रगति का श्रेय उन्होंने विधायकों के सामूहिक सहयोग को दिया।

मानसिक आघात और स्वास्थ्य सेवाएँ

खेमचंद सिंह ने रेखांकित किया कि तीन वर्षों से जारी इस जातीय संकट ने प्रभावित लोगों में गहरा मानसिक आघात पैदा किया है। उन्होंने कहा कि केवल आर्थिक मदद से इस दीर्घकालिक संघर्ष के घावों को नहीं भरा जा सकता। स्वास्थ्य विभाग मानसिक परेशानियों को कम करने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठा रहा है।

समुदायों के बीच भरोसे की चुनौती

मुख्यमंत्री ने सामुदायिक अविश्वास को सबसे बड़ी बाधा बताया। उन्होंने कहा कि राहत शिविरों और हिंसा प्रभावित क्षेत्रों के अपने दौरों के दौरान उन्होंने पाया कि पहाड़ी और घाटी — दोनों क्षेत्रों के लोगों की साझा इच्छा शांति से जीना और अपने घरों को लौटना है। पिछले महीने उन्होंने विस्थापितों के छह-सात संयुक्त संगठनों के प्रतिनिधियों को बुलाकर पुनर्वास को सुगम बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया।

आर्थिक पुनरुद्धार और कनेक्टिविटी

इंफाल-दीमापुर (नागालैंड)-गुवाहाटी के बीच अंतर-राज्यीय बस सेवा की सफल बहाली के बाद, सरकार अब म्यांमार के साथ मोरेह व्यापार मार्ग को फिर से खोलने पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वे आजीविका और पुनर्वास के लिए योजना विभाग के साथ मिलकर नई पहलों पर चर्चा कर रहे हैं। श्रम विभाग के लेबर कार्ड जैसे उपायों को रोज़गार के अवसर बढ़ाने के संभावित माध्यम के रूप में रेखांकित किया गया।

सरकार का रुख

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए और सरकार सभी पक्षों से सुझावों का स्वागत करती है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि समुदायों के बीच विश्वास बहाल करना, लोगों को पुनर्वासित करना और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों को पुनः शुरू करने के लिए अनुकूल माहौल बनाना — ये सरकार की प्राथमिकताएँ हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में जातीय तनाव के तीन वर्ष पूरे होने को हैं और पुनर्वास की गति पर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 की पुनर्वास संख्या राहत देने वाली है, लेकिन यह आँकड़ा असल तस्वीर का आधा ही दिखाता है — 24,000 लोग अभी भी शिविरों में हैं और 59,000 सरकारी सहायता पर निर्भर हैं, जो बताता है कि 'पुनर्वास' और 'सामान्य जीवन' में अभी बड़ा फ़ासला है। CM का यह स्वीकार करना कि सामुदायिक अविश्वास सबसे बड़ी चुनौती है, असल में यह संकेत है कि समस्या की जड़ें आर्थिक नहीं, राजनीतिक और सामाजिक हैं — जिन्हें लेबर कार्ड या बस सेवाओं से नहीं सुलझाया जा सकता। तीन साल में तीन मुख्यमंत्री बैठकें और छह-सात संगठनों के साथ चर्चा — यह गति उस संकट के पैमाने से मेल नहीं खाती जिसने पूरे राज्य को बाँट दिया है।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर में जातीय हिंसा से कितने लोग विस्थापित हुए और कितनों का पुनर्वास हुआ?
3 मई 2023 की जातीय हिंसा के कारण मणिपुर में कुल 60,000 लोग विस्थापित हुए थे। CM खेमचंद सिंह के अनुसार इनमें से लगभग 36,000 को पुनर्वासित किया जा चुका है, जबकि 24,000 अभी भी राहत शिविरों में हैं।
मणिपुर सरकार विस्थापितों को क्या सहायता दे रही है?
सरकार कुल 60,000 में से करीब 59,000 विस्थापितों को मासिक आर्थिक सहायता दे रही है — इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो घर लौट चुके हैं, क्योंकि आजीविका के अवसरों की कमी बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ भी उपलब्ध करा रहा है।
मणिपुर में पुनर्वास की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
CM खेमचंद सिंह ने विधानसभा में स्पष्ट कहा कि समुदायों के बीच भरोसे की कमी सबसे बड़ी बाधा है। तीन वर्षों के जातीय संघर्ष ने लोगों में गहरा मानसिक आघात पैदा किया है, जिसे केवल आर्थिक सहायता से दूर नहीं किया जा सकता।
मणिपुर में कनेक्टिविटी और व्यापार बहाली की क्या स्थिति है?
इंफाल-दीमापुर (नागालैंड)-गुवाहाटी के बीच अंतर-राज्यीय बस सेवा सफलतापूर्वक शुरू हो चुकी है। इसके बाद सरकार म्यांमार के साथ मोरेह व्यापार मार्ग को फिर से खोलने पर काम कर रही है।
मणिपुर विधानसभा में यह मुद्दा कैसे उठा?
कांग्रेस विधायक लोकेश्वर सिंह ने विधानसभा में अल्पकालिक चर्चा शुरू की, जिसके जवाब में CM खेमचंद सिंह ने पुनर्वास की स्थिति, सरकारी सहायता और आगे की योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा दिया।
राष्ट्र प्रेस
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