नेपाल आपदा: 7 दिन बाद भी लापता परिजनों की तलाश, ग्लोबल सिख ने हेलीकॉप्टर से शुरू किया सर्च ऑपरेशन
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल में आई विनाशकारी आपदा के सात दिन बीत जाने के बाद भी सैकड़ों परिवार अपने लापता परिजनों की खोज में बेबस खड़े हैं। इस संकट की घड़ी में ग्लोबल सिख के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमरप्रीत सिंह के नेतृत्व में एक राहत दल ने काठमांडू से हेलीकॉप्टर के ज़रिए उन दुर्गम क्षेत्रों तक पहुँचने का अभियान छेड़ा है, जहाँ अभी तक कोई सरकारी या निजी राहत टीम नहीं पहुँच सकी है।
हेलीकॉप्टर सर्च ऑपरेशन की शुरुआत
अमरप्रीत सिंह ने बताया कि आपदा की सूचना मिलते ही उनकी टीम तत्काल राहत कार्यों में जुट गई थी — कम्युनिटी किचन संचालित किए जा रहे थे, कंबल और गद्दे वितरित किए जा रहे थे तथा राहत शिविरों में आवश्यक सामग्री पहुँचाई जा रही थी। परंतु जब कई परिवार उनके पास यह कहते हुए पहुँचे कि उनके प्रियजन दुर्गम इलाकों में फँसे हैं, तो टीम ने हेलीकॉप्टर किराए पर लेकर हवाई सर्वे का निर्णय लिया।
उन्होंने कहा, 'कल हमने एक हेलीकॉप्टर हायर किया, पूरा सर्वे किया, एक जगह पर उतरे और निरीक्षण किया। आज हमें लापता परिवार के सदस्यों की पहचान करने के लिए फिर से हेलीकॉप्टर हायर करने की अनुमति मिली है।' टीम का आज का लक्ष्य टनल के पास लैंड करना है, जहाँ के लिए सभी आवश्यक अनुमतियाँ प्राप्त हो चुकी हैं।
परमिशन और संसाधन: सबसे बड़ी चुनौती
अमरप्रीत सिंह ने स्वीकार किया कि इस अभियान में दो सबसे बड़ी बाधाएँ हैं — हेलीकॉप्टर उड़ान की अनुमति प्राप्त करना और उपकरणों की व्यवस्था करना। उन्होंने कहा कि 'परमिशन लेना एक बहुत बड़ी चुनौती है। हेलीकॉप्टर हायर करना भी एक चुनौती है।' टीम के सभी सदस्यों को आपदा प्रबंधन में 10 से 15 वर्ष का अनुभव है, जिससे इन जटिल परिस्थितियों में काम करना संभव हो पा रहा है।
गौरतलब है कि नेपाल जैसे पहाड़ी देश में आपदा के बाद हवाई संसाधनों की माँग अचानक कई गुना बढ़ जाती है, जिससे निजी संस्थाओं के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराना और भी कठिन हो जाता है।
राहत कार्य: दीर्घकालिक योजना पर ज़ोर
अमरप्रीत सिंह ने स्पष्ट किया कि यह केवल तात्कालिक राहत का मामला नहीं है। उनके अनुसार, 'यह कोई कम समय के लिए राहत का काम नहीं है। हमें लंबे समय के लिए प्लानिंग के साथ काम करना होगा, चाहे इसमें एक साल लगे या दो साल।' टीम पौष्टिक भोजन तैयार करने से लेकर आपातकालीन आपूर्ति तक हर मोर्चे पर सक्रिय है।
यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में बड़े पैमाने पर आपदा राहत की ज़िम्मेदारी मुख्यतः सरकारी एजेंसियों और बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठनों पर है, और छोटे स्वयंसेवी समूहों की भूमिका अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती है।
परिवारों से अपील: शव बरामदगी तक जारी रहेगा प्रयास
अमरप्रीत सिंह ने कहा कि अब सात दिन बीत चुके हैं और काठमांडू में बैठकर परिवार के सदस्यों की पहचान के लिए या कम से कम शव बरामद करने के लिए अपील की जा रही है। उन्होंने कहा, 'हम नतीजे का अंदाजा नहीं लगा सकते, लेकिन हम वहाँ कोशिश कर रहे हैं जहाँ कोई और नहीं पहुँच पाया है।'
उन्होंने यह भी बताया कि टीम का आज का प्लान टनल क्षेत्र के पास एक या दो रात रुककर तलाश अभियान जारी रखने का है। आगे के दिनों में जितने भी संसाधन जुटाए जा सकेंगे, उन्हें उन्हीं इलाकों में लगाया जाएगा जहाँ वास्तविक ज़रूरत है।